रामप्यारी का खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (134) : आयोजक उडनतश्तरी



एक जरुरी सूचना :-


कल ६ दिसंबर २००९ रविवार को मुंबई मे ब्लागर्स मीट संपन्न होने जारही है. जिसके लिये मैं अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं. इस मीट के लाईव टेलीकास्ट को कवर करने रामप्यारी मैम मुंबई रवाना हो चुकी है. जो भी ब्लागर भाई बहन इसमे मे शिरकत करना चाहें वो श्री विवेक रस्तोगी से संपर्क कर सकते हैं. उनका मोबाईल नंबर 09223394566 है.

VENUE

TRIMURTI JAIN TEMPLE
NATIONAL PARK
BORIVALI (EAST)
MUMBAI-68
TIME - 3:30 PM

रामप्यारी पहेली कमेटी और समस्त प्रतिभागियों की तरफ़ से हार्दिक शुभकामनाएं!





बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूं.

आप ज्यादा अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं क्यों ५ सप्ताह तक इस खेल का आयोजक रहूंगा. इस खेल के सारे नियम कायदे सब कुछ पहले की तरह ही रहेंगे. सिर्फ़ मैं आपके साथ प्रतिभागी की बजाय आयोजक के रुप मे रहुंगा. डाक्टर झटका भी पुर्ववत मेरे साथ ही रहेंगे.

आशा करता हूं कि आपका इस खेल को संचालित करने मे मुझे पुर्ण सहयोग मिलता रहेगा क्योंकि अबकी बार आयोजकी एक दिन की नही बल्कि ५ सप्ताह की है. और इस खेल मे हम रोचकता बनाये रखें और आनंद लेते रहें. यही इसका उद्देष्य है. तो अब आज का सवाल :-

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि य़ह जो मानवाकृति दिखाई दे रही है यह क्या चीज है?





तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. इसका जवाब कल शाम को 4:00 बजे दिया जायेगा, मैं और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.


"बकरा बनाओ और बकरा मेकर बनो"


.टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.


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Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद

69 comments:

  Murari Pareek

5 December 2009 at 18:01

NEST

  रामकृष्ण गौतम

5 December 2009 at 18:04

Badhia hai sir!...


Subhkaamnayein!...


Regards


Ram K Gautam

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:05

मार्क्स की मूर्ती है और गमले के ऊपर आकृत है !

  श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी

5 December 2009 at 18:05

भक्तों को बाबा का बहुत आशीष.


बाबा के आश्रम पधार कर आशीर्वाद ले लो और लॉकेट खरीद कर सर्वमनोकामना पूरी करो.

नोट:

१.पहेली में भी जीतने के लिए आश्रम में हवन करवाया जाता है.

२. हमारी कोई ब्रान्च नहीं है.

३. नकलचियों से सावधान.

४. ब्लॉगजगत के एकमात्र सर्टीफाईड बाबा.


-सबका कल्याण हो!!

  Udan Tashtari

5 December 2009 at 18:07

गौदियाल जी को बहुत बहुत बधाई...


(यह कल जीतने के लिए..:))


आज के लिए सभी को शुभकामनाएँ.

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:07

अरे इस जीत के चक्कर में मैं बेसिक एट्टी केट ही भूल जाता हूँ, सबको मेरी तहे दिल से ताऊ जी वाले अंदाज में घणी राम-राम !

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:08

बाबाजी दंडवत प्रणाम, आप कृपया पाना परिचय इस अंदाज में नही दे तो बेहतर क्योंकि यह सब बाते हम आजकल लगभग सभी बाबाओं के मुख से सुनकर वैसे ही उकता गए है !

  Murari Pareek

5 December 2009 at 18:09

artificial nest

  Murari Pareek

5 December 2009 at 18:10

बाबाजी आप ब्रांच खोल लीजिये!!!

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:10

समीर साहब, अगर आप बुरा न माने तो इस बधाई के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया किस तरह अदा करू ?

  Murari Pareek

5 December 2009 at 18:12

गोदियाल जी शुक्रिया अदा करने के लियी बाबाजी को प्रसाद चढ़ा दीजिये!!

  Udan Tashtari

5 December 2009 at 18:13

गौदियाल साहब


इसका शुक्रिया जब दिल्ली पहुँचेंगे तो ले लिया जायेगा/ :)

  Udan Tashtari

5 December 2009 at 18:14

मुरारी बाबू


आज शनिवार रेडियों को सोमवार जरुर सुनाना. :)

आज क्या प्लान है जीतने का??

