खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (118) : रामप्यारी

हाय….आंटीज..अंकल्स एंड दीदी लोग..या..दिस इज मी..रामप्यारी.. आज के इस खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी मे रामप्यारी और डाक्टर झटका आपका हार्दिक स्वागत करते है. और अब शुरु करते हैं आज का “खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी” आज का सवाल प. डी.के. शर्मा "वत्स", की पसंद का है.


आज के "खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" का चित्र नीचे देखिये और बताईये यह पत्ता काहे का है? असली है या आर्टीफ़िशियल?



यहां माडरेशन नही है....यह आपका खेल आप ही खेल रहे हैं... अत: ऐसा कोई काम मत करिये जिससे खेल की रोचकता समाप्त हो ... सारे जवाब सबके सामने ही हैं...नकल करना हो करिये..नो प्राबलम टू रामप्यारी....बट यू नो?..टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.

परेशानी हो...डाक्टर झटका आपकी सेवा मे मौजूद हैं.. २१ सालों के तजुर्बेकार हैं डाक्टर झटका. पर आप अपनी रिस्क पर ही उनसे मदद मांगे. क्योंकि वो सही या गलत कुछ भी राय दे सकते हैं. रिस्क इज यूवर्स..रामप्यारी की कोई जिम्मेदारी नही है.

तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. इसका जवाब कल शाम को 4:00 बजे दिया जायेगा, तब तक रामप्यारी की तरफ़ से रामराम और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.


"बकरा बनाओ और बकरा मेकर बनो"




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Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद

70 comments:

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 18:00

नीबू का पत्ता!!!

  Murari Pareek

19 November 2009 at 18:01

asali hai chaay ki patti

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:02

मुझे तो पत्‍ते से नींबू की गंध आ रही है .. आर्टिफिशियल नहीं हों सकती !!

  Devendra

19 November 2009 at 18:03

आम का पत्ता
आर्टिफीसियल है।

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:03

हां असली है .. खौलते पानी में गिरी तो बिल्‍कुल चाय का टेस्‍ट दे रही है !!

  पी.सी.गोदियाल

19 November 2009 at 18:03

सबको राम-राम, नीबू का

  पी.सी.गोदियाल

19 November 2009 at 18:03

आम का

  पी.सी.गोदियाल

19 November 2009 at 18:04

पालक का

  Murari Pareek

19 November 2009 at 18:05

mujhe chaay pila dijiyegaa!!!

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:05

कमाल के प्रश्‍न पूछती है रामप्‍यारी भी !!

  Murari Pareek

19 November 2009 at 18:05

chaay ka pataa lock kar dewen!!!

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 18:08

tea leaves

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 18:08

चाय की पत्ती

  गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'

19 November 2009 at 18:09

निम्बूड़ा निम्बूड़ा निम्बूड़ा निम्बूड़ा

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:10

are baap re aaj fir late ho gaya
vaise chai ki patti hi hai
sabko Salaam aur Ram Ram

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 18:10

Cameron Highlands की चाय की पत्ती

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:10

Sameer ji mera kal ka din nahin hua abhi tak aapke phone ka wait hi kar raha hoon abhi tak :)

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 18:10

सबको राम राम और मुरारी बाबू को.... :)

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:11

आर्टिफिशियल टी लीफ !!

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:11

Asali chai ki patti hi hai bhai Murari ji jeet gaye aap
neembu ki itni patli nahin hoti ji

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 18:12

दीपक, दो दिन से दिन में दफ्तर में फंसा हूँ..आज पक्का लगाता हूँ अभी घर लौट कर...३-४ घंटे में. :)

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:13

Sangeeta ji aap to chitra dekh ke khushboo leleti hain.. main apni ek photo bhejta hoon bataiyega please aaj kaun sa tel lagaya maine sar me? :)
gambheerta se na len
halka majak hai

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:14

Sameer ji aapne pala badal liya
galat baat hai

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:15

मशाल जी .. आपके कहे अनुसार मजाक में ले लिया !!

