खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (174) : आयोजक उडनतश्तरी

बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूं.

जैसा कि आप जानते हैं कि आज मैं आयोजक के बतौर यह अंक पेश कर रहा हूं.

आपका इस खेल को संचालित करने मे मुझे पुर्ण सहयोग मिलता आया है और उम्मीद करता हूं कि अब आने वाले दिनों में भी मिलता रहेगा. इस खेल मे आप लोगो के सहयोग से रोचकता बरकरार है. सभी इसका आनंद ले रहें हैं. आगे भी लेते रहें और अब रिजल्ट पेश करने के लिये आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" भी अमेरिका से पलट आये है. तो आईये अब आज का बहुत ही आसान सवाल आपको बताते हैं :-

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि ये कौन है?



तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. इसका जवाब कल शाम को 4:00 तक आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" देंगे. आज मैं और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.

"बकरा बनाओ और बकरा मेकर बनो"

.टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.


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Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद

43 comments:

  Devendra

17 January 2010 at 18:01

This comment has been removed by the author.
  kase kahun?by kavita.

17 January 2010 at 18:02

rani mukherji..

  Devendra

17 January 2010 at 18:06

priety zinta

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:07

माईकल जैक्सन:>)

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:07

कविता जी और देवेन्द्र जी को नमस्कार

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:12

इतना सन्नाटा क्युं है भाई, कहां गए सब रामगढ वाले?

  संगीता पुरी

17 January 2010 at 18:16

नमस्‍कार .. सबों को !!

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

17 January 2010 at 18:17

अब मुझे तो साधना लगती है।

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:18

संगीता जी प्रणाम्।

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 18:18

प्रेटी जिंटा

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:18

वकील साब-खम्मा घणै।

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:20

ड़ाक्टर साहब-नमस्कार

समीर भाई के आते तक अभिवादन की जिम्मेदारी मेरी रहती है।:>)

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

17 January 2010 at 18:20

सभी सज्जनों को नमस्कार्!

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:21

पंडित जी-प्रणाम, कैसे है?

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 18:21

जोहार

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

17 January 2010 at 18:22

प्रणाम्!

हर हर गंगे!!!!

  kase kahun?by kavita.

17 January 2010 at 18:24

sabhi gunijano ko mera namaskar.

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

17 January 2010 at 18:24

सब कै ताईँ राम राम!

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 18:25

इस साइट में औटो अपग्रेड हो अच्छा रहेगा जैसे लिवा क्रिकेट कोम्मेंट्री में होता है

क्या ललित जी मुन्ना इतनी बड़ी बड़ी मूचों वाले को कमजोर दिल बना दिया

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 18:25

live

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:28

@डाक्टर साहेब-बालक है, जोश मे होश खो देता है।:>)

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

17 January 2010 at 18:28

पीछे से कोई इसे प्रियंका चोपड़ा बता गया।

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

17 January 2010 at 18:29

ललित जी दुर्गादान जी को गीत कश्यो लाग्यो?

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:30

@ वकील साहब-वो मुझे भी बता के गया है।
बकरा बनाना चाहता है। सावधान्।:)

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:33

@ वकील साहब-घणो बढिया, काळजो सीळो व्हई ग्यो पढ के, म्हारो तो मन एकदम भावुक व्हैई ग्यो। ओर कदे सुणवाओ।

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

17 January 2010 at 18:37

महेन्द्र नेह उस का हिन्दी अनुवाद कर रहे हैं। एक दो दिन में शायद मुझे दे देंगे।

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

17 January 2010 at 18:41

आज उड़नतश्तरी किधर घूम रही है?

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:41

@वकील साब-हिन्दी अनुवाद तो आपां भी कर सकां
थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी बस्।

  ललित शर्मा

17 January 2010 at 18:43

आज वहां के प्रैट्रोल पंपों की हडताल है:)

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 18:43

उड़न तश्तरी मिस्टर इंडिया के रूप में

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 18:45

संडे भी तो है आज पहेली लगा के वीकेंड मना रही है

  Vivek Rastogi

17 January 2010 at 19:13

सब किधर हैं भई..

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 19:14

दर्शन दो घनश्याम
भक्त गन इंतजार कर रहे हैं
बाबाजी

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 19:15

बड़ी देर भाई नंदलाला
ओह आई न कोई ब्रिजबाला
इसीलिये छुपे हैं लाला

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

17 January 2010 at 19:35

लगता है सब चले गए हैं। मैं भोजन कर आया हूँ। मैथी और दाल की सब्जी, भरवाँ बैंगन, धनिए की चटनी के साथ मक्के की रोटियाँ खाई हैं। आज गुड़ लेना भूल गया।

  डॉ महेश सिन्हा

17 January 2010 at 19:40

क्या बात है द्विवेदी जी इतने जल्दी भोजन संध्या वाले हैं लगता है
सभी गिल्ली डंडा खेल रहे हैं आते ही होंगे

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

17 January 2010 at 20:03

अपना समय यही है सात-आठ बजे शाम। सुबह 10 बजे खा कर निकलते हैं। दोपहर मे नाश्ता करते नहीँ तो शाम को जल्दी चाहिए। वैसे भी इस बरसात भर ब्यालू कर ली थी। आनंद आया।

  Udan Tashtari

17 January 2010 at 20:06

साहब सभी को नमस्कार.

आँख लग गई थी साहब...अभी भागता हुआ चला आ रहा हूँ...



खम्मा घणै!!

  Udan Tashtari

17 January 2010 at 20:07

आज बहुत से लोग एबसेन्ट हैं शाब जी!!!

  Udan Tashtari

17 January 2010 at 21:17

कहाँ गये सब..रविवार की ड्यूटि ऐसी ही रहती है..चाय का जुगाड़ भी नहीं..हम्म!!

  अजय कुमार झा

17 January 2010 at 23:30

अमां यहां तो चाय खाना डिस्कस हो रिया है यो लुगाई ना कोई पहचान ना रहा है , मन्ने तो यो ललिता पवार लाग री है , इकदम जवानी की फ़ोटू है पिचान में ना आ री किसी के तभी
अजय कुमार झा

  डॉ महेश सिन्हा

18 January 2010 at 00:36

उड़ान तश्तरी भी भाग गयी थारे जवाब सुन के

  बवाल

18 January 2010 at 17:33

एक किस्म की बवालिन है यह।

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