वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री विजय कुमार सप्पत्ति

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,

हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर दिया है. जिसके अंतर्गत आप नित्य विभिन्न रचनाकारों की रचनाएं यहां पढ पा रहे हैं.

आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपना संक्षिप्त परिचय और ब्लाग लिंक प्रविष्टी के साथ अवश्य भेजे जिसे हम यहां आपकी रचना के साथ प्रकाशित कर सकें. इस प्रतियोगिता मे आप अपनी रचनाएं 30 अप्रेल 2010 तक contest@taau.in पर भिजवा सकते हैं.

आज श्री विजय कुमार सप्पत्ति की रचना पढिये.


लेखक परिचय : खुद लेखक के शब्दों में.
नाम : विजय कुमार सप्पत्ति
स्थान : FLAT NO.402, FIFTH FLOOR,
PRAMILA RESIDENCY; HOUSE NO. 36-110/402,
DEFENCE COLONY, SAINIKPURI
POST, SECUNDERABAD- 500 094 [A.P.]

Sr.GM- Marketing (हैद्राबाद) के पद पर कार्यरत हूं.

Mobile no : +91 9849746500
email ID : vksappatti@gmail.com

मैं कविताये लिखता हूँ और मेरा कविताओ का ब्लॉग भी है http://poemsofvijay.blogspot.com/ . मुझे कविताये लिखने का शौक है , तथा मैंने करीब २५० कवितायें, नज्में लिखी है .



दोस्तों ,ज़िन्दगी की आपाधापी में अगर आपको कुछ आनंद चाहिए तो इन्हे अवश्य आजमायें .और मुझे अवश्य बताये कि क्या ये great ideas कैसे है ?

[१] स्कूटर कि डिक्की में दो स्टील के ग्लास और एक थाली , थोड़ा सा सेव - चिवडा , एक पानी की bottle , और एक अपना मनपसंद पौव्वा ..... लेकर अपने अजीज दोस्त के साथ , शहर को बाहर जाती हुई सड़क पकड़ ले .. १५-२० KM जाने के बाद , मैदान और खेत दिखेंगे .. वहां भीतर चले जाएँ और दोनों दोस्त बैठकर " मित्रां दी मेला करे, तुम्बा तुम्बा दारु पिए , और झूम झूम भांगडा करें ............"

[२] दोस्तों के साथ बैठकर कंठ तक पिये , लडाई झगडा करें ,गाली गलोज करे.. और दूसरे दिन कहे.. " यार , साले ,कल कुछ ज्यादा हो गई थी . चल बे , आज फिर वही मिलते है रात को ......"

[३] दोस्त की शादी में " नाग - सपेरे " का और "पतंग बाज़ी " का dance करे [ पहले दो घूँट जरुर लगा ले ]

[ ४] गर्मी के दिनों में घर की छत पर या घर के आँगन में निवाड वाली खटिया डाले ,उस पर नरम चादर डाले , मच्छर अगरबत्ती जलाएं , portable radio on करें , विविधभारती में छायागीत लगाए, पुराने गाने सुनते सुनते सुहानी नींद में सो जाए...

[५] खुली वाली जीप में दोस्तों के साथ बैठे , खूब जोरो से music बजाये , ट्रैफिक वाले का चालान भरे .. २ km चुप चाप चले , फिर तेज़ music play करें , फिर चालान भरे .. फिर २ km चले , और देखे की कौन सा दोस्त पहले बोलता है की " यार जरा आवाज बढाओ बे ... " उसकी धुलाई कर दे ...

[ ६] सारे दोस्त मिलकर एक सिगरेट जला ले , बारी बारी कश ले ... जो दोस्त सिंगल कश में डबल कश ले , उसकी धुलाई कर दे...

[ ७] सारे दोस्त मिले और बैठकर , 10th class की कोई लड़की की याद करें और किसी दोस्त का नाम लेकर जोर से ठठाकर हँसे ...

[८ ] यूँ ही दोस्त मिलकर पागलो की तरह हँसे .. एक दूसरे के गंजे सर , बड़ी हुई तोंद और आते हुए बुढापा को लेकर भद्दे मजाक करे और हँसे ...

