वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : सुश्री आकांक्षा यादव

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,

हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर दिया है. जिसके अंतर्गत आप नित्य विभिन्न रचनाकारों की रचनाएं यहां पढ पा रहे हैं.

आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपना संक्षिप्त परिचय और ब्लाग लिंक प्रविष्टी के साथ अवश्य भेजे जिसे हम यहां आपकी रचना के साथ प्रकाशित कर सकें. इस प्रतियोगिता मे आप अपनी रचनाएं 30 अप्रेल 2010 तक contest@taau.in पर भिजवा सकते हैं.

आज सुश्री आकांक्षा यादव की रचना पढिये.

लेखिका परिचय :
नाम- आकांक्षा यादव
जन्म - 30 जुलाई 1982, सैदपुर, गाजीपुर (उ0 प्र0)
शिक्षा- एम0 ए0 (संस्कृत)
विधा- कविता, लेख, व्यंग्य व लघु कथा।
प्रकाशन- इण्डिया टुडे, कादम्बिनी, साहित्य अमृत, दैनिक जागरण, अमर उजाला, आजकल, उत्तर प्रदेश, युगतेवर, इण्डिया न्यूज, राष्ट्रीय सहारा, स्वतंत्र भारत, राजस्थान पत्रिका, आज, गोलकोेण्डा दर्पण, युद्धरत आम आदमी, अरावली उद्घोष, गृहलक्ष्मी, गृहशोभा सहित शताधिक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। दो दर्जन से अधिक स्तरीय संकलनों में कविताएं संकलित। सम्पादन- ’’क्रान्ति यज्ञ: 1857-1947 की गाथा’’ पुस्तक में सम्पादन सहयोग।
सम्मान- साहित्य गौरव, काव्य मर्मज्ञ, साहित्य श्री, साहित्य मनीषी, शब्द माधुरी, भारत गौरव, साहित्य सेवा सम्मान, महिमा साहित्य भूषण, देवभूमि साहित्य रत्न, ब्रज-शिरोमणि, उजास सम्मान, काव्य कुमुद, सरस्वती रत्न इत्यादि सम्मानों से अलंकृत। राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’’भारती ज्योति’’ एवं भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘‘।
विशेष-‘‘बाल साहित्य समीक्षा‘‘ (सं0-डा0 राष्ट्रबन्धु, कानपुर नवम्बर 2009) द्वारा बाल-साहित्य पर विशेषांक प्रकाशन।
रुचियाँ- रचनात्मक अध्ययन व लेखन। नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक समस्याओं सम्बन्धी विषय में विशेष रुचि।
सम्प्रति-प्रवक्ता, राजकीय बालिका इण्टर काॅलेज, नरवल, कानपुर (उ0प्र0)- 209401
सम्पर्क- द्वारा- श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवा, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर-744101

ई-मेलः kk_akanksha@yahoo.com
ब्लाग : शब्द-शिखर और उत्सव के रंग


नेताजी का अरमान

नेता-अभिनेता दोनों
हो गए एक समान
मंचों पर बैठकर गायें
एक दूजे का गान।

चिकनी चुपडी़ बातें करें
खूब करें अपना बखान
जनता का धन खूब लूटें
गायें मेरा भारत महान।

मँहगाई, बेरोजगारी खूब फैले
नेताजी सोते चद्दर तान
खुद खाएं मुर्ग मुसल्लम
जनता भुखमरी से परेशान।

कभी आंतक, कभी नक्सलवाद
ये लेते सबकी जान
नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।

चुनाव आया तो लंबे भाषण
खडे़ हो गए सबके कान
वायदों की पोटली से
जनता हो रही हैरान ।

संसद में पहुँच नेताजी
बघारते अपना ज्ञान
अगला चुनाव कैसे जीतें
बस यही रहता अरमान ।

