फ़र्रुखाबादी विजेता (115) : प.डी.के.शर्मा "वत्स"


भाईयों और बहनों आप…सभी को रामराम…...ललित शर्मा खुश... जैसा कि आप जानते ही हैं..मैं ललित शर्मा , जी आप भ्रम मे मत पडिए..ये सरदार जी का वेष मैने कल आपको हिंट देने के वास्ते धारण किया था.
"खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" (115) के जवाबी अंक में आप सबका एक बार पुन: स्वागत करता हूं.

कल आप सबके साथ आयोजक के रुप मे बहुत आनंद आया. एक अलग प्रकार का अनुभव...यानि चुपचाप आप सब को देखा. बीच बीच मे आपसे बात की...वाकई इस तरह आपस में सबसे गपशप करना...सारे दिन भर के तनाव छू कर देता है. वाकई बडा आनंद आया.
.

आपके सहयोग और इस आयोजन को सफ़ल बनाने के लिये आप सभी का आभार और यह मौका देने के लिये रामप्यारी मैम का भी बहुत आभार

अब "खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" (115) के सही जवाब का चित्र देखिये ...यह रहा !



जी हां ये वही जोगिंदर शैली हैं जिनका डायलाग "रंगा खुश" बहुत प्रसिद्ध हुआ था. जो आज तक भी लोग बोलते हैं.

और फ़र्रुखाबादी विजेता हैं प. डी.के. शर्मा "वत्स",
बधाई!


पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...
जोगिन्दर

16 November 2009 21:09



इसके अलावा अन्य विजेता इस प्रकार रहे.
२.संगीता पुरी जी,
३.देवेंद्र जी,
४. भाई समीर लालजी,
५.मुरारी पारीक जी,

यहां जो आनंद मिला आयोजक के रुप में उसको शब्दों मे व्यक्त करना मुश्किल है.

और अब अंत में..
वरुण जयसवाल, रेखा,
अल्पना वर्मा
पी.सी.गोदियाल जी,
महफ़ूज भाई,
सुनीता शानु, सैय्यद भाई,
मकरंद जी,
महक, का आभार व्यक्त करता हूं. और साथ ही डाँ. झटका का भी..जो इस खेल को हमारे लिये मनोरंजक बनाते हैं.


और सबसे आखिर मे ऐसा शानदार और मनोरंजक मंच उपलब्ध करवाने के लिये ताऊजी का भी आभार व्यक्त करता हूं.

आज चारों तरफ़ जहां तू तू मैं मैं और वैमनस्य का माहौल दिखाई देता है वहीं आज ताऊ डाट काम ने एक बिल्कुल ही हंसने मुस्कराने का माहोल उपलब्ध करा दिया है. शाम को ६ बजते ही दिन भर की थकान दूर करने सब यहां इकठ्ठे होते हैं. और वाकई ऐसा माहोल बनता है जैसे सभी लोग एक घर मे बैठे गप्पे मार रहे हों.

अब अगला फ़र्रुखाबादी सवाल आज शाम को ठीक ६ बजे पेश करेंगी खुद रामप्यारी मैम और डाँ.झटका, जो कि अल्पना वर्मा की फ़रमाईश पर फ़ोक-डांस विषय से होगा. ठीक ६ बजे आप सब यह डांस देखने अवश्य पधारियेगा. अब मैं आप सबसे इजाजत चाहुंगा. रामराम.



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6 comments:

  संगीता पुरी

17 November 2009 at 16:08

बधाई !!

  Murari Pareek

17 November 2009 at 16:17

bahut bahut badhaai ho akhir pandit ji ne baazi maar li !!!!! lalit ji sardari pagadi khub jach rahi hai!!!

  सैयद | Syed

17 November 2009 at 16:44

अब इतने पुराने पुराने चेहरे दिखायेंगे तो हम कैसे पहचानेंगे.... :)

  M VERMA

17 November 2009 at 17:15

badhaai

  Rekhaa Prahalad

17 November 2009 at 17:54

बधाई !!

  Udan Tashtari

17 November 2009 at 17:54

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" जी को बधाई हो!!

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