खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (172) : आयोजक उडनतश्तरी

बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूं.

जैसा कि आप जानते हैं कि आज मैं आयोजक के बतौर यह अंक पेश कर रहा हूं. आज से दो सप्ताह तक मैं इस खेल का आयोजक रहुंगा.

आपका इस खेल को संचालित करने मे मुझे पुर्ण सहयोग मिलता आया है और उम्मीद करता हूं कि अब आने वाले दिनों में भी मिलता रहेगा. इस खेल मे आप लोगो के सहयोग से रोचकता बरकरार है. सभी इसका आनंद ले रहें हैं. आगे भी लेते रहें और अब रिजल्ट पेश करने के लिये आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" भी अमेरिका से पलट आये है. तो आईये अब आज का बहुत ही आसान सवाल आपको बताते हैं :-

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि ये कौन सा खेल खेला जा रहा है?



तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. इसका जवाब कल शाम को 4:00 तक आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" देंगे. आज मैं और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.

"बकरा बनाओ और बकरा मेकर बनो"

टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.


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Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद

194 comments:

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:02

BASKET BALL

  kavita verma

15 January 2010 at 18:02

basketball

  Anonymous

15 January 2010 at 18:03

Volleyball

  srijana

15 January 2010 at 18:04

slamball

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:06

kahaan gaye sabhi

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:06

rekhaaji namaskaar

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:08

राम-राम सभी को
टेनिस खेल रही है

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:09

मुझे तो टेनिस लग रहा है भैया...सबको राम राम

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:09

मुरारी जी को राम-राम !

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:09

Kase kahun जी को राम-राम !

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:09

Rekha जी को राम-राम !

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:10

Sirjana जी को राम-राम !

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:10

अरे गोदियाल साहब क्या अचानक आ गये ऎसा लगता है शीशे में से फ़ोटो लटक रहा है...:( अरे कभी तो जीतने देते...

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:10

Sunita जी को राम-राम !

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:11

आज आपकी जीत पक्की है सुनिताजी

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:12

बस डाक्टर झटका को एक धमकी दे डालो हमारे वत्स साहब की तरह :)

  srijana

15 January 2010 at 18:12

ram ram godiyal ji

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:12

raam raam godiyaal ji , srijanaa ji aur sunitaaji!!

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:13

बेटा मकरंद का ट्यूशन अभी ख़त्म नहीं हुआ ? आया नहीं !!

  srijana

15 January 2010 at 18:13

namaste murari ji

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:14

क्यूँ गोदियाल्जी सुनिताजी को टेनिस पे अटका के रखने का इरादा है क्या हा..हा.. !!! सुनीता जी ध्यान से देखिय लीजिएगा !!

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:14

कहाँ से पक्की है वो हीरामन है न उसकी आँख बहुत तेज़ है जी। पारीक भाई राम-राम कैसे हैं..रेखा जी कैसी हैं आप?

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:14

makrand skrant ki bachi khuchi mithaai saltaane me lagaa hai

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:15

बाकी के लेट लतीफ़ तो खा-पी के ही आयेंगे लगता है

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:15

aaj lalit bhaai aur sameerji nahi diklh rahe !!

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:15

kase kahun kavitaji aap kaisi hain!!

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:17

पारिख जी, आप भी न ललित भाई की तरह लोगो को बहला-फुसलाकर जीत अपनी पक्की करना चाहते हो क्या ?

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:17

ओयँ ये कविता जी कौन है भई?

  srijana

15 January 2010 at 18:18

murari ji kya jeetne ke liye ans kaafi nahi hota?

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:19

हा-हा-हा, सुनीता जी का अंदाज अच्छा लगा पारीख भाई

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:19

सभी को सादर वंदन

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:19

भई मै अचानक चली जाऊँ तो बाकी भाई लोग को राम-राम कह देना और सभी....संगीता जी आ जाती तो आज का भविष्य पूछ लेते...खैर

  srijana

15 January 2010 at 18:20

namase sunita ji...sangita ji kya bhavishya vakta hai?

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:20

mujhe to lagtaa hai sunitaaji aap hi ka koi rup hai!!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:20

मुरारी जी, कबिता जी, गोदियाल जी, सुनीता जी,
राम-राम

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:20

ललिता जी सबको सादर वंदना...:)

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:21

सुनीता जी अभी ठहरिये, अपने ये ललित भाई जी ए है देखते है ये क्या फरमाते है !