Akanksha



जरुरी सूचना :-

सभी माननिय प्रतिभागी रचनाकारों को विनम्रता पूर्वक सूचित किया जाता है कि हमारे पास जिस क्रम में रचनाए आई हैं हम उन्हें उसी क्रम में छाप रहे हैं. जिनका भी सहमति पत्र मांगा गया है उनकी रचनाएं प्रतियोगिता में शामिल की गई हैं. जिनके सहमति पत्र आ चुके हैं उन सभी की रचनाएं क्रमवार प्रकाशित की जारही हैं. अभी प्रतिभागी रचनाकारों की सिर्फ़ प्रथम रचना ही छापी जा रही हैं. जिनकी एक से ज्यादा रचनाएं आई हैं उनका प्रकाशन अगले दौर में किया जायेगा.

इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तिथी ३० अप्रेल २०१० है. आपसे निवेदन है कि अपनी रचनाएं निर्धारित तिथी के पुर्व ही भिजवाने की कृपा करें. ३० अप्रेल २०१० के बाद आई हुई रचनाएं स्वीकार नही की जायेंगी.

- वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता कमेटी

35 comments:

  M VERMA

23 April 2010 at 05:42

अगला चुनाव कैसे जीतें
बस यही रहता अरमान ।
सच तो यही है, गहरा कटाक्ष

  Suman

23 April 2010 at 06:18

nice

  Udan Tashtari

23 April 2010 at 06:34

आकांक्षा जी का स्वागत है वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में. इस रचना के लिए बधाई-बहुत बढ़िया.

  Vivek Rastogi

23 April 2010 at 07:13

मेरा भारत महान

बधाई, बेहतरीन

  विनोद कुमार पांडेय

23 April 2010 at 07:55

बहुत खूब आकांक्षा जी....एक दम सटीक हास्य व्यंग रचना...आज कल नेता अभिनेता में ज़्यादा फ़र्क नही रह गया...राजनीति अभिनेता कर रहे हैं और नेता अभिनय....बढ़िया कविता के लिए धन्यवाद...

  Sonal Rastogi

23 April 2010 at 09:57

sundar rachnaa

  seema gupta

23 April 2010 at 09:59

बहुत अच्छी व्यंग्य रचना. हार्दिक बधाई
regards

  sangeeta swarup

23 April 2010 at 13:15

राजनीति पर बढ़िया कटाक्ष है...

  Ghanshyam

23 April 2010 at 13:21

Behatrin kataksha kiya hai Akanksha ji ne...congts.

  Bhanwar Singh

23 April 2010 at 15:19

खूब कही....नेता-अभिनेता एक समान..मजा आ गया.

  Ratnesh

23 April 2010 at 15:24

आकांक्षा जी का परिचय देखकर अभिभूत हूँ. इतनी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन और फिर ब्लॉग पर सक्रियता स्तुत्य है.

  Ratnesh

23 April 2010 at 15:26

और हाँ, आकांक्षा जी का व्यंग्य एकदम साधा हुआ है. सही जगह पर चोट करता है..साधुवाद.

  Rashmi Singh

23 April 2010 at 15:31

कभी आंतक, कभी नक्सलवाद
ये लेते सबकी जान
नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।
...बहुत समसामयिक व प्रासंगिक कटाक्ष...आकांक्षा यादव जी को शुभकामनायें.

  Ram Shiv Murti Yadav

23 April 2010 at 15:32

शानदार व्यंग्य रचना...बधाई.

  Akanksha~आकांक्षा

23 April 2010 at 15:39

वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में मेरी इस रचना के प्रकाशन लिए ताऊ जी का बहुत-बहुत आभार.

  Shahroz

23 April 2010 at 15:43

चिकनी चुपडी़ बातें करें
खूब करें अपना बखान
जनता का धन खूब लूटें
गायें मेरा भारत महान।
..बहुत खूब आकांक्षा जी, मन कर रहा है ताली बजाओं इतनी सुन्दर बात के लिए.

