फ़र्रुखाबादी विजेता (110) : मुरारी पारीक


हाय..नमस्कार एवरीवन..मैं सुनीता शानु, "खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" (110) के जवाबी अंक में आप सबका एक बार पुन: स्वागत करती हूं. कल आप सबके साथ आयोजक के नये रुप मे भी बहुत रोमांचित हुई. एक अलग प्रकार का अनुभव...यानि चुपचाप आप सब पर नजर रखना. बीच बीच मे आपसे बात करना... वाकई बहुत आनंद आया. सहयोग और इस आयोजन को सफ़ल बनाने के लिये आप सभी का आभार और यह मौका देने के लिये रामप्यारी मैम का भी बहुत आभार
.

अब "खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" (110) के सही जवाब का चित्र देखिये ...यह रहा !




और फ़र्रुखाबादी विजेता हैं मुरारी पारीक बधाई!



Murari Pareek said...
नृत्य महोत्सव के दौरान सींगों से सजे मुकुट पहनने के लिए जाने जानी वाली जनजाति मड़िया है जो की छतीस गढ़ के बस्तर जिला की जाती जय

11 November 2009 18:38


जवाब सही हों या गलत...यहां जो आनंद मिला आयोजक के रुप में उसको शब्दों मे व्यक्त करना मुश्किल है.

और अब अंत में.. मुरारी पारीक जी, भाई समीर लालजी, प. डी.के. शर्मा "वत्स", संगीता पुरी जी, ललित शर्मा जी, देवेंद्र जी, पी.सी.गोदियाल जी, मकरंद जी, महफ़ूज भाई, अजयकुमार जी झा का आभार व्यक्त करती हूं. और साथ ही डाँ. झटका का भी..जो इस खेल को हमारे लिये मनोरंजक बनाते हैं. और सबसे आखिर मे ऐसा शानदार और मनोरंजक मंच उपलब्ध करवाने के लिये ताऊजी का भी आभार व्यक्त करती हूं.

अब अगला फ़र्रुखाबादी सवाल आज शाम को ठीक ६ बजे पेश करेंगी खुद रामप्यारी मैम और डाँ.झटका, जो कि संगीता जी की फ़रमाईश पर खेल जगत से होगा. तब तक मैं आप सबसे इजाजत चाहुंगी. नमस्कार.



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9 comments:

  रंजन

12 November 2009 at 16:44

क्या क्या आईडिया लाते है ताऊ.. हम तो ओफिस से घर पहुँचते है तब तक तो सारे बंधु पहेली हल कर निकल लिये होते है.. हमारा कोई चांस नहीं..

  ललित शर्मा

12 November 2009 at 16:47

@रामप्यारी- इस चित्र मे उस युवक के सर पर कहीं पर सींगों का मुकुट नही है-वो मुकुट "गौर" के सींग का होता है और उसे मै अच्छी तरह पहचानता हुं, यहां की सभी जनजाति मुरिया, माड़िया, हल्बा, गोंड, मित्ता,कमार, कवर, कोरवा, मुंडा आदि के विषय मे अच्छी तरह से जानता हुँ इसिलिए मैने मुरारी से दस बार कहा था सींग बताओ-आप टिप्पणी मे देख लो, मै इनके बीच मे पैदा होने वाला पलने-बढने वाला व्यक्ति धोखा खा गया-।जबकि कल मैने चित्र को जोड़ कर भी देखा था,बड़ा अफ़सोस है मुझे, मुरारी जी के विजयी होने का नही, सीग नही दिखने का,

  Murari Pareek

12 November 2009 at 17:05

BHAAI LALIT JI JIS LINK MAIN MAINE DEKHAA US ME YAHI LIKHA THA !!!

  Murari Pareek

12 November 2009 at 17:07

नृत्य महोत्सव के दौरान सींगों से सजे मुकुट पहनने के लिए जाने जानी वाली जनजाति मड़िया है जो की छतीस गढ़ के बस्तर जिला की जाती जय

मैंने ये नहीं कहा है अभी जो मुकुट पहन रखा है उसमे सिंग है !!! विशेस कर मैंने jati बताई है ! ना की मुकुट की ये मुकुट सिंग से जड़ा हुआ है !!!!!

  सुनीता शानू

12 November 2009 at 17:18

ललीत जी एवं अन्य...माफ़ करना मै व्यस्तता के रहते समय पर नही आ पाई...हमारा प्रश्न था...(इसको देखकर यह बताईये कि यह किस प्रदेश की किस जनजाति / उपजनजाति की वेशभूषा है ? और इसे धारण करने वाला युवक है या युवती?) और मुरारी पारिक जी ने इसी का उत्तर दिया है

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

12 November 2009 at 17:58

मुरारी जी को बधाई....
इनकी विजययात्रा गधे से आरम्भ होकर जनजाति तक तो सही सलामत पहुँच गई....अब आगे देखते हैं, कहाँ तक जाती है :)

  ललित शर्मा

12 November 2009 at 17:59

@ सुनीता जी- बात कुछ कोनी काल सींग का ही चक्कर मे बावळा बण ग्या, पण आज कोनी बणा, जो बात मेरा मन मे थी, क्युंकि माड़िया बिना गौर (जंगली भैंसा)का सींग कै डांस कोनी करे।

  Udan Tashtari

12 November 2009 at 17:59

मुरारी बाबू को बधाई...


ललित भाई: सींग पगड़ी के अंदर हैं. :)

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

12 November 2009 at 18:32

मुरारी पारिक जी को बधाई!

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