वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री समीरलाल "समीर"

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,

हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर दिया है जिसके अंतर्गत आज श्री समीरलाल "समीर" की रचना पढिये.

आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपना संक्षिप्त परिचय और ब्लाग लिंक प्रविष्टी के साथ अवश्य भेजे जिसे हम यहां आपकी रचना के साथ प्रकाशित कर सकें. इस प्रतियोगिता मे आप अपनी रचनाएं 30 अप्रेल 2010 तक contest@taau.in पर भिजवा सकते हैं.

लेखक परिचय
नाम : समीर लाल "समीर"
उम्र : 46 वर्ष
स्थान : जबलपुर से कनाडा
शौक : पढ़ना, मित्रों के साथ बातचीत करना, लिखना और नये ज्ञान की तलाश
ब्लाग : उडनतश्तरी



मोटापा बदनाम हो गया!!

अजीब दो गले लोग हैं. एक तरफ तो कहते हैं, प्रगति होना चाहिये- चहुंमुखी प्रगति एवं सर्वांगीण विकास. इंडिया उदय और न जाने क्या क्या नारे. अब जब विकास की राह पर हम इसका अक्षरशः पालन करने लगे तो कहते हैं कि मोटापा हानिकारक है. यार, हम क्या करें. हम तो मानो फँस कर रह गये. सुनो तो बुरे बनो, न सुनो तो बुरे. इससे अच्छा तो हम नेता होते तो ही ठीक था. सुन कर भी हर बात अनसुनी कर देते. देख कर अनदेखा कर देते.

अब तो हमारे अड़ोसी पड़ोसी भी हमको मोटा कहने में नहीं सकुचाते. ये वो ही लोग हैं, जो कभी हमें बचपन में अपनी गोद में लेकर हमारे गाल नोचते थे. मोटे हम तब भी थे. मगर तब सब हमें हैल्दी बेबी, क्यूट, गबदू बाबा और न जाने क्या क्या कह कह कर प्यार करते थे, आज वो ही बदल गये हैं. मोटा कहते हैं. जमाने की हवा के साथ बह गये हैं सब. हमको तो मोटापे का पैमाना बना कर रख दिया है. जब भी किसी मोटे की बात चलती है, कहते हैं, इनसे ज्यादा मोटा है कि कम. मानो कि हम हम नहीं, मोटापे के मानक हो गये..



वैसे इन्हीं लोगों को जब जरुरत पड़ती है, तो इन्हें ही हम महान नजर आने लगते हैं. उस दिन भाई जी और भाभी जी का ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं था, तो हमें ही ट्रेन में सीट घेरने भेजे थे. हम अकेले ही दो सीट घेर लिये थे. फिर यह लोग बड़े आराम से यात्रा करते निकल गये और चलते चलते हमें हिदायत दे गये कि वजन कुछ कम करो. अरे, अगर उनके जैसा वजन होता तो दो लोग लगते उन दोनों के लिये सीट घेरने के लिये और फिर भी शायद कोई वजनदार धमका कर खाली करा लेता. एक तो इनका काम अकेले दम करो और फिर नसीहत बोनस में सुनों. अजब बात है.

इन्हें मोटा होने के फायदों का अंदाज नहीं है. अज्ञानी!! मूर्खता की जिंदा नुमाईश! अरे, मोटा आदमी हंसमुख होता है. वो गुस्सा नहीं होता. आप ही बतायें, कौन बुढ़ा होना चाहता है इस जग में? मोटा आदमी बुढ्ढा नहीं होता (अगर शुरु से परफेक्ट मोटा हो तो बुढापे के पहले ही नमस्ते हो जाती है न!! राम नाम सत्य!!). वो बदमाश नहीं होता. बदमाशों को पिटने का अहसास होते ही भागना पड़ता है और मोटा आदमी तो भाग नहीं सकता, इसलिये कभी बदमाशी में पड़ता ही नहीं.

नादान हैं सब, मुझे उनसे क्या!! मैं तो देश की समृद्धि और उन्नति का चलता फिरता विज्ञापन हूँ और मुझे इस पर नाज है.

दुबला पतला सिकुड़ा सा आदमी, न सिर्फ अपनी बदनामी करता है बल्कि देश की भी. मैने ऐसे लोगों की पीठ पीछे लोगों को बात करते सुना है. कहते हैं, न जाने कहाँ से भूखे नंगे चले आते हैं. मुझसे से मेरी पीठ पीछे भी कोई ऐसा कहे, यह बरदाश्त नहीं. हम तो मोटे ही ठीक हैं. अरे, अपना नहीं तो कम से कम अपने देश की इज्जत का तो ख्याल करो.