  Dr. Brajesh Swaroop

23 April 2010 at 15:48

आकांक्षा जी, आपके व्यंग्य व कटाक्ष के क्या कहने....लाजवाब !!

  Dr. Brajesh Swaroop

23 April 2010 at 15:49

एक बात और जोडूंगा अब नेता, अभिनेता के साथ क्रिकेटर भी तो जुड़ गए हैं. देखिये न IPL का कमाल.

  SR Bharti

23 April 2010 at 15:54

मन प्रफुल्लित हो गया यह रचना पढ़कर. आपने तो मानो पूरी जनता की आवाज़ को ही शब्द दे दिए हों-

मँहगाई, बेरोजगारी खूब फैले
नेताजी सोते चद्दर तान
खुद खाएं मुर्ग मुसल्लम
जनता भुखमरी से परेशान।

  ersymops

23 April 2010 at 15:59

गायें मेरा भारत महान।
...लेकिन बस अपने हित के लिए.

  ersymops

23 April 2010 at 15:59

गायें मेरा भारत महान।
...लेकिन बस अपने हित के लिए.

  KK Yadava

23 April 2010 at 16:01

लाजवाब व्यंग्य रचना...बेजोड़ कटाक्ष...सही बात !!

  शरद कुमार

23 April 2010 at 16:06

नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।

अपने दंतेवाडा की यादें ताजा कर दीं.बहुत सुन्दर व्यंग्य.

  Akanksha~आकांक्षा

23 April 2010 at 16:07

आप सभी का प्रोत्साहन व प्रतिक्रियाओं के लिए आभार. अपना स्नेह यूँ ही बनाये रहें.

  raghav

23 April 2010 at 16:11

बढ़िया व्यंग्य किया आज की व्यवस्था पर...

  अक्षिता (पाखी)

23 April 2010 at 16:13

अले यह तो मेरी मम्मी की रचना है...बढ़िया है.

  संजय भास्कर

23 April 2010 at 17:12

बहुत खूब आकांक्षा जी....एक दम सटीक हास्य व्यंग रचना..

  संजय भास्कर

23 April 2010 at 17:12

बहुत खूब आकांक्षा जी....एक दम सटीक हास्य व्यंग रचना..

  संजय भास्कर

23 April 2010 at 17:12

बहुत खूब आकांक्षा जी....एक दम सटीक हास्य व्यंग रचना..

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

23 April 2010 at 22:11

बहुत ही लाजवाब रचना है!
आकांक्षा जी को बहुत बधाई!

  डाकिया बाबू

24 April 2010 at 13:50

डाकिया बाबू की तरफ से भी इस सुन्दर व्यंग्य के लिए बधाई.

  अभिलाषा

24 April 2010 at 13:55

आकांक्षा जी, आपका जीवन परिचय स्वयं में आपकी विलक्षण रचनाधर्मिता का परिचायक है...शुभकामनायें.

  अभिलाषा

24 April 2010 at 13:57

बहुत सुन्दर व्यंग्य रचा आकांक्षा जी. कड़ा कटाक्ष, खरी बातें..बेहद पसंद आयीं.

  अभिलाषा

24 April 2010 at 14:01

सप्तरंगी प्रेम ब्लॉग पर हम प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटे रचनाओं को प्रस्तुत करेंगे. जो रचनाकार इसमें भागीदारी चाहते हैं, वे अपनी 2 मौलिक रचनाएँ, जीवन वृत्त, फोटोग्राफ भेज सकते हैं. रचनाएँ व जीवन वृत्त यूनिकोड फॉण्ट में ही हों.
रचनाएँ भेजने के लिए मेल- hindi.literature@yahoo.com

  इम्तियाज़ गाज़ी : गुफ्तगू

14 May 2010 at 12:47

कभी आंतक, कभी नक्सलवाद
ये लेते सबकी जान
नेताजी बस भाषण देते
शहीद होते जाबांज जवान।

...यही तो देखकर दुःख होता है. कब तक इन बातों को मजाक में उड़ाते रहेंगे.

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