खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (131) रामप्यारी

हाय….आंटीज..अंकल्स एंड दीदी लोग..या..दिस इज मी..रामप्यारी.. आज के इस खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी मे रामप्यारी और डाक्टर झटका आपका हार्दिक स्वागत करते है. और अब शुरु करते हैं आज का “खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी” आज का सवाल उडनतश्तरी की पसंद का है. पर वो आज से तीन सप्ताह तक पहेली में भाग नही ले पायेंगे. अगर वो चाहे तो इस दरम्यान आयोजक मंडल मे शामिल हो सकते हैं. रामप्यारी को बडी खुशी होगी.


आज के "खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी" का चित्र नीचे देखिये और बताईये ये दोनो कौन हैं? और किस फ़िल्म का यह सीन है?




यहां माडरेशन नही है....यह आपका खेल आप ही खेल रहे हैं... अत: ऐसा कोई काम मत करिये जिससे खेल की रोचकता समाप्त हो ... सारे जवाब सबके सामने ही हैं...नकल करना हो करिये..नो प्राबलम टू रामप्यारी....बट यू नो?..टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.

परेशानी हो...डाक्टर झटका आपकी सेवा मे मौजूद हैं.. २१ सालों के तजुर्बेकार हैं डाक्टर झटका. पर आप अपनी रिस्क पर ही उनसे मदद मांगे. क्योंकि वो सही या गलत कुछ भी राय दे सकते हैं. रिस्क इज यूवर्स..रामप्यारी की कोई जिम्मेदारी नही है.

तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. इसका जवाब कल शाम को 4:00 बजे दिया जायेगा, तब तक रामप्यारी की तरफ़ से रामराम और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.


"बकरा बनाओ और बकरा मेकर बनो"




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Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद

213 comments:

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 18:02

नरगिस-दुर्गा खोटे

  Murari Pareek

2 December 2009 at 18:03

madhubala gurudutt

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:05

खेलो खेलो...हमें क्या!!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:06

हम तो जानते हैं मगर सजा काट रहे हैं आप लोगों के कारण..खूब दो जबाब हंस हंस कर...

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 18:08

sameer bhai ram-ram

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:11

अब क्या राम राम ललित भाई..हम तो इलाहाबाद जा रहे हैं..वहीं अखाड़ा खोलेंगे. बस दोनों बाबा लोगों का इन्तजार कर रहे हैं यहाँ बैठे.

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:11

Nutan and gurudatt

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:12

Sabko ram-ram !

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 18:12

मुरारी जी राम-राम,जय हो बिग बोस का घर है ये बिग बोस का घर, आज ईंटर नेट परेशान कर रहा है।

  Murari Pareek

2 December 2009 at 18:12

aap kuchh to sahaytaa kar sakte hain sameerJi!!!

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:12

Abhi Lautaa

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:12

तुगलकी फरमान पर मेरा पक्ष

मैं अपने पक्ष में मात्र इतना कहना चाहता हूँ कि यह कैसा निर्णय है- कभी अदालत का ऐसा निर्णय सुना है क्या:

आपको जिला बदर किया जाता है और साथ में ही ५ साल का सश्रम कारावास!!


एक तो खेल से निकाले गये और उस पर से ५१ टिप्पणियों का दंड.. ये कहाँ का न्याय हुआ.

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:13

समीर जी...आप नहीं भाग ले सकते तो क्या किसी गरीब की मदद तो कर ही सकते हैं :)
अब तो दंड का भी कोई भय नहीं रहा...इसलिए जरा चुपके से लिंक ही दे दीजिए :)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:14

वो अमरीकी बाबा और चिलम धारी चिलमन बाबा कहाँ गये??

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:15

लिंक कट पेस्ट विधा ही स्मृति से लोप हो गई है, मित्र पंडित वत्स जी/

  Murari Pareek

2 December 2009 at 18:15

sahi kahaa lalitji net bahut jyaadaa pareshaan kar rahaa hai!! kuchh khul nahi rahaa !!

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 18:16

हमारी पुर्ण सहानुभुति आपके साथ है समीर भाई, कल हमको जीता देते तो टिप्पणी हम ही भर देते। लेकिन क्या करे, हैट्रिक के चक्कर मे.......

