खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (193) : आयोजक उडनतश्तरी

बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं.

जैसा कि आप जानते हैं कि अब खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी का आयोजन सिर्फ़ मंगलवार और शुक्रवार शाम को 6:00 PM पर किया जाने लगा है. आईये अब खेल शुरु करते हैं.

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि यह किस चीज की पतियां है?



तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. आज मैं और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.


टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.

37 comments:

  दिगम्बर नासवा

16 February 2010 at 18:17

jamun ki pattiyaan ..

  दिगम्बर नासवा

16 February 2010 at 18:18

Aam ki pattiyan...

  दिगम्बर नासवा

16 February 2010 at 18:19

Raam Raam ... sabhi ko ...

  दिगम्बर नासवा

16 February 2010 at 18:21

Choti Ilaaychi ki ..

  Udan Tashtari

16 February 2010 at 18:25

स्वागत है, दिगम्बर बाबू..आज तो खुद ही को खुद से हराने चला हूँ..टाईप!!

  संगीता पुरी

16 February 2010 at 18:25

अशोक के पत्‍ते !!

  Udan Tashtari

16 February 2010 at 18:26

कोई जंगली पौधा लगता है राजस्थान का.

  मोहसिन

16 February 2010 at 18:27

Litchi ki pattiyan hai.

  Udan Tashtari

16 February 2010 at 18:28

ये पौधा मैने देख हुआ है...इसकी पत्ती को तोड़ो तो चिट चिट बोलती है. :)

  Udan Tashtari

16 February 2010 at 18:32

बीच से मोड़ कर जोर से दबाना पड़ता है तब आवाज आती है..चिट चिट!!

  Udan Tashtari

16 February 2010 at 18:34

मकरंद कहाँ है?? उसे मालूम होगा...

  makrand

16 February 2010 at 18:37

दिगंबर अंकल को बालक की नमस्ते

  makrand

16 February 2010 at 18:38

समीर अंकल नमस्ते

  makrand

16 February 2010 at 18:38

संगीता आंटी नाम्स्ते

  makrand

16 February 2010 at 18:38

मोहसिन अंकल नमस्ते

  makrand

16 February 2010 at 18:39

ये नीम की पत्तियां हैं.

  Udan Tashtari

16 February 2010 at 18:39

मकरंद, ये वो ही चिट चिट वाली पत्ती है न??

  makrand

16 February 2010 at 18:40

समीर अंकल ये चिट चिट नही किट किट बोलती हैं.

  makrand

16 February 2010 at 18:41

आजकल मुरारी अंकल, गोदियाल अंकल, और वो अपने मूंछ वाले ललित अंकल दिखाई नही देते क्या बात है?

  Udan Tashtari

16 February 2010 at 18:41

नाम मालूम है क्या? कोई लिंक?

  makrand

16 February 2010 at 18:44

ये बताया ना...नीम की पत्तिया हैं...लिंक किसको दूं? यहां कोई और खिलाडी तो अहि ही नही?

  Tarkeshwar Giri

16 February 2010 at 18:46

कुछ पत्तिया तो केले की है और कुछ और की

  Udan Tashtari

16 February 2010 at 18:47

पंडित वत्स को ईमेल से भेज दो तो चले आयेंगे. :)

  makrand

16 February 2010 at 18:49

ताऊजी को बोलता हूं जरा...वत्स जी को फ़ोन करके बुलवाते हैं...आप दो मिनट ठहरना..मैं पांच मिनट मे आया...

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

16 February 2010 at 19:23

सब को राम राम। पेड़ की पत्तियाँ हैं। पेड़ नहीं पहचाना।

  Rekhaa Prahalad

16 February 2010 at 19:49

काली इलायची के पत्ते, साथ मे केले का एक पत्ता भी दिख रहा है.

ये क्या, रामप्यारी को इलायेची का बहुत शौक है शायद; अभी हाल ही फूलो का चित्र दिया अब पत्तों का

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

16 February 2010 at 20:33

शाम से ही हिचकियों नें परेशान कर रखा था...अब जाकर कारण समझ में आया कि जब इतनी शिद्दत से याद किया जा रहा है तो हिचकियाँ तो आएंगी ही:)

पहले तो दिगम्बर जी को विजेता बनने की एडवांस में बधाई...सही उत्तर छोटी इलायची ही है।

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

16 February 2010 at 21:54

ये तो शायरी की पत्तियाँ हैं जी!

  दिलीप कवठेकर

16 February 2010 at 23:16

ये अशोक की पत्तियां है.

  Sadhana Vaid

17 February 2010 at 08:15

ये पत्तियाँ अदरक की लग रही हैं | पार्श्व में एक केले का पत्ता भी है |

  Rekhaa Prahalad

17 February 2010 at 09:01

इलायची के पत्ते chahe छोटी इलायची ki ho ya fir काली इलायची ki ;)

  अल्पना वर्मा

17 February 2010 at 09:26

@Digamabar ji ne ek dam sahi sahi itni jaldi jawab diya..
sahi !sahi!kya baat hai! kya baat hai!


ye Green Cardamom[chhoti ilaichi] ]ki leaves hi hain.

  अल्पना वर्मा

17 February 2010 at 09:27

Baqi sahi jawab to rampyari hi batayegi!

  K____K_____

17 February 2010 at 09:53

अशोक की ही पत्तिया है

  Sadhana Vaid

17 February 2010 at 11:21

मुझे तो दिगाम्बरजी का पहला जवाब ही सही लग रहा है | ये पत्तियां जामुन की ही है |

  दिगम्बर नासवा

17 February 2010 at 14:01

Bhai mere jawabon ki charcha ho rahi hai .... to main maan loo ki meri jeet pakki ...?

  Mishra Pankaj

17 February 2010 at 21:46

नमस्कार ! आज यहा से आप सबसे एक एक करके हाल चाल पुछ रहा हु आप सब अपना हाल बताईये फ़िर मै बताऊगा कि मै क्यु इतने दिन से ब्लाग जगत से दूर हु

आप सबके जवाब का इन्तजार
पंकज मिश्रा

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