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:15

theek hai main wait karta hoon sir, kya baat hai aaj Mahfooz bhai nahin dikha rahe.. abhi theek nahin hue lagta hai..

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:16

Sangeeta maam, majak karne se vaise dar lagta hai mujhe kyonki log aksar mere majak ko ulta hi lete hain..

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:17

समीर जी को यहां तक पता चल गया कि Cameron Highlands की चाय पत्‍ती है !!

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:18

बस यही तो कमाल है ऐसे ही नहीं सब गुरुदेव कहते.. समीर जी को..

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:19

इसलिए मैं समीर जी के साथ ही हूं .. वैसे समीर जी को बहुत बहुत बधाई !!

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:22

वैसे मुरारी पारीक जी कह चुके हैं .. asali hai chaay ki patti .. अब रामप्‍यारी की मर्जी .. वैसे मुरारी पारीक जी को भी जीत की बधाई दे दती हूं !!

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:23

लेकिन संगीता जी आज तो चेले जीत गए... मुरारी जी आज के विजेता..वो भी मेरे क्लास में लाते आने की वजह से.. ha ha ha

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 18:23

धन्यवाद, संगीता जी. :)

बाद में वापस आता हूँ..एक छोटी सी मिटिंग अटेंड करके.

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

19 November 2009 at 18:23

Confirming tea leaves with zig-zagged edge

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:24

एहसान मानिये मुरारी जी की मेरी साईकिल पंचर हो गयी...

  संगीता पुरी

19 November 2009 at 18:24

और साइड में मेरा नाम तो रहेगा ही .. नकल करने में कुशल जो हो गयी हूं !!

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:25

लो पंडित जी आगये, प्रणाम आपको... क्या हुआ चाय की खुशबू से ही जागे क्या आप भी..?

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:27

नक़ल में भी तो अकाल चाहिए की नहीं हमने तो नहीं गोदियाल सर की नक़ल मारी.. ना ही गिरीश जी की..है की नहीं..

  सर्किट

19 November 2009 at 18:28

भाई आगयेले हैं...और बोल रयेले हैं कि ये तरबूज का पत्ता है...

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

19 November 2009 at 18:30

भई दीपक जी, जाग तो पहले ही गए थे लेकिन आप सब लोगों नेम चाय चाय बोल कर चाय की इच्छा जगा डाली..इसलिए बस चाय पीने को रुके थे :)

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 18:30

Cameron Highlands की चाय की पत्ती- एकदम असली!!

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:35

वाह पंडित जी... तो पीजिये आप भी kemron highlands की चाय... अरे सर्किट भाई इनको मुन्ना भाई को समझाते क्यों नहीं... ज्यादा चढ़ गेली है लगता है..

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

19 November 2009 at 18:35

This comment has been removed by the author.
  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

19 November 2009 at 18:38

समीर जी, जरा बताएंगें कि आपको ये जानकारी कहां से मिली कि ये चाय की पत्ती Cameron Highlands की है ?

  तोसे लागे नैना

19 November 2009 at 18:38

सौ प्रतिशत चाय की पत्ती

  सर्किट

19 November 2009 at 18:40

भाई किसकू चढ रयेली है? अरे ए सर्किट जरा उतार डाल....

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:42

पंडित जी मैं सिद्धांतवादी आदमी हूँ रुल नहीं तोड़ता वरना बता देता अभी वो मैंने भी देखलिया वैसे..:) की ये cameron highlands कैसे है...
aap to khud hi samajhdaar hain..

  सर्किट

19 November 2009 at 18:44

मुरारी भाई जवाब बदल डालने का..ये पक्का पता लगा लियेला है कि ये लौकी का पता है.

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:45

ऐ मुन्ना भाई अपन को झगडा नहीं मांगता ताऊ के इलाके में.. सर्किट को परेशान नैन करने का क्या?
:)

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:45

ऐ मुन्ना भाई अपन को झगडा नहीं मांगता ताऊ के इलाके में.. सर्किट को परेशान नैन करने का क्या?
:)

  सर्किट

19 November 2009 at 18:46

अब भाई यहां से जा रयेले हैं किसी को कुछ पूछने का है क्या? बस भाई यहां दो मिनट और रुक कर जा रयेले हैं. अपुन आज जीत गयेला है.

