वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : सुश्री संगीता स्वरूप

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,

हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर दिया है जिसके अंतर्गत आज सुश्री संगीता स्वरूप की रचना पढिये.

आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपना संक्षिप्त परिचय और ब्लाग लिंक प्रविष्टी के साथ अवश्य भेजे जिसे हम यहां आपकी रचना के साथ प्रकाशित कर सकें. इस प्रतियोगिता मे आप अपनी रचनाएं 30 अप्रेल 2010 तक contest@taau.in पर भिजवा सकते हैं.

लेखिका परिचय ---
नाम ----- संगीता स्वरुप
जन्म .... ७ मई १९५३
जन्म स्थान .. रुड़की ( उत्तर प्रदेश )
शिक्षा ... स्नातकोत्तर ( अर्थशास्त्र )
व्यवसाय ... गृहणी ( पूर्व में केन्द्रीय विद्यालय में शिक्षिका रह चुकी हूँ )
शौक . हिंदी साहित्य पढ़ने का , कुछ टूटा फूटा अभिव्यक्त भी कर लेती हूँ
निवास स्थान ... दिल्ली

ब्लोग्स ------- गीत.............. और
बिखरे मोती


व्यंग रचना ---- चमत्कार

एक महोदय का ये स्वाभाव था
कोई सुंदरी रहे पास ये ख्वाब था .
कल्पना की उड़ान में
हवाई उड़ान भरते हुए
विमान परिचारिकाओं को
देखा करते थे चलते हुए
और कभी अपने आफ़िस की
सुंदर स्टैनो को देखते हुए
ख्वाब में खो जाते थे
बहरहाल ज़रा संकोची थे
इसलिए मुख से
कुछ कह नही पाते थे.

इसी तरह ख्वाबों की दुनिया में
चलते - चलाते
कर बैठे एक्सिडेंट काफ़ी
बचते - बचाते .
बेहोश थे सड़क पर
चोट थी गंभीर
तमाशा देख रहे थे
कई राहगीर
किसी तरह उनको
किसी ने अस्पताल पहुँचाया
जहाँ उन्हें
काफ़ी देर बाद होश आया .
होश में आते ही जब
अपने चारों ओर नज़र दौड़ाई
स्वाभाव से मजबूर हो
कल्पना की एक उड़ान लगाई
देख रहे थे वो
एक सुंदर सी नर्स को
दिल बेज़ार था उनका
उससे कुछ कहने को
इत्तफ़ाकन वो नर्स
उनके पास आ गयी
अंजाने ही उनकी ज़ुबान
कुछ इज़हार कर गयी
बड़े बेज़ार हो कर वो बोले
काश मुझे दोबारा चोट लगे
और आपके वॉर्ड में आ सकूँ
इस तरह आपके पास रहने का
एक मौका पा सकूँ .
घूमी वो नर्स
और बोली मुस्कुरा कर
हर इच्छा पूरी
नही होती है चाह कर
दरअसल मेरे वॉर्ड में
आप जैसा कोई आ नही सकता है
मेरी ड्यूटी मेटरनिटी वॉर्ड में है
जहाँ आपको -
कोई चमत्कार ही ला सकता है .

20 comments:

  ललित शर्मा

6 April 2010 at 08:25

हा हा हा
संगीता जी बहुत बढिया
आज हास्य बोध हुआ है बैशाखनंदन में

बधाई हो।

  विनोद कुमार पांडेय

6 April 2010 at 08:28

बढ़िया हास्य व्यंग रचना..संगीता जी बधाई

  संजय भास्कर

6 April 2010 at 08:30

बहुत सुन्दर रचना । आभार

  खुशदीप सहगल

6 April 2010 at 08:56

दिलफेंक आशिक अगर मक्खन होता तो उसका यकीनन जवाब होता...
चलिए इस जन्म में न सही, मर के फिर शायद आपके वार्ड में ही नुमाया होने का मौका मिले...

संगीता जी को इस रचना के माध्यम से मुस्कान लाने के लिए बधाई...

जय हिंद...

  Suman

6 April 2010 at 09:34

nice

  पी.सी.गोदियाल

6 April 2010 at 09:42

हा हा, बढ़िया व्यंग्य , आवारा मरकर भी नहीं सुधरा !

  निर्मला कपिला

6 April 2010 at 10:39

संगीता जी क्या बात है बधाई। ताऊ जी को भी मेरी राम राम कहें

  वन्दना

6 April 2010 at 12:45

हा हा हा ………।बहुत ही लाजवाब रचना………………मज़ा आ गया।

  शेफाली पाण्डे

6 April 2010 at 14:38

vaah sangeeta ji.....bahut badhiya

  वाणी गीत

6 April 2010 at 14:59

नर्स ने भी कैसा पानी फेर दिया... किसी के दुबारा घायल होने की इच्छा पर ...
अच्छी कविता ...बधाई ...!!

  Sonal Rastogi

6 April 2010 at 15:34

बढ़िया हास्य व्यंग रचना मज़ा आ गया।

  anjana

6 April 2010 at 16:15

संगीता जी बधाई....
बढ़िया हास्य व्यंग रचना है।

  rashmi ravija

6 April 2010 at 18:13

बहुत बहुत बधाई संगीता जी,
बहुत ही बढ़िया हास्य रचना....बरबस मुस्कान ले आई चेहरे पर

  अजय कुमार झा

6 April 2010 at 19:41

हा हा हा संगीता जी ने गजब का खींच खींच कर धो दिया ..बहुत मजेदार प्रस्तुति । ताऊ आपका ये प्रयास अनूठा और अनुकरणीय है । बहुत बहुत शुभकामनाएं , हम भी अपनी दावेदारी पेश करते हैं जल्दी ही
अजय कुमार झा

  मनोज कुमार

6 April 2010 at 22:02

बेहतरीन। लाजवाब।

  Udan Tashtari

6 April 2010 at 23:14

मजेदार रहा संगीता जी!!

  अनामिका की सदाये......

6 April 2010 at 23:35

badhiya haasye vyang raha...aage bhi intzar rahega.badhayi.

  संगीता पुरी

7 April 2010 at 00:32

बहुत बढिया लिखा .. मजेदार !!

  अल्पना वर्मा

12 April 2010 at 21:11

संगीता जी बढ़िया मजेदार रचना है. :D

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