जिस तरह से महानगरों के कुछ क्षेत्रों में विकास, मॉल, कॉल सेंटर आदि की जगमगाहट को राष्ट्र का विकास का नाम देकर भ्रमित किया जाता है. ठीक उसी तरह मोटापे से ताकतवर होने का भ्रम होता है, भले अंदुरीनी स्थितियाँ, राष्ट्र की तरह ही, कितनी भी जर्जर क्यूँ न हो. भ्रम में ही सही, एक बार को सामने वाला डरता तो है. दुबलों से तो भूलवश भी आदमी नहीं डरता और बिना डराये कौन सा काम हो पाता है.

जिस तरह से महानगरों के कुछ क्षेत्रों में विकास, मॉल, कॉल सेंटर आदि की जगमगाहट को राष्ट्र का विकास का नाम देकर भ्रमित किया जाता है. ठीक उसी तरह मोटापे से ताकतवर होने का भ्रम होता है, भले अंदुरीनी स्थितियाँ, राष्ट्र की तरह ही, कितनी भी जर्जर क्यूँ न हो. भ्रम में ही सही, एक बार को सामने वाला डरता तो है. दुबलों से तो भूलवश भी आदमी नहीं डरता और बिना डराये कौन सा काम हो पाता है.


मुझे मोटापे से कोई शिकायत नहीं है, मगर मोटापे को साजिशन बदनाम होता देखता हूँ तो दिल में एक टीस सी उठ जाती है और उसी वेदना को व्यक्त करती यह रचना पेश है:


मोटापा बदनाम हो गया

आज हमारे गिर पड़ने से
एक अजब सा काम हो गया.
सारी गल्ती उस गढ्डे की
मोटापा बदनाम हो गया.

बच्चे बुढ़े जो भी आते
जोर जोर से हँसते जाते
हड्डी लगता खिसक गई है
कमर हमारी सिसक रही है

मरहम पट्टी मालिश सबसे
थोड़ा सा आराम हो गया
सारी गल्ती उस गढ्डे की
मोटापा बदनाम हो गया.

बिस्तर पर हम पड़े हुये हैं
लकड़ी लेकर खड़े हुये हैं,
घर वाले सब तरस दिखाते
दुबलाने के गुर सिखलाते.

सुनते सुनते रोज नसीहत
पका हुआ सा कान हो गया.
सारी गल्ती उस गढ्डे की
मोटापा बदनाम हो गया.

खाने को मिलती हैं दालें
बिन तड़के और बंद मसाले
लौकी वाली सब्जी मिलती
मेरे मन की एक न चलती

मुझको बस दुबला करना ही
मानो सबका काम हो गया
सारी गल्ती उस गढ्डे की
मोटापा बदनाम हो गया.

--समीर लाल 'समीर'

20 comments:

  'अदा'

2 April 2010 at 05:27

अब ई वेदना मैडम कौन है ...?
साधना जी को पता है कि नहीं...?? बहुते रिस्क लेते हैं आप :)
आपकी वेदना भी खाते-पीते घर की लग रही हैं ..हा हा हा हा

जिस तरह से महानगरों के कुछ क्षेत्रों में विकास, मॉल, कॉल सेंटर आदि की जगमगाहट को राष्ट्र का विकास का नाम देकर भ्रमित किया जाता है. ठीक उसी तरह मोटापे से ताकतवर होने का भ्रम होता है, भले अंदुरीनी स्थितियाँ, राष्ट्र की तरह ही, कितनी भी जर्जर क्यूँ न हो. भ्रम में ही सही, एक बार को सामने वाला डरता तो है. दुबलों से तो भूलवश भी आदमी नहीं डरता और बिना डराये कौन सा काम हो पाता है.

ई बात जो कहे हैं...आपको कम से कम ज्ञानपीठ पुरस्कार तो मिल ही जाना चाहिए....
सामने की बात ही छोडिये...आप तो पीठ भी दिखा देवें तो ज्ञान मिल जावे कि बच्चा पंगा मत लो...:)
हाँ नहीं तो..!!
बहुत बहुत बहुत बधाई...!!

  श्यामल सुमन

2 April 2010 at 06:06

इस अलौकिक सम्मान के लिए समीर भाई को बधाई।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

  वाणी गीत

2 April 2010 at 06:07

बधाई देना तो भूल ही गए थे ....बहुत बधाई ...!!