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:21

फ़ुट्बाल है

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:21

lalit ji kahaan the!!

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:22

कहाँ है ललितजी फुटबाल चलिए खेलते हैं!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:22

सुनीता जी-आज तो ललिता और वंदना दोनु होयगी।

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:22

ये जनाव तो आते ही सीधे फुटबाल का मैदान ढूंढते है :)

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:23

lalitji aaj srijnaa ji bhi aayi hain jaraa najre utha kar dekhiye!!

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:23

अरे सृजना संगीता जी तो भविष्य वक्ता ही नही पिछले जन्म का राज भी बता सकती हैं...बस आ जायें एक बार...फ़िर देखना उनका चमत्कार. उन्हे शत-शत नमस्कार...

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:23

सुनीता जी-कुछ तो सुनाती जाओ,
शुभारंभ ही कर दयो थे।

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:24

आइये आपका परिचय करता हूँ सृजना से !!!

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:24

काँई बोलो ललित भाया आज म्हाने लागै है थारो चश्मो खराब है...

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:25

अब सुनिताजी जायेंगी और कविता कसे कहूँ आएँगी!!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:25

सृजना जी को को भी राम-राम

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:25

लेकिन सुनीता जी मुझे तो उनपर गुस्सा आ रहा है, हैती में इनते सारे लोग मर गए, भूकंप की चेतावनी के साथ साथ जगह भी बता देती तो उनका क्या जाता ? हम कम से कम उन बेचारों को सूचित तो कर देते !

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:25

ललितजी ये वही सृज्नाजी हैं जिनका आपने ब्लॉग में फोटो लगाया था!!!

  srijana

15 January 2010 at 18:25

wow!well murari ji utna kast main utha lungi...itni bhi dubli nahi...namaste lalit ji

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:26

जय हो!!! आ गये भई हम भी ..सबको प्रणाम...ये क्या बैडमिन्टन लग रहा है मुझे???

  Anonymous

15 January 2010 at 18:26

गोदियाल्जी, सुनिताजी, पारिखजी,ललितजी और अन्य नए सदस्यों को राम राम और नमस्ते.
@सुनीता जी मैं ठीक-ठाक हूँ, आप कैसी है ?

  srijana

15 January 2010 at 18:26

info ke liye thank u sunita ji...ab to unse baat karna hi padega

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:27

हमारे ब्लॉग पर तो सृजना ने फोटो नहीं लगाया फिर भी नमस्ते तो कर ही सकते हैं.

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:27

सुनीता जी-ईब ही चश्मो तो चढ्यो कोनि। मोति्या को आपरेशन करवायो है।
थ्हे तो अंतर्यामी हो।

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:27

समीर जी को शत-शत प्रणाम , आपने ठीक से फोटो नहीं देखी टेबिल टेनिस खेल राही है

  srijana

15 January 2010 at 18:27

namaste rekha ji...suna hai ki aap bhavishya vakta hai?

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:29

टेबल टेनिस इतना कूद कर.....?? क्या गोदियाल जी...पक्का बैडमिन्टन होगा

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:29

के मुरारी भाया सबको ठिकरो म्हारे सिर मत फ़ोड़ो...:) अरे एक बार बनाया बार-बार अपण भाया न नई बणाया करै. या तो कोई और है जो खुद कह रही है कैसे कहूँ...मै तो कह दूँ जैसे भी हो कह दे भई...

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:29

"हमारे ब्लॉग पर तो सृजना ने फोटो नहीं लगाया फिर भी नमस्ते तो कर ही सकते हैं."

समीर जी, आपका किसी की शक्ल देखने का ट्रिक पसंद आया :)

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:30

अरे भाया सृजना जी तो अपणी पिछाण की निक्लाई,
ईब म्हारी समझ म्हे आ गयो मामलो।

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:30

सुनीता आज फुर्सत में कैसे??

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:30

समीर भाई राम-राम

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:31

ha..ha.. chaliye lalit ji samjh me aagayaa !!! godiyaal ji aapke blog pe nahi Radiomistysikki. ke blog pe inki photo hai !!!

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:31

हा हा...गोदियाल जी..जो कोई न जाने वो आप निकाल लाओ.. :)

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:31

समीर भाई नमस्कार...कैसे हैं आप?

  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

15 January 2010 at 18:31

Udan Tashtari said...
सुनीता आज फुर्सत में कैसे??