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:16

Nutan & balraj sahni

  Murari Pareek

2 December 2009 at 18:17

sameer ji ke jaate hi meraa to net hi kaam karnaa band kar gayaa!!!

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 18:17

सबको राम राम !!

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:18

तनिक धीरज रखिए....हम आपके साथ हैं..चलिए इसके खिलाफ एक आन्दोलन शुरू किया जाए :)

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:19

हां, अब जाके सर्दी नहीं लग रही ,
अब पूछिए आप लोग क्या बताना है ?

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

2 December 2009 at 18:19

सुनीलदत्त और नरगिस!

  बाबा निठ्ठल्लानंद जी

2 December 2009 at 18:19

हर हर महादेव...क्या हाल चाल हैं बच्चा लोग?

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 18:20

अचानक ग्रह समीर जी के इतने विपक्ष में कैसे हो गए !!

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:20

समीरजी राम-राम

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:20

ललित जी राम -राम

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:21

संगीता जी राम-राम

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 18:21

नुतन और बलराज साहनी लाक किया जाए,
लेकिन रामप्यारी आज कई लाक टुटेगे इनकी बेवस्था करके रखना,

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:21

वत्स साहब राम -राम

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:21

मुरारी जी राम- राम कल कहाँ चले गए थे ?

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:22

शास्त्री जी राम-राम

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:23

और तो नहीं आया कोई इस बीच ?
बता देना नहीं तो राम-राम छूट जायेगी

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 18:23

संगीता जी, गोदियाल जी, वत्स महाराज, शास्त्री जी और स्वामी निट्ठल्लानंद महाराज को गोड़ लागी,

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 18:23

संगीता जी, गोदियाल जी, वत्स महाराज, शास्त्री जी और स्वामी निट्ठल्लानंद महाराज को गोड़ लागी,

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:24

राम -राम गोदियाल जी.....बाकी सब को भी सामूहिक राम-राम !!

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:24

और एक चेतावनी भी दे रहा हूँ : आदरणीय समीर साहब के बहकावे में मत आना, इन कनैडियन का कोई भरोषा नहीं होता ! कल हमें झान्स्सा देने के लिए सुरुआत में ही गलत उत्तर लिख दिया और बाद में खुद सही जबाब देकर ट्राफी ले गए !

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:25

भई ललित जी....आज तो ग्रह योग आपके पक्ष में बने हुए हैं ।
बस जी जान से लगे रहिए....आज सफलता निश्चित है :)

  बाबा निठ्ठल्लानंद जी

2 December 2009 at 18:27

सबको आशिर्वाद औ ललित बच्चा को डबल आशीर्वाद

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:28

ललित जी ये स्वामी निठाल्लानंद जी तो अभी ए हे नहीं अपने पहले ही राम-राम कर दी !

  Rekhaa Prahalad

2 December 2009 at 18:28

भाइयो और बहनों आप सभी को नमस्कार, किसी कारण वश इस्तरफ आना ना हुआ,कैसे है आप सब? आप लोगो का तो पता नहीं पर मैंने तो आप लोगो को और रामप्यारी कि पहेली को बहुत मिस किया.

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:28

अरे सोरी-सोरी , जय बाबा निठाल्लानंद जी की !

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:29

राम राम...

हमें आपसे पूछना था तो उल्टा आप ही हमसे पूछ रही हैं, संगीता जी!!

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:29

आपका भी स्वागत है रेखाजी

  श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

2 December 2009 at 18:30

अलख निरंजन बच्चा लोग, स्वामी समीरानंद कैसे है? बहुत व्यथित नजर आ रहे है। माया लोक मे कुछ परेशानी है, "माया महा ठगनी हम जानी" काहे नया आश्रम खोल रहे है, शठाश्रम भी आपका ही है, स्वागत है, एक तखत और लगवा देंगे, महंत झगरु दास को बोल के,

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:30

रेखा जी

नमस्ते


हमें अभी २१ दिन और मिस करिये. सजा मिली हुई है किसी तुगलकी फरमान के चक्कर में.

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:31

दूसरी बात: कल डॉक्टर झटका ने दंडा सुनाते हुए यह नहीं कहा था कि पहेली १३१ पर दंड भरना है. बस इतना कहा था पंचों की उपस्थिति में भर कर रसीद प्राप्त करें.