  Rekhaa Prahalad

19 November 2009 at 18:47

Namaskar. khusbu kuch aur hai dikhati kuch aur hai ye to hari chai ki patti hai.

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

19 November 2009 at 18:52

दीपक जी, किसी की मदद करने के लिए कभी अपने सिद्धान्तों का परित्याग भी करना पडे तो निसंकोच कर देना चाहिए...ऎसा हमने सुना है:)

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:53

lekin abhi doctor jhatka ka injection jhelna padega mujhe, paropkaar ke chakkar me..

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 18:57

kya hua bhaai itni khaamoshee kyon hai???

  Dipak 'Mashal'

19 November 2009 at 19:01

chaliye bhai sabko namaskaar fir chalta hoon ab...

  डाँ. झटका..

19 November 2009 at 19:07

@ M VERMA

आप ७:३० बजे तक कल के सवाल ११९ के लिये विषय लोक करवा सकते हैं . उसके बाद आपका नामित प्रतिनिधी ८:०५ तक करवा सकता है. आपको विषय निम्न मे से चुनने हैं.

१.पशु पक्षी
२.फ़िल्म
३.कोई अन्य

धन्यवाद.

  M VERMA

19 November 2009 at 19:23

नारियल या गोभी का पत्ता लगता है

  तोसे लागे नैना

19 November 2009 at 19:43

चाय का पत्ता ही है मगर रामप्यारी यह कैसी पहेली एक पत्ते के पीछे सबको पागल कर डाला :)

  तोसे लागे नैना

19 November 2009 at 19:44

किसी पुराने शासक का चित्र बुझो अबकी बार...सबको इतिहास याद आयेगा.हा हा हा

  Nirmla Kapila

19 November 2009 at 20:26

ीआम का पत्ताआआज हम भी तुक्का लगा लेते हैं

  Devendra

19 November 2009 at 20:40

आज सब गड़बड़ा गए लगते हैं
चाय की पत्ती जैसी दिख रही है न
मगर है नहीं
जो जैसी दिखती है
वो वैसी कहाँ होती है
आम की पत्ती है
आर्टिफीसियल

  Devendra

19 November 2009 at 20:44

हा. हा.. हा...
गूगल से पहचानिएगा!
हम सच्ची मुच्ची देख रहे हैं!!!

  Devendra

19 November 2009 at 20:47

लिंक दे देंगे तो आप भी मान जाएंगे
मगर नहीं न देंगे
सजा कौन भुगतेगा
नेकी करो सजा पाओ
ई भी कोई बात हुई!

  रंजन

19 November 2009 at 20:48

पत्ता तो पेड़ पौधे का होगा न... ताश का तो होने से रहा...:)

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 21:16

फिल्म लॉक कर लो!!

  डाँ. झटका..

19 November 2009 at 21:21

@ उडनतश्तरी

आपका विषय कल के लिये लाक किया गया है.
क्या आप कल के आयोजक बनना पसंद करेंगे? पर ध्यान रखियेगा कि आप कल के खेल मे भाग नही ले पायेंगे.

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 21:24

बना दो डॉक्टर झटका!! कल मुरारी बाबू से लिंक मांगेगे. :)

मुझे आयोजक बनना मंजूर है जी!!

  Udan Tashtari

19 November 2009 at 21:25

मेरी ही तस्वीर लगा देना, एक फिल्म में आगे चल कर काम करने वाला हूँ. :)

  डाँ. झटका..

19 November 2009 at 21:28

@ उडनतश्तरी

आपने आयोजक बनना मंजूर किया आपको धन्यवाद

  Ratan Singh Shekhawat

20 November 2009 at 08:27

हमें तो नहीं पता राम प्यारी !

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