रसोई जो भाई साहब ने संभाली है आज :)

  srijana

15 January 2010 at 18:31

abhi abhi aaye hain...kuch waqt to dijiyegaa....

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:31

Srijana Rasaily

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:32

मुरारी जी - सुनीता जी म्हाने बानरो बणा रही सै।

हा हा हा

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:33

बिलकुल सही पहचाना समीरजी!!

  srijana

15 January 2010 at 18:33

namaste ji....udan tashtari ji

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:33

हम तो इनको पहले ही देख चुके...


चलो भई...आज मकरंद नहीं दिख रहा??

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:33

या सुनिताजी की गलती है दुबारा ऐसा नहीं करना chahiye!! हा..हा..हा..

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:33

फ़ुर्सत कहाँ है हमें जो हो पाते आपकी महफ़िल में शामिल, ये तो हर रोज़ की आदत है जो गुजरते हैं इस मोड से तो आपके दर पर भी झाँक लिया करते हैं...

  Anonymous

15 January 2010 at 18:34

@srijana, aapki galatfahmi door karti hun, mai nahi sagitaji hai jo bahavisya vaani karti hai,mai to ek aam hun khas nahi.

  Ruma-power

15 January 2010 at 18:34

सभी को राम राम

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:34

नमस्कार...


मुरारी बाबू...आपको बास्केट बॉल लग रहा है जबाब?? मुझे तो डाऊट है...

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:35

anjanaa ji raam raam

  Ruma-power

15 January 2010 at 18:35

basket ball

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:35

अन्जना जी..नमस्कार!!

  srijana

15 January 2010 at 18:35

oops sorry rekha ji....and samir ji...user name bada badiya laga aapka

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:36

@sameerji हा..हा.. मुझे तो डाउट नहीं है!!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:36

अन्जना जी राम राम

समीर भाई-फ़ुटबाल है।
वो गोल पे हेड ले रही है।

  Anonymous

15 January 2010 at 18:37

Sameer ji namaskar!

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:37

ललित जी kahaan गायब हो जाते हो!!!

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:37

उजर नेम ही बच रहा है अब तो...समीर लाल बताओ तो कहना पड़ता है समीर लाल उड़नतश्तरी वाले ...तब जान पाते हैं लोग. :)

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:38

सुनीता जी-स्वागत है,स्वागत है।

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:38

रेखा जी, नमस्ते....बीच बीच में आप गुम हो जाती हैं...:)

  srijana

15 January 2010 at 18:39

okay sabhi dosto se milkar accha laga...thank you filhaal jana hoga...so namaste

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:39

ललित भाई की बात में दम है:

फ़ुटबाल है।
वो गोल पे हेड ले रही है।

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:39

अरे भाई कमेंट पढ के लिखने मे ही टाईम ल्ग जाता है।

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:39

नमस्कार सृजना..आती रहो...

  Anonymous

15 January 2010 at 18:40

@sameer ji mai to roj hazari lagati hun:)

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:42

आइ डी बदलने की बजाए दो कम्प्युटर से काम चलाओ:)

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:42

अरे, फिर मेरा ही मति भ्रम होगा.... :)

  Ruma-power

15 January 2010 at 18:42

आज क्या हिंट नही मिलेगा डां झटका जी कहां है..

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:42

100

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:42

१०० वीं टिप्पणी का महत्व अपनी जगह है.

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:43

डॉ झटका हिंट दो भई..अगर सही जबाब न आया हो तो...

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:46

समीर भाई-लिजिए गरमा गरम एक दम कडाही से।

खामोशियों मे ही तुफ़ां पलते हैं
पिघलने पर ही फ़ौलाद ढलते हैं
छलते हैं खामोश देखकर लोग
अंगारे भीतर ही भीतर सुलगते है

  kavita verma

15 January 2010 at 18:46

sabhi guni jano ko raam-raam aur makarsankranti ki badhai.naye khiladi ko khel me shamil karne ka dhanyavad.ab to aapki tippniyan padh-padh kar roz is khel me shamil hone ki lalak lag gayee hai,umeed hai mujhe bhi jagah milegi.

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 18:47

अरे आईये नियमित...स्वागत है आपका..