जब मैने विवादित काण्ड के बाद टिप्पणियाँ कीं, उस वक्त पंच मौजूद थे, अब पंचायत बिना रसीद जारी किये भाग जाये तो क्या दंडित बार बार दंड भरता रहे. एक काण्ड की दो बार सजा. यह तो पहली बार सुना.


विश्वास उठ गया है पूरी प्रक्रिया पर से. आज भी अगर दंड भरा होता और पंच बिना रसीद दिये भाग जाते तो हम किस किस को पकड़ने भागते. पहेली है कि टीप रेस??

  makrand

2 December 2009 at 18:32

समस्त उपस्थित अंकलों और आंटियों को नमस्ते

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 18:33

समीर जी , मैने तो कल ही बता दिया था कि अब ग्रह भारत में रहने वालों के पक्ष में हो जाएंगे .. आप इंडिया आ जाइए .. पर आप नहीं आए .. लगता है इसलिए अधिक नाराज हो गए हैं वे .. वे आपके इतने विपक्ष में हो जाएंगे .. कि खेलनिकाला हो जाएगा आपका .. ऐसा तो मुझे भी नहीं लगा था !!

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:33

चलो जो होता है सब अच्छे के लिए ही होता है :)

  makrand

2 December 2009 at 18:33

समीर अंकल नमस्ते..मुझे भी फ़ंसवा दिया आपने दंड मे?

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 18:33

रेखा जी नमस्‍कार ..

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:34

Markand jee aapkaa bhee swaagat hai !

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:34

श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज की जय. मगर महाराज नौकरी नहीं खोज रहे..अपना खुद का बाबागीरी का व्यापार डालने की सोच रहे हैं. पार्टनर फलेगी नहीं ऐसा पंडित वत्स ने बताया है.

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:35

आओ बालक मकरंद, तुम्हारा ही इन्तजार था. चालू हो जाओ बालक.

  श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

2 December 2009 at 18:35

और बच्चा मकरंद कैसे हो, अलख निरंजन

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:35

समीर जी...हमारी बारी में नहीं पता चला था कि ये पहेली है कि टीप रेस :)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:35

कल फैंन्सी ड्रेस में डॉक्टर झटका बने थे...आज बकरा बनो मकरंद. :)

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 18:36

मेरा नेट आज बहुत स्‍लो चल रहा है .. मुझसे सही जबाब की उम्‍मीद न रखें भई !!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:37

पंचायत से दो बोल

मैं तो अब बस इतना कर सकते हैं कि जब मकरंद बालक दंड भरेगा तो गिनने में अदालत की मदद कर दें.

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:37

समीर जी...वैसे भी पहेली-वहेली में टाईम खोटी करने से बाबागिरी की दुकानदारी संभालना कहीं बेहतर है :)

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 18:38

मुरारी पारीक जी सही जबाब देकर गायब लग रहे हैं !!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:38

पंडित वत्स जी..


आपको क्या पता..आपकी बारी में मेरा मन कितना भर आया था..गला रुँध आया था.

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:38

समीर जी...आज मकरन्द आपके साथ जलूस में शामिल होगा..हा हा हा

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:39

मकरंद भागने न पाये..जरा देखना ललित भाई और गौदियाल साहब!!

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:40

जी हाँ, किसी के सुबकने को आवाज तो हमें आ भी रही थी :)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:40

श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज


आपके अखाड़े के बाजू में कोई प्लाट खाली है क्या कब्जा करने के लिए??

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:41

बस पंडित जी...वो मैं ही था.

  श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

2 December 2009 at 18:42

वत्स महाराज ये बाबागिरी का दुकान नही है जनकल्याण आश्रम है, विशेष कर शठों के लिए,
"शठ सुधरहि सत संगति पाई, पारस परस कुधात सुहाई, अलख निरंजन"

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:42

बाबा निट्ठलानन्द अमरीका वाले...


आप भी देखो..कोई प्लॉट पर अपने अखाड़े के पास कब्जा करवा दो..

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:42

तब तो हम आपके साथ हैं....चलिए आन्दोलन शुरू किया जाए...

