ताऊ की चौपाल मे : दिमागी कसरत - 48


नमस्कार दोस्तों. मैं आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" आज सुबह की दिमागी कसरत की कक्षा मे आपका स्वागत करता हूं. आप अगर मेरी क्लास में नियमित आते रहे तो आपका दिमाग बिल्कुल मेरी तरह यानि तेज कैंची की तरह चलने लगेगा. तो आज हम आपको एक बिल्कुल सीधा सा इतिहास का सवाल पूछ रहे हैं. इसका जवाब दिजिये.. फ़िर हम आपकी कापी चेक करके बतायेंगे कि आपके दिमाग की कसरत कितनी हुई?

सवाल यह रहा :-


राजस्थान के इतिहास में " पन्नाधाय " को किसलिए याद किया जाता है |


तो फ़टाफ़ट जवाब दिजिये!


आभार : श्री समीरलाल "समीर"

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Promoted By : ताऊ और भतीजाएवम कोटिश:धन्यवाद

9 comments:

  Rekhaa Prahalad

16 January 2010 at 09:26

पन्नाधाय के नाम को कौन नहीं जानता? वे राजपरिवार की सदस्य नहीं थीं। राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह को मा¡ के स्थान पर दूध पिलाने के कारण पन्ना धाय मा¡ कहलाई। पन्ना का पुत्र व राजकुमार साथ-साथ बड़े हुए। उदयसिंह को पन्ना ने अपने पुत्र के समान पाला अत: उसे पुत्र ही मानती थी।

दासी पुत्र बनवीर चित्तौड़ का शासक बनना चाहता था। उसने एक-एक कर राणा के वंशजों को मार डाला। एक रात महाराजा विक्रमादित्य की हत्या कर, बनवीर उदयसिंह को मारने के लिए उसके महल की ओर चल पड़ा। एक विश्वस्त सेवक द्वारा पन्ना धाय को इसकी पूर्व सूचना मिल गई।

पन्ना राजवंश के प्रति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग थी व उदयसिंह को बचाना चाहती थी। उसने उदयसिंह को एक बांस की टोकरी में सुलाकर उसे झूठी पत्तलों से ढककर एक विश्वास पात्र सेवक के साथ महलों से बाहर भेज दिया। बनवीर को धोखा देने के उद्देश्य से अपने पुत्र को उसके पलंग पर सुला दिया। बनवीर रक्तरंजित तलवार लिए उदयसिंह के कक्ष में आया और उदयसिंह के बारे में पूछा। पन्ना ने उदयसिंह के पलंक की ओर संकेत किया जिस पर उसका पुत्र सोया था। बनवीर ने पन्ना के पुत्र को उदयसिंह समझकर मार डाला।

पन्ना अपनी आंखों के सामने अपने पुत्र के वध को अविचलित रूप से देखती रही। बनवीर को पता न लगे इसलिए वह आंसू भी नहीं बहा पाई। बनवीर के जाने के बाद अपने मृत पुत्र की लाश को चूमकर राजकुमार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए निकल पड़ी। धन्य है स्वामिभक्त वीरांगना पन्ना! जिसने अपने कर्तव्य-पूर्ति में अपनी आ¡खों के तारे पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़ राजवंश को बचाया।

  पी.सी.गोदियाल

16 January 2010 at 09:42

देश बचाने के लिए अपने बच्चे की बली दी थी !

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

16 January 2010 at 10:06

चित्तौड़ के राजा राणा सांगा के पुत्र उदय की धाय थी, उस ने राजकुमार उदय को बचाने के लिए अपने पुत्र को उस के स्थान पर रख बलिदान दे दिया। और स्वयं राजकुमार को ले कर कुंभलगढ़ चली आई। अपने कर्तव्य के लिए अपने पुत्र का बलिदान करने वाली इस माँ पन्ना धाय का नाम इसी कारण राजस्थान के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

  seema gupta

16 January 2010 at 10:41

पन्नाधाय के नाम को कौन नहीं जानता? वे राजपरिवार की सदस्य नहीं थीं। राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह को मा¡ के स्थान पर दूध पिलाने के कारण पन्ना धाय मा¡ कहलाई। पन्ना का पुत्र व राजकुमार साथ-साथ बड़े हुए। उदयसिंह को पन्ना ने अपने पुत्र के समान पाला अत: उसे पुत्र ही मानती थी।

regards

  seema gupta

16 January 2010 at 10:42

पन्ना धाय ने मेवाड़ वंश को बचाने के लिए कुमार उदयसिंह के लिए अपने पुत्र का बलिदान दे दिया।
regards

  संगीता पुरी

16 January 2010 at 11:07

राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह को मां के स्थान पर दूध पिलाने के कारण पन्नाधाय मां कहलाई।

  संजय बेंगाणी

16 January 2010 at 11:51

राजकुमार की जान बचाने के लिए अपने बेटे का बलिदान देने के लिए.

  प्रकाश गोविन्द

16 January 2010 at 13:37

Nice Question
and
Very Nice Answer
by
Rekha Prahalad ji

  सुनीता शानू

16 January 2010 at 16:39

स्कूल से लेकर कॉलेज़ तक मुझे पन्नाधाय के स्वरूप का मंचन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज बचपन की याद ताज़ा हो गई। जब मै चंदन का बलिदान नामक नाटक के लिये पन्नाधाय की भूमिका के लिये चुनी गई थी। और उसे अभिनय करते वक्त महसूस हुआ था कि किस तरह एक दासी अपने जिगर के टुकडे का बलिदान कर अपने मालिक के नमक का हक अदा करती है। कैसे देश की आन-बान और शान की खातिर राजकुमार उदयसिंह के प्राणो की रक्षा करती है। प्रश्न के साथ जुड़ी यादे याद दिलाने का बहुत-बहुत धन्यवाद। पन्नाधाय के बलिदान को इतिहास कैसे भूल सकता है।

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