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:50

अरे कविता जी जाते-जाते अपना परिचय देती जाईये वरना मै इन सबके संदेह के घेरे में फ़ँसी रह जाउँगी...:(

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 18:54

सुनीता जी-आप संदेह के घेरे मे! राम-राम्।:)

एक दिन फ़ंस गए थे अब नही फ़ंसने वाले।
उस दिन तो अपने आप पर हंसी आती रही।
क्या बनाया था आपने!
पर आज नही बन सके।

  Murari Pareek

15 January 2010 at 18:56

सुनिताजी आपको कैसे पता चला की वो जा रही हैं उन्होंने तो कहा ही नहीं की जा रही हूँ!!!हा.. हा.. मतलब आप ही ही हैं!!

  sangita puri

15 January 2010 at 18:57

सबों को नमस्‍कार ..

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 18:57

शुक्र है आप तो विश्वास कर रहे हैं। हाँ ये जरूरी नही की रोज़-रोज़ बनाया जाये और हर रोज आप बन ही जायें...है न

  sangita puri

15 January 2010 at 18:58

किसे अपना भविष्‍य जानने की इच्‍छा है .. मेरी खोज हो रही थी यहां .. ऐसा मुझे पता चला है !!

  sangita puri

15 January 2010 at 18:59

कविता जी परिचय कैसे देंगी .. उनके प्रोफाइल में लिखा है .. कैसे कहूं ??

  sangita puri

15 January 2010 at 19:00

सही जबाब आया या नहीं ??

  sangita puri

15 January 2010 at 19:00

सब कहीं चले गए क्‍या ??

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:00

हाँ संगीता जी आप भविष्य देख कर बताईये यह मुरारी बाबू मुझे कहाँ मिलेंगे ताकी मै इनकी अच्छे से चटनी बना सकूँ बहुत जी-जी हुआ...बहुत गुस्सा आ रहा है मेरे को...गुर्रर्र...

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:00

सगीता जी प्रणाम,

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 19:01

अब तो कोई सफाई देने वाला भी नहीं रहा..मुझे तो लग रहा है सुनीता ही है...हा हा!!

  Ruma-power

15 January 2010 at 19:01

संगीता जी राम राम ।

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:01

HA..HA..GURRANE SE KYAA HOGAA SUNITAA JI POL KHUL GAYI KYA!!! HA..HA..

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:04

समीर भाई आप भी?
मैने सोचा न था एक दिन सारे रिश्ते बदल जायेंगे,
आप अपनो को छोड़ कर यूँ गैरों को अपनायेंगे...:(

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:05

अरे मै आपकी मुह बोली बहन हूँ....या थी हो गई अब...कहानी गडरिये वाली बनाओगे क्या...संगीता जी बचाओ....

  sangita puri

15 January 2010 at 19:06

नेट पर किसी की चटनी नहीं बनती है क्‍या .. मुलाकात आवश्‍यक है ??

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 19:06

चलो, मैं भी चलूँगा तुम्हारे साथ..जब मुरारी बाबू की चटनी बनेगी...:) भावुक हो गया एकदम से. :(

  Unknown

15 January 2010 at 19:07

basketball

  kavita verma

15 January 2010 at 19:07

sunitaji maafi chahati hu meri vajah se sab aap ke peechhe pad gaye,mujhe maaloom hota to javab dene ke baad tahalne nahi nikalti.ab main aap sab se kahun hun ki main kavita hu sunita koni.

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:09

इतनी भावुकता ठीक नही भाई आँसू पोंछ लो मै अकेली ही बहुत हूँ मुरारी की चटनी बनाने के लिये...लहसुन प्याज़,हरीमिर्च के साथ देशी घी में हींग का तड़का लगाँऊगी कल सबको खिलाऊँगी...

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 19:10

अच्छा हुआ कविता जी वापस आ गई..वरना तो मुरारी बाबू का बचना मुश्किल ही था...:) सुनीता से!!

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:11

sorry sunitaaji inkaa pataa chal gayaa ye kavitaa vermaaji hain!!!

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:11

अरे कविता अब सफ़ाई मत दो सबको लगेगा कि मै ही दे रही हूँ। और तुम कहती हो कैसे कहूँ बोलो कैसे कहोगी? सब गड़बड़ झाला हुई जाता है...और तुम कोनी लिख कर राजस्थानी लिख रही हो...सोने पे सुहागा...बुहूहूहू

  kavita verma

15 January 2010 at 19:12

sunitaji "ye jindagi ek khubsoorat kavita hai aur aap ise ji bhar ke jeena chahati hai"aur 1 din kavita ban ke jeene par itana gussa jatati hai.
kaisi lagi ye "kavita"