  श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

2 December 2009 at 18:44

स्वामी समीरानंद बस अरजी लगा दिजिए, आबंटन चालु है, फ़िर मत चुक जाना, जगह हमारे आश्रम के सामने ही है, गंगा के पार

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:45

ारे नहीं बाबा शठाधीश जी...अपके लिए नहीं कह रहे थे...अपका तो जनकल्याण आश्रम होगा...वो तो बाबा समीरानन्द के बारे में कह रहे थे...उनके लिए तो ये दुकानदारी है :)

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:46

बाबा सरस्वती के तट पे कोई जगह तो हमे भी बताईये जरा...

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:47

बस बाबा , इस कमेंट को अरजी ही मानो..पंचायत के सामने कर रहे हैं...कित्ता बड़ा प्लाट है??

  makrand

2 December 2009 at 18:50

समीर अंकल आज मैं बकरा बनने के लिये तैयार हूं.आप लिंक लिख दिजिये उसको मैं मेरे कमेंट मे छाप दूंगा.

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 18:50

रेखा जी राम-राम,मकरंद को दंड भरना ही पड़ेगा, कोई बहाना नही चलेगा,

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:51

बालक, तुम ऑलरेडी बकरा हो...२१ कमेंट करना शुरु हो जाओ..वरना सजा बढ़ भी सकती है. :)

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:51

बाबाजी, आप पलोट-वलोट भी काटते है क्या ?

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:52

आज तो क्या, अब अगले २१ दिन बैठे ताकना बस है, और तो कुछ कर नहीं सकते.

  makrand

2 December 2009 at 18:52

अंकल आज मैं दंड भर कर ही ट्युशन पढने जाऊंगा..मम्मी को बता दुंगा कि आप लोगो ने मुझे दंड वसूलने के लिये बैठा रखा है

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:52

एक मेरे लिए भी...... !

  makrand

2 December 2009 at 18:53

ए मम्मी, देखो ना.ये अंकल मुझे डरा रहे हैं.

  makrand

2 December 2009 at 18:53

ए मम्मी, देखो ना.ये अंकल मुझे डरा रहे हैं.

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:54

कोई सही जबाब नहीं आया अब तक...हद हो गई. हम खेलते होते तो आज चौबारा की बधाई लेते. :)

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 18:54

अंकल खुद ही डर के भाग गए

  makrand

2 December 2009 at 18:54

समीर अंकल आज मुझे जितवा दो ना. ये फ़ोटो मे अंकल और आंटी कौन है?

  makrand

2 December 2009 at 18:54

समीर अंकल आज मुझे जितवा दो ना. ये फ़ोटो मे अंकल और आंटी कौन है?

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:55

उस दिन जलूस के समय मम्मी नहीं याद आई, बालक...तब तो सबसे आगे हाय हाय कर रहे थे??

  makrand

2 December 2009 at 18:55

डाक्टर झटका जी हिंट तो दिजिये.

  makrand

2 December 2009 at 18:56

किसी का जवाब नकल करने लायक है क्या? जरा कोई बतयेगा इस बालक को?

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:56

इसके पहले कब जीते थे मकरंद इस पहेली में??

  makrand

2 December 2009 at 18:57

अंकल जुलूस मे मम्मी थोडी याद आती है? कौन याद आई तःई? ये बताते हुये मुझको शर्म आती है.:)

  makrand

2 December 2009 at 18:57

अंकल जुलूस मे मम्मी थोडी याद आती है? कौन याद आई तःई? ये बताते हुये मुझको शर्म आती है.:)

  महफूज़ अली

2 December 2009 at 18:57

आदरणीय समीरजी, नमस्कार,
ललित जी राम राम
गोदियाल जी राम राम
संगीता जी नमस्कार
पंडित जी नमस्कार
गगन जी नमस्कार
रेखा जी नमस्कार
सुनीता दी नमस्कार
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज जी राम राम
बाबा निठ्ठल्लानंद जी महाराज जी राम राम
मुरारी जी जय हिंद....

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:58

समीर जी...अज तो मकरन्द आपके साथ है...अब आपके पक्ष में हाय हाय करेगा :)

  makrand

2 December 2009 at 18:58

कभी कोई पहेली नही जीती अंकल, प्लीज आज जितवा दिजिये, सिर्फ़ एक लिंक का सवाल है. दंड मैं भर दूंगा.

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:59

रामप्यारी से एक अपील


आज हमें जीत लेने दे...पंडित वत्स की चौबारा की ख्वाईश पूरी हो जायेगी..कल से मैं २१ के बदले ३० दिन आयोजक बनने को तैयार हूँ...