:)

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:15

Most welcome sir, and I promise !!

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:16

मुरारी जी ये प्रसाद कितने की चपत लगाएगा ?

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

5 December 2009 at 18:17

मिट्टी के साथ पौधे की जडों के साथ मिलकर एक गुच्छा सा बना हुआ है...जो कि मानवी आकृ्ति का रूप ले चुकी है।

  Rekhaa Prahalad

5 December 2009 at 18:22

Babaji pranam, aur sabhi ko namaskar. babajo jeetne ka koi instant mantra bataye p;z.

ghosala sa to lag raha hai magar kiska?

  Murari Pareek

5 December 2009 at 18:23

sameerji sunday ka show me aapki kavitaaen shamil karungaa !!! mishty mehfil me !!

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:23

वत्स साहब राम राम,
बड़ी देर से दर पे आँखे लगी थी
हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी
हम तो आप ही को जिताने को थे
आंसर बताते-बताते बहुत देर कर दी !!!

  Murari Pareek

5 December 2009 at 18:24

प्रभु तो भासना के भूखे है गोदियाल जी श्रद्धा सारु लगा दीजिये!!!

  Rekhaa Prahalad

5 December 2009 at 18:25

ghas-phus se bani koi kalakruti?

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:25

आज अभी तक अपने प्रिय बिहारी ताऊ, आई मीन अजीज ललित जी कहाँ चले गए ?
I miss him !!!

  Murari Pareek

5 December 2009 at 18:25

मुझे चिड़िया के कृत्रिम घोंसले जैसा लगा!!

  संजय बेंगाणी

5 December 2009 at 18:28

यह दा विंचि जैसा लग रहा है, जो घास फूस हो सकती है.

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:30

संजय जी वो तो हम भी देख रहे है :)
अब ये मत पूछना की ताई है, प्लीज़ !!

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

5 December 2009 at 18:30

कल ६ दिसंबर २००९ रविवार को मुंबई मे ब्लागर्स मीट संपन्न होने जारही है. जिसके लिये मैं अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं. इस मीट के लाईव टेलीकास्ट को कवर करने रामप्यारी मैम मुंबई रवाना हो चुकी है. जो भी ब्लागर भाई बहन इसमे मे शिरकत करना चाहें वो श्री विवेक रस्तोगी से संपर्क कर सकते हैं. उनका मोबाईल नंबर 09223394566 है.

बहुत बधाई जी!
अब तो खुदा खैर करे!
कवरेज तो मजेदार होगी ना!
इस बार तो गधों को पावभाजी खूब मिलेगी!

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

5 December 2009 at 18:31

राम-राम गोदियाल जी....
भई आ तो हम पहले ही जाते लेकिन क्या करें हमारे यहाँ लुधियाना में कर्फ्यू लगा हुआ है..साथ ही लाईट भी बन्द...इसलिए देर हो गई ।

  ललित शर्मा

5 December 2009 at 18:33

तुमने पुकारा और हम चले आये, गोदियाल जी का कारनामा यहां भी पढो। कल हमारे को छोड़ कर फ़रार हो गये थे।

कब न जाने वो दिल का हर इक, तार आकर छेड़ गए,
मैं जिन्दगी के साज-सरगम, यूँ आँचल में ही चुनती रही !
तबले के ताल, सरोद-ए-दिल-नशीं, व बीणा की तान पर,
जाने कब वो राग मल्हार गा गए, मैं ख्वाब ही बुनती रही !!

इस कदर मन को मोहित किया था, राग के हर बोल ने,
साज बजता रहा, वो बेखर गाते रहे, और मैं सुनती रही !
दिल के खंडहर की टूटी मेहराबें एवं धूल-धूसरित मीनारें ,
ताने-बानो के इर्द-गिर्द रूह को रूई की मानिंद धुनती रही !!

  जी.के. अवधिया

5 December 2009 at 18:36

बया पक्षी का घोसला लगता है जिसे मानव मुखाकृति का रूप दे दिया गया है।

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:36

ये लगाया किसने वत्स साहब, ? मैं अभी खबर लेता हूँ उसकी !
BTW: ये कर्फ्यू होता क्या है ?

:)

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:37

ललित जी अब ये बतावो की शुक्रिया सिर्फ मुह से बोलने में ही काफी है या फिर गिलास के माध्यम से बोलू ?

