खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (168) - आयोजक उडनतश्तरी

बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूं.

जैसा कि आप जानते हैं कि आज मैं आयोजक के बतौर यह अंक पेश कर रहा हूं. आज से दो सप्ताह तक मैं इस खेल का आयोजक रहुंगा.

आपका इस खेल को संचालित करने मे मुझे पुर्ण सहयोग मिलता आया है और उम्मीद करता हूं कि अब आने वाले दिनों में भी मिलता रहेगा. इस खेल मे आप लोगो के सहयोग से रोचकता बरकरार है. सभी इसका आनंद ले रहें हैं. आगे भी लेते रहें और अब रिजल्ट पेश करने के लिये आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" भी अमेरिका से पलट आये है. तो आईये अब आज का बहुत ही आसान सवाल आपको बताते हैं :-

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि ये कौन है?



तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. इसका जवाब कल शाम को 4:00 तक आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" देंगे. आज मैं और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.

"बकरा बनाओ और बकरा मेकर बनो"

.टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.


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Promoted By :ram और shyamandthanks, aurएवम goodको
सहयोग के लिये आभार : श्री समीरलाल "समीर"

35 comments:

  Rekhaa Prahalad

11 January 2010 at 18:08

koi chidiye ka chuja lagta hai, kis chidiye ka pata lagana padega.

  Rekhaa Prahalad

11 January 2010 at 18:11

baby ostrich!!!!!

  संगीता पुरी

11 January 2010 at 18:16

रेखा जी नमसकार .. कहां से ढूंढ लायी??

  मोहसिन

11 January 2010 at 18:23

अनुमान कर रहा हूं कि यह मोर(मयूर) का बच्चा है।

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:25

रेखा जी को राम-राम !

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:25

संगीता जी को राम-राम

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:25

ताऊ जी को राम-राम

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:25

कोई सज्जन छूट गया हो तो उसको भी राम-राम !

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:26

मुझे तो मेमना दिखाई दे रहा है !

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:26

चरता हुआ

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:26

मोहिसिन जी को आदाब !

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:27

बच्चा मकरंद आयें तो उनको भी राम राम !

  पी.सी.गोदियाल

11 January 2010 at 18:27

चलता हूँ राम-राम !

  ललित शर्मा

11 January 2010 at 18:30

तीतर है।

  ललित शर्मा

11 January 2010 at 18:31

संगीता जी, रेखा जी, गोदियाल जी, मोहसीन जी,
सबको मेरा राम-राम

  ललित शर्मा

11 January 2010 at 18:32

आज विलंब हो गया-ताऊ जी जर्मन लट्ठ लिए हमे ढुंढ रहे हैं, अब बचाना गोदियाल जी

  makrand

11 January 2010 at 18:32

रेखा आंटी, संगीता आंटी, मोहसिन अंकल, गोदियाल अंकल सबको बालक की प्रणाम स्वीकार हो!

आगे समाचार यह है कि यह सांप का फ़न है. अगर किसी को लिंक चाहिये तो मेरे पास मौजूद है.

  makrand

11 January 2010 at 18:33

ललित अंकल नाम्स्ते. क्या हुआ? ताऊ ने क्यों लट्ठ उठा रखा है?

  ललित शर्मा

11 January 2010 at 18:33

संगीता जी-आज आपकी भुकंप की भविष्यवाणी

"समय चक्र"पर है

  makrand

11 January 2010 at 18:34

कहां भूकंप आगया ललित अंकल?

  ललित शर्मा

11 January 2010 at 18:34

संगीता जी-वहां जाकर विज्ञापन शुल्क जमा करवा दें।:)

  ललित शर्मा

11 January 2010 at 18:39

मकरंद भैया-शुभाशीष,

ताउ ने टैम पे आने कहा था। और मुझे विलब हो गया। इसलिए ताऊ ने लट्ठ उठा लिया। बात नही सुनता है कहके। बस इतनी सी बात है।

  makrand

11 January 2010 at 18:41

ललित अंकल तब तो कोई बात नही. ताऊ लट्ठ भी मारेगा तो अपने को तो धीरे से ही मारेगा, भले आवाज जोर की सुने लोगों को.:)

  anjana

11 January 2010 at 19:14

सभी को हमारी राम राम

  anjana

11 January 2010 at 19:21

अजगर है

  Udan Tashtari

11 January 2010 at 19:21

सभी को मेरा नमस्कार पहुँचे....

  Udan Tashtari

11 January 2010 at 19:22

मकरंद बच्चे...कल कहाँ थे..एबसेन्ट लग गई है...अल्पना आंटी परसों तुम्हारा दंड भर रही थीं..थैन्क्यू बोला की नहीं???

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

11 January 2010 at 19:28

श्रीमान दरबान जी सहित सभी को नमस्कार.....
हम छोटे बडे का भेद नहीं रखते :)

  Udan Tashtari

11 January 2010 at 19:49

बहुत आभार पंडित जी..आपने दरबान की लाज रखी!!

  Udan Tashtari

11 January 2010 at 20:07

कहाँ गये सब!!

  संगीता पुरी

11 January 2010 at 20:16

ललित जी धन्‍यवाद .. मैंने आपके चिट्ठा चर्चा में देख लिया .. टिप्‍पणी भी की है !!

  संगीता पुरी

11 January 2010 at 20:16

सबों को नमस्‍कार .. आज पहेली का जबाब हो गया क्‍या ??

  Udan Tashtari

11 January 2010 at 20:20

चल रहा है धीरे धीरे///

  M VERMA

11 January 2010 at 21:35

यह तो तीतर है

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

11 January 2010 at 21:57

यदि पहेली आयोजकों को हमारा यहाँ आकर पहेली में भाग लेना अच्छा न लग रहा हो तो स्पष्ट कह दें...कल से हम यहाँ नहीँ आया करेंगें । लेकिन इस प्रकार रोज रोज मुश्किल पहेली पूछ कर हमारी जीत के रास्ते बन्द करना...ये हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगें ।
हद हो गई...हम तो ये भी भूल गए कि आखिर जीत का स्वाद कैसा होता है :)

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