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:13

न न न न अब मुरारी बाबू नही बचेंगे...कहाँ गई संगीता जी प्लीज़ आ जाओ...अच्छा नेट पर ही बताओ की चटनी कैसे बनाई जाये...घर पर गेस्ट भी आ गये हैं खा कर ही जायेंगे..:)

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:13

waah sunitaaji ab pataa chal gaya !! aapke aur kavitaaji ke comment me antraal ek minat hi tha!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:13

कविता जी राम राम
थारी लीला समझ ग्यो म्हे।:)

सुनीता जी को कोई दोष कोनि

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:15

सुनीता जी और कविताजी आप दोनों में एक समानता ये है की दोनों अंतिम अक्षर में "ता" है इससे ये साबित होता है की दोनों एक ही हैं हा..हा..हा..

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 19:16

मुझे राजस्थानी बोलना क्यूँ नहीं आती!!!!!!

  kavita verma

15 January 2010 at 19:16

bap re bap achchha hua aa gayee vapas meri to pahchan hi kho jane vaali thi.

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:16

सुनीता जी- दो बानरा उळ्झ्या राख्या है।
कोनी लिख के, अपणी बोली छुटै कोनि।

हा हा हा

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:17

हाहा अरे मुरारी जी यह अंतराल तो मै एक सा भी कर सकती हूँ समझे...:) लेकिन हाँ मै कविता नही हूँ

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:17

हाहा अरे मुरारी जी यह अंतराल तो मै एक सा भी कर सकती हूँ समझे...:) लेकिन हाँ मै कविता नही हूँ

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:17

टिपण्णी कारों की तमाम जिरह और मौक़ा इ तिप्प्नियात को देखते हुए ये ब्लोगत ये घोषणा करता है की कविताजी और सुनिताजी एक ही हैं!!! अब चाहे चटनी बनाओ या अचार बनाओ!!! हा..हा..

  kavita verma

15 January 2010 at 19:17

lalitji ram-ram.

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:18

बाप रे!!! तीन तीन रूप आ गए!!!

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:19

कहो कैसी रही? मगर हम पीठ पिछे नही कुछ करते...बता देते हैं दोस्तों को की कौन हैं...:)

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:19

कहो कैसी रही? मगर हम पीठ पिछे नही कुछ करते...बता देते हैं दोस्तों को की कौन हैं...:)

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:19

कविता जी- कांई बात है म्हारी तरफ़ थारो ध्यान घणी ही देर म्हे आयो।

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:19

hey prabhu rakshaa karnaa !! aaj to !!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:20

तोसे नैना लागे जी- ने म्हारो राम राम

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 19:20

सुनीता तो जादू भी जानती है...


मुरारी बाबू को चूहा बना दो!!!

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:21

कविताजी !!! आप कहाँ हैं!!!

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:21

अच्छा जो चाहे समझो...मुझे तो अब जाना होगा।

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 19:21

१५०

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 19:21

शुभ रात्रि...

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:21

मुझे चूहा और आपको बिल्ली बनादे तो !!! मेरा क्या होगा!! समीरजी!!

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:22

बो नुई समीरजी !!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:22

बहुत बडा जादु है। अभी तो मुरारी जी गधा बना हुआ है, अब चुहा-राम राम

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:23

क्या समीर भाई एक कम्प्यूटर पर क्या दो जीमेल अकाऊंट नही खोल सकते? आई पी एड्र्स से नही पहचान सकते किसी को...इतनी सुविधायें दी है गुगल ने ।

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 19:24

बो नुई

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:24

आई पी एड्रेस में गूगल या याहू का आई पी एड्रेस बताता है प्राइवेट आई पी एड्रेस नहीं बताता

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:25

काश की जादू आता...सच में मुरारी को तो जो बनाती सो किसी को क्या बेमाता भी जान न पाती की क्या घड़ दिया...हहहह

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:26

ha..ha.. kyaa banaati eliyan!!

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:27

मैं पहले से ही ऐसा बना हुआ की समझ में नहीं आरहा फिर आप ऐसा क्या बनायेंगी और भी समझ में नहीं आ रहा !!!

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:28

एक दिन शरारत की थी कि ताऊ की चौपाल में धमाल मचाये मगर फ़िर मानो या न मानो यह कैसे कहूँ कविता रानी कोई और है भाई ................बस अब थक गई

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:29

ओके आप कविता जी नहीं हैं !! राईट !!!............ कविताजी सुनिताजी हैं बस!!! खुश!!!... झगड़ा ख़तम!!!!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:29

बेमाता म्हाने तो जो मरजी होय बणा दे,

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:30

ललितजी थाणे और की बनाने की जरुरत नहीं है !!! जिस्या हो बिसया ही ठीक हो!!