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:38

अवधिया साहब को मेरा राम-राम आज बड़े गुस्से में थे और उनका गुस्सा जायज भी था

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

5 December 2009 at 18:38

मई 2006 में केंट (यूके) में मार्टिन ग्रेगरी नाम के एक व्यक्ति नें अपने घर में पडे बीस साल पुराने एक गमले में से पौधे को निकाला तो उसे उस पौधे की जडों में ये यीशु का चेहरा बना दिखाई दिया.....बस चमत्कार् हो गया :)

  ललित शर्मा

5 December 2009 at 18:39

गोदियाल जी अब अवधिया जी भी आ गए हैं गिलास ही चलेगा, इससे कम कुछ नही चलेगा।

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

5 December 2009 at 18:41

गोदियाल जी...मजाक नहीं बल्कि यहाँ सच में कर्फ्यू लगा हुआ है...हिन्दू-सिक्ख दंगे भडके हुए हैं ।

  जी.के. अवधिया

5 December 2009 at 18:42

ललित जी सही कह रहे हैं। हमारा टाइम भी हो गया है गिलास वाला। गिलास के लालच में ही आ गये हैं।

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:43

वत्स साहब ये साले हिन्दू और सिख अलग-अलग होते है क्या ?

  ललित शर्मा

5 December 2009 at 18:44

सभी सज्जनों को राम-राम,
ये गमला है।

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:45

ये लीजिये ललित जी और अवधिया जी, सर्ब कर रहा हूँ ;

किसी को नशा है जहाँ में खुशी का
किसी को नशा है गेम जिन्दगी का
कोई पी रहा है लहू आदमी का
किसी को नजर से पिलाई गई है !
मुझे दुनिया वालो .....

  ललित शर्मा

5 December 2009 at 18:46

हा मुझे भी जानकारी मिली लुधियाना मे कुछ समस्या चल रही है।

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:47

क्या यार ललित जी, मेरी बेजती खराब करवा दी भरी महफिल में, गमला है वो तो हम बहुत पहले कह चुके ! :)

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

5 December 2009 at 18:48

भई गोदियाल जी, दिमाग से पैदल लोग ही यही समझते है न....

  श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

5 December 2009 at 18:50

अलख निरंजन बच्चा लोग- मुरारी लाल हमारी लंगोटी कहां है?

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

5 December 2009 at 18:51

अरे बातों बातों में आपको बधाई देना तो भूल ही गये.....जीत की बधाई हो गोदियाल जी!
कल के लिए शुभकामनाएँ भी...क्यों कि आज की गाडी तो निकल चुकी है :)

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:52

आजकल यातायात के इतने साधन हो गए वत्स साहब, समझ में नहीं आता की ये मूर्ख फिर भी पैदल क्यों चलते है :)

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:52

आजकल यातायात के इतने साधन हो गए वत्स साहब, समझ में नहीं आता की ये मूर्ख फिर भी पैदल क्यों चलते है :)

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:53

Dhanyvaad vats sahaab ! ye baaki nithale baabaa lagtaa hai jyaadaa sod maar gaye aaj ?

  श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी

5 December 2009 at 18:53

भक्तों

समस्याये आती जाती रहती हैं.

ध्यान से प्रश्न हल करो.

ध्यान ही एक मात्र जीत का रास्ता है, भक्तों.

ध्यान सीखने की विशॆष क्लासेस पार्ट टाईम कोर्स आश्रम में शुरु हो रहे हैं. रजिस्ट्रेशन करा लें.

रेखा जी, क्रेश कोर्स की व्यवस्था भी की गई है.


नोट:

१.पहेली में भी जीतने के लिए आश्रम में हवन करवाया जाता है.

२. हमारी कोई ब्रान्च नहीं है.

३. नकलचियों से सावधान.

४. ब्लॉगजगत के एकमात्र सर्टीफाईड बाबा.

  सतीश पंचम

5 December 2009 at 18:53

एक ओर से तो बया पक्षी का घोसला लग रहा है तो कहीं दूसरी ओर से पुआल से बनाई मानवाकृति।

ब्लॉगर मीट की तैयारी जोरों पर लग रही है :)

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:54

शठाधीश बाबा की जय हो, इस मुरारी भाई ने लगोट दी या अभी भी टरका रहा है ?

  Udan Tashtari

5 December 2009 at 18:55

अभी टीवी चालू करता हूँ. काहे दंगे करते हैं ये लोग, मूर्ख हैं.


