ताऊ की चौपाल - 2

नमस्कार दोस्तों. मैं आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" रविवार सुबह की दिमागी कसरत की कक्षा मे आपका स्वागत करता हूं. आप अगर मेरी क्लास में नियमित आते रहे तो आपका दिमाग बिल्कुल मेरी तरह यानि तेज कैंची की तरह चलने लगेगा. तो आज हम आपको एक बिल्कुल सीधा सा सवाल पूछ रहे हैं.

यह रहा आज का सवाल

रोटी जली क्यों...?
घोड़ा अड़ा क्यों...?
पान सड़ा क्यों...?


तो फ़टाफ़ट जवाब दिजिये!

6 comments:

  Sadhana Vaid

14 February 2010 at 08:15

क्योंकि फेरा न गया |
उल्टी पलटी ना गयी इसलिए रोटी जल गयी |
एक जगह खड़े खड़े घोड़ा बिगड़ गया |
उलटे पलटे ना गए इसलिए पान सड़ गए |

  रंजन

14 February 2010 at 08:27

sahi hai taau..

  raveesingh

14 February 2010 at 08:36

घुमाया न था

  निर्मला कपिला

14 February 2010 at 08:51

अग तेज़ थी रोटी उठाई नही गयी
घोडा हाथ लगाने से बिदक जाता है जरूर उसे छेडा गया होगा
पान कई दिन से रखा होगा तो सड गया
ताऊ जी राम राम

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

14 February 2010 at 10:46

फेरा न था!

प्रेम दिवस की हार्दिक बधाई!

  दिगम्बर नासवा

14 February 2010 at 14:24

आग तेज़ थी .....
आग से ही ये तीनो चीज़ें होती हैं ... रोटी जलती है, घोड़ा रुकता है, पान सड़ता है ....

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