जल्दी बताओ!!

  महफूज़ अली

2 December 2009 at 18:59

अपना फ़िल्मी ज्ञान कमज़ोर है...... समझ में ही नहीं आ रहा है कि कौन है ?

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 18:59

राम-राम महफूज जी...

  बाबा निठ्ठल्लानंद जी

2 December 2009 at 18:59

कल्याण हो बालक...दूध से नहाकर पूतों से फ़लो...

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 18:59

बालक...अभी से ये सब याद आने लगा..तो पढ़ेगा कौन?? पापा!!

  महफूज़ अली

2 December 2009 at 19:00

रामप्यारी......... आई लव यू .....

  महफूज़ अली

2 December 2009 at 19:00

राम राम पंडित जी

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 19:00

रामप्यारी...अपील स्वीकार की जाए :)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:01

महफूज भाई

सजा काट रहे हैं.. :( २१ दिन का पहेली निकाला मिला है बोनस में.

  महफूज़ अली

2 December 2009 at 19:01

हम आते हैं ज़रा सर्चिया के....

  महफूज़ अली

2 December 2009 at 19:01

हा हा हा हा हा हा

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:02

पंडित वत्स जी आज हमें खिलाने को समर्थन दे दिया है, विचार करो, जल्दी!!!

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 19:02

समीर जी,
हमारी तो पंचवारा की भी ख्वाईश है :)

  डाँ. झटका..

2 December 2009 at 19:02

@ उदनतश्तरी

अगर पंचो को ऐतराज ना हो तो रामप्यारी मैं को कोई ऐतराज नही होगा. आप चौबारा बनाने की ट्राई कर सकते हैं. पर आपको दिन नही सिर्फ़ ५ सप्ताह के लिये आयोजक बनना पडेगा.

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:02

महफूज जी,
समीरजी की ओर से नमस्कार,
ललित जी की ओर से राम राम
गोदियाल जी की ओर से राम राम
संगीता जी की ओर से नमस्कार
पंडित जी की ओर से नमस्कार
गगन जी की ओर से नमस्कार
रेखा जी की ओर से नमस्कार
सुनीता जी की ओर से नमस्कार
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज जी की ओर से राम राम
बाबा निठ्ठल्लानंद जी महाराज जी की ओर से राम राम
मुरारी जी की ओर से जय हिंद....

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:02

महफूज


साहनुभूति के दो शब्द तो कह जाते... :

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 19:03

पहेली-वहेली छोड़ कर यहां तो प्रापर्टी डि्लींग शुरु हो गयी, बाबाजी हमारे लिए तो कोई मुफ़त का जुगाड़ है तो बताईए। समीर जी और पंडित जी को नगद वाला दिलवा दिजिए,
@ मुरारी लाल कठे गयो?
आज नेट बहुत परेशान कर रहा, आज ही बिल भरा है पैसा पाते ही बीएसएनएल वाले मुटिया गये।

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:03

रामप्यारी तो चुप्पा मार गई??

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:05

ठीक है मैं ५ सप्ताह के लिए आयोजक बनने को तैयार हूँ ...दे दूँ सही जबाब??

  डाँ. झटका..

2 December 2009 at 19:05

@ उडनतश्तरी

आपको वत्स जी का समर्थन मिल गया है तो रामप्यारी मैम को भी कोई ऐतराज नही है. आप कोशीश किजिये.

पर ध्यान रखिये कि आप चाहे हारें या जीते..आपको ५ सप्ताह तक आयोजक बनना पडेगा. मंजूर हो तो आगे बढिये.

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:06

ललित जी , आज बी एस एन एल वाले मुझे भी परेशान कर रहे हैं !!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:06

मेरा जबाब:

प्राण और नूरजहां

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:07

ललित जी , आज बी एस एन एल वाले मुझे भी परेशान कर रहे हैं !!

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 19:07

भई ललित जी...समीर जी तो बिना रोकडा खर्च किए कब्जा करने की फिराक में हैं :)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:09

शपथ पत्र

मैं एतद द्वारा पूर्ण होशो हवास में घोषणा करता हूँ कि अब आज से मैं ५ सप्ताह के लिए आयोजक बनने को तैयार हूँ, भले ही इस जबाब से हारुँ या जीतूं.