क्रिकेट का स्कोर किसी को मालूम है क्या? हम तो अभी सो कर उठे.

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 18:57

महामहिम समीरानंद बाबाजी, जानते हो महंगाई कहा पहुँच गई है, कलासे ज्वाइन करो, ये नहीं बतावोगे की फीस कितनी है यहाँ खाने के लाले पड़े है और .... खाने को आता नहीं और शौक नबाबों वाले !!!

  बाबा निठ्ठल्लानंद जी

5 December 2009 at 18:57

हर हर महादेव..बच्चा लोग...

  श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी

5 December 2009 at 18:58

भक्त गोदियाल जी

जब आश्रम में आ जाओगे फिर सब समस्यायें निर्मूल लगेंगी.

  Udan Tashtari

5 December 2009 at 18:59

मुरारी बाबू

कहाँ गुमा दिये इन बाबा जी की लंगोटी भई...लौटाते काहे नहीं हो... :)

  Udan Tashtari

5 December 2009 at 19:00

अमरीका वाले बाबा निट्ठला नन्द जी भी आ गये..उनको और शठाधीष जी को प्रणाम!!!

  बाबा निठ्ठल्लानंद जी

5 December 2009 at 19:01

हमारे आश्रम मे सर्व सिद्धि दीक्षा दी जारही है. रजिस्ट्रेशन के लिये पधारिये! हर हर महादेव,,,

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 19:02

ये भक्तगण गए कहाँ हमारे निठाल्लानंद बाबाजी का स्वागत किसी ने नहीं किया आज ?

  बाबा निठ्ठल्लानंद जी

5 December 2009 at 19:02

खुश रहो बच्चा! दीक्षा लेलो बच्चा!

  बाबा निठ्ठल्लानंद जी

5 December 2009 at 19:03

गोदियाल बच्चा हम तो पैदायशी स्वागत करवाये हुये हैं..कल्याण हो बच्चा...

  बाबा निठ्ठल्लानंद जी

5 December 2009 at 19:03

अब खमेर रूज की तरफ़ प्रस्थान करते हैं बच्चा...कल मिलेंगे!

  श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

5 December 2009 at 19:03

अलख निरंजन, स्वामी समीरानंद जी कैसे है?
आओ एक-एक चिलम हो जाए।

  पी.सी.गोदियाल

5 December 2009 at 19:04

बाबा जी लोगो, मेरा भी समय हो रहा है बीबी तीन बार चेतावनी भिजवा चुकी है सब्जी खरीदने जाना है, वरना शाम के भोजन की ठन-ठन गोपाल १
इस निरीह प्राणी को क्षमादान दे ! :)

  श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

5 December 2009 at 19:06

गोदियाल बच्चा-आज भी तुम जीत रहे हो, हमने कल ही घोषणा कर दिया था, जब हमारे आशीर्वाद से दो-दो दिखने लगे थे। अलख निरंजन

  श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज

5 December 2009 at 19:07

कैसे हो वत्स-सब कुशल है ना?

  अजय कुमार झा

5 December 2009 at 19:18

ई घास फ़ूस का बिलागर है .....हमरी तरह ही कुछ दिन मौन बैठा तो ...चिडियन सब आके उके माथा पर बैठ गई हैं ..
आज का ईनाम दिया जाए...नकद की व्यवस्था हो तो क्य कहने....बाबा जी के आश्रम में भर्ती होने के लिए अनुदान स्वरूप उस धन का इस्तेमाल किया जाना प्रस्तावित है .....
उडन जी ...मुरारी पारीक ्जी भी ...लगता है ....आपके नोट्स से पहेली का डाक्टरेट पूरा कर रहे हैं ....चलिये हम तो बाबा भरोसे जी

  ललित शर्मा

5 December 2009 at 19:31

कहां गये भाई इतना सन्नाटा क्युं है?
राम प्यारी हमारा उत्तर लाक किया जाए, गमला के अन्दर बना जड़ का प्रतिरुप है, अब चलते हैं राम-राम

  Gagan Sharma, Kuchh Alag sa

5 December 2009 at 19:34

अरे भाई लोगन,
यह बर्बरीक है जो पहाड़ की चोटी पर बैठ महाभारत का युद्ध देख रहा है। अंत में अपना "डिसीजन" देने के वास्ते।

  संगीता पुरी

6 December 2009 at 10:24

Martin Gregory was enjoying a Sunda morning gardening when he found the face of Jesus in the roots of his asparagus fern!

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