  वाणी गीत

2 April 2010 at 06:07

दुबले से कौन डरता है ...
गांधीजी भी तो कितने दुबले पतले थे ...भारत का पूरा वर्तमान भविष्य सब बादल दिया ...:):)
आपके मोटापे से तो नहीं मगर आपकी विनम्रता से जरुर लोग डरते हैं ...लोग सर पटक पटक कर रह गए ...मगर कभी पलट कर वार नहीं करते हैं ....अनर्गल प्रलाप करने वाले समझ सके कि आपका मौन ही कितना डरावना है ...:):)

  मनोज कुमार

2 April 2010 at 07:17

बहुत अच्छी प्रस्तुति। सादर अभिवादन।

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

2 April 2010 at 07:19

अरे वाह!
प्रेरणा के साथ वेदना भी!
बहुत-बहुत बधाई!
सुना था कि आप कुछ अस्वस्थ थे!
आपके स्वास्थ्य-लाभ की कामना करता हूँ!

  M VERMA

2 April 2010 at 07:20

अरे! वाणी जी जैसा मैं भी बधाई देना भूल गया. बहुत बहुत बधाई

  M VERMA

2 April 2010 at 07:20

अरे, अपना नहीं तो कम से कम अपने देश की इज्जत का तो ख्याल करो.

सारी गल्ती उस गढ्डे की
मोटापा बदनाम हो गया.
बहुत अहमक हैं लोग. मोटापे को क्यूँ बदनाम करते हैं? (लोग मुझे भी मोटा कहते है - पर मैं मानता ही नहीं). आप भी न माने जो आपको मोटा कहे आप उसे पतला कह दें वह चुप हो जायेगा.

  विनोद कुमार पांडेय

2 April 2010 at 08:46

समीर जी हास्य व्यंग रचना और कविता दोनों लाज़वाब.....बधाई

  ललित शर्मा

2 April 2010 at 09:50

रासायनिक पेय पदार्थ स्वास्थ्य
के लिए हानिकारक हैं,इसलिए इसे त्यागें।
हर्बल देशी टानिक (महुआ) का उपयोग करें।
मोटापा अपने आप भाग जाएगा,
कम्पली्ट फ़ुड हर्बल फ़ुड

बधाई (आज गुड फ़्राई डे है)

  seema gupta

2 April 2010 at 11:58

हा हा हा हा बहुत बहुत बधाई

regards

  अन्तर सोहिल

2 April 2010 at 13:58

मोटा कहते हैं. जमाने की हवा के साथ बह गये हैं सब. हमको तो मोटापे का पैमाना बना कर रख दिया है. जब भी किसी मोटे की बात चलती है, कहते हैं, इनसे ज्यादा मोटा है कि कम. मानो कि हम हम नहीं, मोटापे के मानक हो गये.
बहुत बढिया
बहुत पसन्द आयी जी यह रचना
हार्दिक बधाई और
प्रणाम स्वीकार करें

  प्रकाश गोविन्द

2 April 2010 at 14:10

हा,,हा,,हा,,हा,
बहुत खूब
आत्म वेदनात्मक व्यंग गजब का है
-
-
आपकी हर एक बात से पूर्णतयः सहमत हूँ
उत्कृष्ट लेखन हेतु बधाई

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

2 April 2010 at 14:23

फैन्टास्टिक च धांसू हास्य-व्यंग्य रचना...पढकर सुबह सुबह मन आनन्दित हो गया।
बहुत बहुत बधाई!!

  Udan Tashtari

2 April 2010 at 19:11

धन्यवाद!

  rashmi ravija

2 April 2010 at 19:23

कमाल की हास्य-व्यंग रचना है....कविता भी बहुत रोचक है
बहुत बहुत बधाई

  Akanksha~आकांक्षा

2 April 2010 at 22:00

बहुत सुन्दर..बधाई.

  KK Yadava

3 April 2010 at 18:09

खूब लिखा समीर जी ने...लाजवाब !!

  Ram Krishna Gautam

8 April 2010 at 23:56

Badhia Prastuti Sair... Meri Taraf Se Ten On 10...



"RAM"

  कमलेश वर्मा

13 April 2010 at 21:27

SAMEER DADDA JI, EXCUSE ME LATE HO GYA ...BAS AUR AB KUCHHH NAHI KAHNA ..HAI...HAMESHA KI TARH...BLOCKBUSTER..

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