-शपथ ली गई ताकि सनद रहे और वक्त पर काम आवे.

-हस्ताक्षर- ऊड़नतश्तरी

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:09

अब तो खुली जंग छिड़ चुकी है.

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:10

इतनी सजा लेकर एक दिन की जीत .. चलिए मुझे आज नकल करने में आराम हो गया ।

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 19:10

महफ़ुज भाई, राम-राम, आज चौबारा खुलने वाला है,

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:11

प्राण और नूरजहां ... मेरा जबाब भी लॉक किया जाए !!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:11

मैं भी दोनों बाबा लोगों के साथ ज्वाईंट वेन्चर में कुंभ में अखाड़ा खोलने जा रहा हूँ. दोनों के प्लॉट जुड़वा कर बड़ा अखाड़ा बनायेंगी त्रिमुखी अखाड़ा खोज कर आ जाना सब लोग!!

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 19:12

शपथ का सत्यापन किया गया।

  डाँ. झटका..

2 December 2009 at 19:12

सभी प्रतिभागियों से निवेदन है कि सवाल का जवाब पूरा दिया जाये. एक बार सवाल को गौर से पढ लिया जाये.

धन्यवाद

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:12

संगीता जी


अगर आज जीत गये तो चौबारा एक इतिहास कहलायेगा इस पहेली का.


और


हम इतिहास पुरुष..हूँ...हा..हूँ

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 19:13

हम भी समीर जी के साथ ही हैं...हमारा जवाब भी यही है !

  Gagan Sharma, Kuchh Alag sa

2 December 2009 at 19:13

सुरेन्द्र और सुरैय्या

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:13

प्राण और नूरजहां..
फ़िल्म है खानदान

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 19:13

समीर भाई-फ़िर तो लिंक भी दे दिजिए, इसमे कोई समस्या नही है,

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 19:13

चौबारे की बधाई.....पंचवारे की ख्वाईश अधूरी रह गई :)

  makrand

2 December 2009 at 19:13

अंकल अब आराम होगया. आपका शपथ पत्र आगया तो कल से दूसरों के जीतने चांस बढ गये.

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:14

खानदान फिल्‍म का सीन हैं !!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:14

प्राण और नूरजहां



फ़िल्म का नाम: खानदान



:)

  makrand

2 December 2009 at 19:14

पर अंकल बिना लिंक के कौन मानेगा कि आपने जव सही दिया या गलत? आप लिंक दिजिये. क्युं अंकल लोगो? मैं सच बोल रहा ःऊं या अन्ही?

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:15

अब काहे का लिंक ललित भाई..फिल्म का नाम तक तो दे दिया. हा हा!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:15

कल से मकरंद जोर लगा देना...मगर आज २१ का दंड तो शुरु करो.. :)

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:16

मेरा नेट स्‍लो चल रहा है .. इसलिए मेरे जबाब को 2 मिनट पहले कर देना रामप्‍यारी प्‍लीज .. आज मैने नकल नहीं की .. खुद ढूंढा है !!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:17

मैं भी दोनों बाबा लोगों के साथ ज्वाईंट वेन्चर में कुंभ में अखाड़ा खोलने जा रहा हूँ. दोनों के प्लॉट जुड़वा कर बड़ा अखाड़ा बनायेंगी त्रिमुखी अखाड़ा खोज कर आ जाना सब लोग!!


वहाँ अखंड सत्यानाशी जाप और हवन करुँगा.


पूरा जग बैरी सा हो गया है.

  डाँ. झटका..

2 December 2009 at 19:18

@ संगीता जी

इसी नेट के धीमे पन की वजह से उदनतश्तरी को आयोजकों मे शामिल करवाया गया है. अब आप आराम से जीत सकती हैं.क्युंकी यहां तो सभी के कनेक्शन ३ मिनट लेट चलते अहीम.

