खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (194) : आयोजक उडनतश्तरी

बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं.

जैसा कि आप जानते हैं कि अब खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी का आयोजन सिर्फ़ मंगलवार और शुक्रवार शाम को 6:00 PM पर किया जाने लगा है. आईये अब खेल शुरु करते हैं.

नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि यह लहसुन के खेत के बीच मे कौन छुपा बैठा है?



तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. आज मैं और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.


टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.

26 comments:

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:11

जैकाल या लोमड़ी

  ललित शर्मा

19 February 2010 at 18:12

गोदियाल जी राम राम

  makrand

19 February 2010 at 18:14

गोदियाल जी रामराम.

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:14

सभी को राम-राम !

  ललित शर्मा

19 February 2010 at 18:14

रामप्यारी-खाज वालो कु्करो दिखे सै।

  makrand

19 February 2010 at 18:14

ललित अ
म्कल नमस्ते

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:14

Lalit जी को भी,

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:15

ताऊ जी को भी,

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:15

डाक्टर झटका को bhee

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:15

समीर लाल समीर जी को भी

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:15

बच्चा मकरंद को भी

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:15

एक बच्चा छुट्टी गया था अभी तक नहीं लौटा उन्हें भी !

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:15

और अन्य सभी पधारने वाले महानुभाव को भी !

  makrand

19 February 2010 at 18:16

मुझे तो ये लोमडी ही दिखती है.

  ललित शर्मा

19 February 2010 at 18:16

मकरंद को नमस्ते

  makrand

19 February 2010 at 18:16

आज समीर अंकल नही दिखे?

  पी.सी.गोदियाल

19 February 2010 at 18:18

ललित जी प्रतियोगिता में कविता बहुत उत्तम थी !

  ललित शर्मा

19 February 2010 at 18:22

गोदियाल जी शुक्रिया आपको पसंद आई।
एक मत भी दे देना।

  ललित शर्मा

19 February 2010 at 18:53

जंगली कुत्ता है,
राम-राम

  रंजन

19 February 2010 at 19:07

भेदिया है.. नहीं तो बिल्ली पक्का...:)

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

19 February 2010 at 21:22

बकरा है जी!

  Udan Tashtari

19 February 2010 at 23:35

सभी को मेरा प्रणाम. जरा सी देर हो गई आने में.

  Udan Tashtari

19 February 2010 at 23:37

ललित भाई की प्रतियोगिता में फोटू क्या टंगी, मूंछ का स्टाईल ही बदल लिया और छुट्टी कुछ मोटे भी हो गये हैं. :)

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

20 February 2010 at 01:11

बकरा

  K__Kash

20 February 2010 at 12:26

खेतो मैं कोई नही हैं यह तो software की मदद से चित्रों में फेर फार किया गया है

  यशवन्त मेहता "फ़कीरा"

20 February 2010 at 14:02

पहाड़ी बकरा

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