फ़र्रुखाबादी विजेता (126) : मुरारी पारीक

"खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" (126) के सही जवाब का चित्र यह रहा !




और फ़र्रुखाबादी विजेता हैं मुरारी पारीक जी,
बधाई!


Murari Pareek said...
shot put

27 November 2009 18:02



अन्य विजेता इस प्रकार रहे!

२.प. डी.के. शर्मा "वत्स",
3.श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

आप को बहुत बधाई और शुभकामनाएं.

जरुरी घोषणा



आज पंचों द्वारा प.डी.के.शर्मा "वत्स" मामले की अपील पर सुनवाई की गई. उपरोक्त केस मे यह पाया गया है कि कुल ५५ टिप्पणियां अतिरिक्त जुर्माना लेट फ़ीस के रुप मे हुआ.

पंचों का यह निर्णय रहा कि मूल मे कुछ भी छूट नही दी जा सकती. अत: सिर्फ़ यह अतिरिक्त जुर्माने की ५५ टिप्पणियां और ८ टिप्पणियां मानसिक क्लेश पेटे यानि कुल ६३ टिप्पणियां ही वापस करने की सिफ़ारिश मानी गई.

अब पंचों ने यह व्यवस्था दे दी है कि प.डी.के. शर्मा "वत्स" आज टिप्पणी में अपना ब्लाग का पता देंगे. वहां पर जाकर निम्न लोगों को यह भार ऊठाना होगा.

क्युं कि सरकारी कुयें मे एक बार गिरने के बाद कुछ भी वापस नही आ सकता. तो अब पंच ही भुगतेंगे.

१. आज के प्रथम विजेता मुरारी पारीक २१ टिप्पणियां अपने पास से "वत्स" जी को देंगे.
२. आज के दूसरे विजेता श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज को भी २१ टिपण्णियां वापस करनी हैं.

आप दोनों को आज जीते हैं इस लिये यह खर्चा आपकी जेब से करना है. इसके अलावा..कहीं ना कहीं वत्स जी को उकसाने का दोषी उडनतश्तरी को पाया गया है, हालांकि यह सिद्ध नही हुआ है.

अत: बाकी बची शेष २१ टिप्पणीयां उडनतश्तरी को देनी है "वत्स" जी के ब्लाग पर. आप तीनों से निवेदन है कि अविलंब यह राशि वत्स जी को भुगतान करें.




अगला फ़र्रुखाबादी सवाल आज शाम को ठीक ६ बजे. तब तक रामप्यारी की तरफ़ से नमस्ते.



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Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद

3 comments:

  Murari Pareek

28 November 2009 at 17:03

dekhiye panch parmeshwar hotey hain isliye unkaa aadesh manana nihayat jaruri hai !!! isliye main 21 tiuppaniyon ki rashid prapt kar ke shighra jamaa karwaungu!!!

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

28 November 2009 at 17:37

हमारा तो ये शुरू ही विश्वास रहा है कि अन्त में जीत हमेशा सच की ही होती है...आज पंचों का यह निर्णय देखकर हमारा ये विश्वास ओर परिपक्व हुआ है:)
सच पूछिए तो आत्मा प्रसन्न हो गई :)

वैसे इस सारे षडयन्त्र के मुख्यदोषी (समीर लाल जी) के लिए ये सजा हमें कुछ कम लगी...लेकिन..हम इतने में ही संतुष्ट हैं कि चलो न्याय अभी मरा नहीं :)

  Udan Tashtari

28 November 2009 at 20:23

बहुत बहुत बधाई!!

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