धन्यवाद

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 19:19

समीर भाई-बिना लिंक के काम नही चलेगा, लिंक दो गे तो जवाब हमारी भी समझ मे आयेगा, हमारा नेट काफ़ी स्लो है नही तो हम भी सर्चिया लेते कब के।

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:20

किसी और की एक कविता याद आ रही है नम आँखों से और भारी मन से उसी के पास जा रहा हूँ:




मेरे नयन लोक के विरह तम में
ज्योति बन जलती रहती हो
चलता हूं मैं कहां अकेला
तुम जो मेरे संग चलती हो

तुम बिन मेरा यह जीवन सूना
सूने में रहता दुख दूना
लेते ही नाम तुम्हारा , प्रदीप्त
हो उठता , उर का कोना-कोना

तुम नित विविध बंधन में
बंधकर मेरे आंगन रहती हो
चलता हूं मैं कहां अकेला
तुम जो मेरे संग चलती हो

  makrand

2 December 2009 at 19:20

ये लो डाक्टर झटका ..ये मेरी १६ वीं टिप्पणी

  makrand

2 December 2009 at 19:21

ये लो डाक्टर झटका ..ये मेरी १७ वीं टिप्पणी

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 19:21

फिल्म का नाम--खानदान सन 1942
कुछ एक्स्ट्रा मार्क्स मिलेंगें क्या ?
:)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:21

क्या मुस्कराहट तैर रही होगी ललित भाई आपके चेहरे पर यह लिखते.....सोच कर धन्य हुआ जाता हूँ.

  makrand

2 December 2009 at 19:21

ये लो डाक्टर झटका ..ये मेरी १८ वीं टिप्पणी

  makrand

2 December 2009 at 19:21

ये लो डाक्टर झटका ..ये मेरी १९ वीं टिप्पणी

  makrand

2 December 2009 at 19:22

ये लो डाक्टर झटका ..ये मेरी २० वीं टिप्पणी

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:22

मकरंद, तुम्हारे अभी ३ हुए हैं और हमारे देखो ५३ हो गये ५१ की जगह...जल्दी से पूरे कमेंट करो..अच्छे बच्चों की तरह...

  makrand

2 December 2009 at 19:22

ये लो डाक्टर झटका आखिरी यानि की.. २१ वीं टिप्पणी..जय जय सियाराम

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:24

अब मम्मी से बॉर्नविटा मिलवा कर एक गिलास गरम दूध पी लो मकरंद...ताकत आ जायेगी फिर बस्ता टांग कर ट्यूशन!!!!

  makrand

2 December 2009 at 19:24

समीर अंकल आप लिंक दो तो आपका दंड मैं भर दूंगा

  makrand

2 December 2009 at 19:24

ये २४ वी होगई.

  makrand

2 December 2009 at 19:25

अंकल बोर्नविटा का दूध तो सुबह ही पिया था..पर मुझे होर्लिक्स का ज्यादा अच्छा लगता अहि.

  makrand

2 December 2009 at 19:25

अंकल बोर्नविटा का दूध तो सुबह ही पिया था..पर मुझे होर्लिक्स का ज्यादा अच्छा लगता अहि.

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:26

नहीं बच्चे, बदमाशी वाली बात नहीं करते...पढ़ाई में मन लगाते हैं अच्छे बच्चे. स्कूल में भी फिर चीटिंग की आदत पड़ जायेगी..एक्जाम क्या लिंक लगा कर आओगे?

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 19:27

समीर भाई-इस कविता का सारांश है "आती क्या खंडाला" हा हा हा

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:28

समीर जी को बधाई ही बधाई .. मिठाई का इंतजार रहेगा !!

  makrand

2 December 2009 at 19:28

अंकल एक्जाम मे तो आजकल SMS पर काम चल लेता हूं.:)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:28

खंडाल नहीं ललित भाई..


इलाहाबादी अखाड़ा!! :) त्रिमुखी!!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:29

मिठाई का आर्डर दे दिया गया है. :)

  डाँ. झटका..

2 December 2009 at 19:29

@ उडनतश्तरी

कल का विषय आप लोक करवाना चाहेंगे ? क्योंकि आज आपको छूट है.

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:30

तो फिर हम भी लिंक एस एम एस से दे देते हैं???

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:30

कल के लिए विषय ललित भाई बताओ??

  संगीता पुरी

2 December 2009 at 19:31

समीर जी .. कल से शायद आप भी हों .. आसान प्रश्‍न दीजिएगा !!

  डाँ. झटका..

2 December 2009 at 19:33

मकरंद
आप पर फ़िर दंड किया जाता है. आप उप्रोक्त कमेंट बार बार करके उकसा रहे हैं

  डाँ. झटका..

