ताऊ की चौपाल मे : दिमागी कसरत - 4

ताऊ की चौपाल मे आपका स्वागत है. ताऊ की चौपाल मे सांस्कृतिक, राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विषयों पर सवाल पूछे जायेंगे. आशा है आपको हमारा यह प्रयास अवश्य पसंद आयेगा.

सवाल के विषय मे आप तथ्यपुर्ण जानकारी हिंदी भाषा मे, टिप्पणी द्वारा दे सकें तो यह सराहनीय प्रयास होगा.


आज का सवाल नीचे दिया है. इसका जवाव और विजेताओं के नाम अगला सवाल आने के साथ साथ, इसी पोस्ट मे अपडेट कर दिया जायेगा.


आज का सवाल :-

समुद्र का रंग नीला क्यों दिखाई देता है? इस पर किस वैज्ञानिक ने अपना शोध कार्य किया था?





अब ताऊ की रामराम.

उत्तर :- सही उत्तर के लिये इसी पोस्ट पर टिप्पणियां देखिये! विशेषकर प्रकाश गोविंद की.



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Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद

10 comments:

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 08:51

The light from the blue sky reflects on to the sea making in look blue. In actual fact it doesn't really have a colour

वैज्ञानिक नहीं मालूम!!

  Udan Tashtari

2 December 2009 at 09:05

वैज्ञानिक थे:

Chandrashekhar Venkatrman.

  जी.के. अवधिया

2 December 2009 at 09:17

क्योंकि समुद्र का पानी सूर्य के प्रकाश के सात रंगों में से सिर्फ नीले रंग को परावर्तित करता है और शेष रंगों को सोख लेता है।

इस विषय पर बहुत सारे वैज्ञानिकों ने शोधकार्य किया है जिनमें से डॉ. डेव्ह सीगेल का नाम उल्लेखनीय है।

  पी.सी.गोदियाल

2 December 2009 at 10:44

Darwin

  प्रकाश गोविन्द

2 December 2009 at 10:55

समुद्र का रंग नीला दिखाई देता है -

इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है. जैसा कि हम जानते हैं हमारी पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है,. सूर्य से कुछ खतरनाक किरणे अल्ट्रा वॉयलेट रेज़ निकलती हैं जो मानव शरीर के लिए घातक होती हैं. पृथ्वी की सुरक्षा के लिए पृथ्वी के चारों ओर कई प्रकार की गैसों की परतें हैं जो इन किरणों को परावर्तित (रिफ्लेक्ट) कर देती हैं. जब यह किरणे गैस की इस परत पर पड़ती हैं तो गैस के कण (मोलिक्युल्स) नीले रंग में चमकते हैं और इन्ही के प्रभाव से समुद्र का रंग हो या आसमान का रंग नीला दिखाई देता है. !

इस विषय पर सर सी वी रमण (श्री चन्द्रशेखर वेंकटरमण) जी ने शोध कार्य किया था ! सर की उपाधि भी इन्हें ब्रिटिश सरकार ने दी थी ! वर्ष 1930 में डा.सी वी रमण पहले गैर श्वेत एशियाई और भारतीय बने जिन्हें उनके कार्य के लिए भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रकाश के प्रकीर्णन और रमण प्रभाव की खोज के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया था !

  प्रकाश गोविन्द

2 December 2009 at 10:59

हालांकि श्री चन्द्रशेखर वेंकटरमण जी भौतिकी में ध्वनिशास्त्र के प्रोफेसर थे लेकिन उन्होंने प्रकाश के क्षेत्र में बहुत काम किया। प्रकाश का प्रकीर्णन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक प्रचलित धारणा थी और माना जाता था कि समुद्र का पानी नीला दिखता है क्योंकि जल में निलंबित कण प्रकाश का अवशोषण कर लेते हैं,लेकिन श्री रमण ने सबसे पहले बताया कि यह प्रकाश के परावर्तन से स्वतंत्र होता है बल्कि यह आणविक विवर्तन पर निर्भर करता है।

  रंजन

2 December 2009 at 12:22

जरा चश्मा उतार कर देखो ताऊ..नीला है समुद्र का रंग..:)

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

2 December 2009 at 13:25

नीले आकाश की परछाई के कारण!

  प्रिया सिंह

2 December 2009 at 23:07

bahut gyanvardhak

  अल्पना वर्मा

3 December 2009 at 19:15

Prakash ji ko badhaayee..Unka jawab scientific aur gyanvardhak hai.

Yah dimaagi kasrat ka idea kabile taarif hai.

agar jawab ki post alag kar di jaye to behtar hoga..yah kewal ek sujhaav hai.

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