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:30

हाँ मुरारी भाई वो है न मै ऎसा क्यों हूँ वैसा क्यों हूँ...हाहहा अच्छा चलो अब यह चर्चा यहीं समाप्त करते हैं...पहेली बुझें...यह टेनिस ही खेल रही हैं...डॉक्टर झटका आ जाईये न एक बार बता दीजिये फ़िर हम जायें...

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:31

This comment has been removed by the author.
  Unknown

15 January 2010 at 19:33

सबको नमस्कार

  Unknown

15 January 2010 at 19:33

ये छोरी क्यों उछल री है फ़ोटू में समझ में नी आ रिया है।

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:34

namskaar vivek ji swagatam!

  Unknown

15 January 2010 at 19:34

जरुर बॉस्केट में बाल डाली री है।

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:34

आने घड्गी बा तो बाड़ में ही बडगी!!!

  Unknown

15 January 2010 at 19:34

बॉस्केट बॉल खेल री है।

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:35

वाह! भाई-ये क्या ईंटरनेट बनाया।
मुरारी जी सिक्किम, मै रायपुर, सुनीता जी दि्ल्ली।
उडन तश्तरी अंतरीक्ष, सुनिता जी धनबाद
इतने एक जगह ईक्ट्ठा हो कर घर मे बैठे है जैसे आमने सामने लड लेते है बहुत बडी बात है।

  Unknown

15 January 2010 at 19:35

मुरारी जी, ये बड़्गी क्या है।

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:36

meraa jwaab to pahle waalaa hi hai !! srijnaa ne to slem ball batayaa hai !!

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:37

हा..हा.. सही है ललितजी अब लड़ने के लियी घर घर कौन भटके !!! विवेक जी बडगी मतलब है घुस गई!!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:37

विवेक भाई नमस्ते,

आज आपकी चर्चा किए और आप आए ही नही।

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:39

मुझे याद है मैने आपके ब्लाग का लिंक दो बार दिया था।

  Unknown

15 January 2010 at 19:39

अरे ललित भाई अब पढ़ते हैं न। अब तो सप्ताहांत आ गया है, मजे ही मजे हैं।

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:40

sabhi ko raam raam good night shubh ratri!!! nikalte hai !!

  Unknown

15 January 2010 at 19:41

ललित भाई हमने अभी के लिये नहीं लिखा है यह तो पिछले १ महीने के लिये लिख दिया

  Unknown

15 January 2010 at 19:41

अब छोड़िये न ललित भाई

  Unknown

15 January 2010 at 19:41

वैसे भी आज अजय भाई ने ठीकरा हमारे सिर पर फ़ोड़ ही दिया है।

  Unknown

15 January 2010 at 19:42

मुरारी जी- शुभरात्रि

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:42

सही बात है हम सब दूर दूर हैं मगर इस घरेलु लड़ाई के लिये तो ताऊ.कॉम को ही धन्यवाद देते हैं। यह कोई लड़ाई नही थी। अच्छा लग रहा था जैसे अपने छोटे भाई की खूब जम कर पिटाई की हो। पारीक भाई बुरा तो नही लगा न आपको...बहुत बार तुम कहा आप उम्र में भी छोटे है और लड़ाई आप कह कर करने में मज़ा नही आता...:)

  सुनीता शानू

15 January 2010 at 19:43

सभी को शुभरात्री, राम-राम आज बहुत देर हो गई...जाती हूँ...

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:44

चलिए कोइ बात नही।

शुभ रात्री-शब्बा खैर

  Murari Pareek

15 January 2010 at 19:46

aapne tum kahaa to achchaa lagaa sunitaa ji abhi main thodaa busy ho gayaa hu!!

  ब्लॉ.ललित शर्मा

15 January 2010 at 19:57

BASKET BALL

  sangita puri

15 January 2010 at 19:58

बास्‍केट बॉल है !!

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 20:19

मैं तो यहीं बैठा किनारे शाब लोगों की बात सुन रहा हूँ...विवेक जी को नमस्कार!!

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

15 January 2010 at 20:21

लॉन टेनिस!

  Udan Tashtari

15 January 2010 at 21:15

शास्त्री जी देर से आये मगर जबरदस्त जबाब लाये... :)

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