2 December 2009 at 19:34

मकरंद पर २१ टिप्पणियों का जुरमाना किया जाता है और तुरंत भरने की हिदायत के साथ. किसी भी सदस्य को उसकी मर्जी के खिलाफ़ बरगलाना सख्त मना है.

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 19:35

समीर भाई कल के लिए विषय "व्योम बाला" रखा जाए।

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:38

व्योम बाला-जरा और स्पष्ट कहो ललित भाई!! :)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:38

This comment has been removed by the author.
  डाँ. झटका..

2 December 2009 at 19:41

मकरंद बालक की बात को कोट कर रहे थे, टिप्पणी पहले पब्लिश होगई. आज बालक ज्यादा ही वाचाल होरहा था. अत: उस पर दंड ठोक दिया गया है और उसकी मम्मी को सूचना भेज दी गई है कि आजकल वो यहां पहेली पहेली खेलता है ट्युशन बंक करके.

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:41

मकरंद को फिर सजा...आदतन सजायाफ्ता लाग रिया है मन्ने ये मकरंद!!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:43

बेचारा मकरंद...घर में पिटाई चल रही होगी उसकी अभी...

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:45

ललित भाई, कठे गये!

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 December 2009 at 19:45

वाह्! डाक्टर झटका...क्या खूब कही !
अब तुम्हे क्या यहाँ सब लोग इतने मूर्ख लग रहे हैं :)

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:49

पंडित जी ...आपकी पसंद का कोई विषय?

  ललित शर्मा

2 December 2009 at 19:51

अंतरिक्ष से संबन्धित बालायें, आकाश से सम्बन्धित बालाएं

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 19:53

चलिये बालायें न भी मिलें तो अंतरीक्ष संबंधित कर लें.

  Rekhaa Prahalad

2 December 2009 at 20:07

अब तक मै पछली सभी पहेलियों कि टिपण्णी पढ़ रही थी तो पता चला कि कई नए साथी जुड़ गए है इस पहेली मंच के साथ. @संगीताजी कैसी है आप?
@समीरजी, आपकी दास्ताँ पढ़ी तो खेद हुआ और ख़ुशी भी कि अब हम सबको जीतने का चांस मिलेगा. आप तो महान है, चुटकी मे पहेली हल कर देते है. सचमुच तुस्सी great हों:)

  makrand

2 December 2009 at 20:11

१. ओये डाक्टर झटका..मैने तुम्हारा क्या बिगाडा था? मुझे दुबारा दंडित क्यों किया?

  makrand

2 December 2009 at 20:12

२. अब इतना जुर्माना भरूम्गा तो मम्मी मारेगी मुझको

  makrand

2 December 2009 at 20:12

३. जेब खर्च बहुत कम मिलता है मुझको

  makrand

2 December 2009 at 20:13

४. अब इसमे मैं मेरा खर्च चलाऊं या तुम्हारा जुर्माना भरूं?

  makrand

2 December 2009 at 20:13

५. यहां आना ही महंगा पड गया मुझको तो

  makrand

2 December 2009 at 20:14

६. अब मैं जुलुस मे शाइल नही होऊंगा.

  makrand

2 December 2009 at 20:14

७ ये मम्मी हाथ दुखने लग गये अब तो टिप्पणी करते करते.

  makrand

2 December 2009 at 20:14

७ ये मम्मी हाथ दुखने लग गये अब तो टिप्पणी करते करते.

  makrand

2 December 2009 at 20:15

९.ये मम्मी हाथ दुखने लग गये अब तो टिप्पणी करते करते. मुझे बचाओ

  makrand

2 December 2009 at 20:15

१०. अरे मुझे बचाओ

  makrand

2 December 2009 at 20:15

११. कोई तो मुझे बचाओ

  makrand

2 December 2009 at 20:16

१२. मुझे बचाओ

  makrand

2 December 2009 at 20:16

१३. मुझे बचाओ

  makrand

2 December 2009 at 20:17

१४. अरे डाक्टर तेरी ऐसी की तैसी..ले तेरा पेट भरले..ये होगई पूरी दौ सौ वीं. संभाल

  makrand

2 December 2009 at 20:18

१५. और ये मेरी १५ वीं अरे कोई तो मुझे इस झटके से बचाओ.

  makrand

2 December 2009 at 20:18

१६. मेरी मम्मी बुला रही है मुझको..जा रहा हूं मैं..

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