[९] कुछ दोस्त मिल जाएँ , एक सस्ता सा guitar और डफली ख़रीदे.. और एक beach पर जाएँ , वहां पर टॉवेल बिछाएं और काले चश्में पहन कर एक बाटली के साथ बैठ जाएँ .. [ बाटली की choices - पानी , कोल्ड ड्रिंक , देसी दारु, कच्ची दारु, महुए की दारु, व्हिस्की, रम , जिन, बियर, या इन सब का मिश्रण ] दो -तीन घूँट भीतर जाने के बाद आप ऐसा guitar और डफली बजायेंगे की बस पूछिए मत.. थोड़े देर के बार आस पास कुछ लोग जमा हो जाएँ तो एक दोस्त टोपी उलटी कर के सबसे पैसे मांग ले .. [ अब चूंकि वहां कोई आपको जानता नही है , इसलिए पैसे मांगने में कोई हर्ज़ नही है ] शाम को उन्ही पैसे से आपकी रात गुलज़ार हो जाएँगी .. दो चार दिन अलग अलग beches में ये आजमाते रहिये .. हो सकता है आपको कोई band या rock group अल्बम के लिए offer कर दे......

[१०] कुछ दोस्त मिल कर horror movie देखने जाएँ , रात का आखरी शो. !! जब भी भूत आयें तो सीट के नीचे मुंह डाल कर अजीब आवाजे निकाले , इस से आपका डर भाग जायेगा और बाकि दर्शको को और डर लगेंगा .

[ ११] कभी कभी साइकिल पर यूँ ही डोलते डोलते , नुक्कड़ तक चले जाईयें , वहां किसी ठेले पर खड़े हो कर कप और बस्सी में चाय पीजिये और ५ रुपये के समोसे खाईये और फिर साइकिल पर डोलते डोलते अपने घर आ जाईये ...

[ १२ ] तन्खवाह की तारीख के पाँचवे दिन , काम से लौटते हुए शहर के किसी अनजाने बार में अकेले चले जाईये , किसी कोने वाली मेज़-कुर्सी पर चले जाईये , वहां बैठकर पहले अपना मोबाइल switch off करें , जूतों को खोलिए .. , शर्ट की कुछ बटने खोल दीजिये , और सबसे बेहतरीन व्हिस्की को सोडे के साथ आर्डर करिए.. साथ में फिश फ्राय या काजू फ्राय मंगा लीजिये . और सिर्फ़ दो पैग पीजिये - दो घंटे में ... न ज्यादा न कम !!!!... और फिर गाने सुनते हुए घर आ जाईये ...

[ १३ ] किसी नदी या नहर के पास चले जाईये . किनारे बैठेये .अपना मोबाइल switch off करें , जूतों को खोलिए .. पैंट को घुटनों तक उठाकर , पैरों को पानी में डाल दीजिये , बहते पानी के साथ अपनी यादों को भी साथ ले आईये .. थोडी देर बाद , अपनी आँखों में ठहरे आंसुओं को पोछें फिर अपने घर चले आईये ..

[ १४ ] कभी कभी रातों को उठ कर किसी पुराने दोस्त को फ़ोन करिए

[ १५ ] स्कूल बस में बैठे बच्चो को देखकर हाथ हिलाएं

[ १६ ] जो कुछ भी आपको मिला है , उसमे ही खुशी ढूँढिये ....

[ १७ ] कुछ यादों को कभी भी नही भूले ..

[ १८ ] इस दुनिया में बहुत कम “अच्छा “ है , आप की जरुरत है इस दुनिया को .. कुछ अच्छा कर जाएँ ...

[ १९ ] ईश्वर को न भूले. उससे और अपने आप से अवश्य डरें ... क्योंकि अक्सर "circle of life " repeat होता है ..

[20 ] और अब ; अपने सारें दोस्तों को ये sms करें " तबियत ठीक नही लग रही थी ...एक तांत्रिक को दिखाया ..तांत्रिक बोला की , भूत का साया है , किसी घोर पापी को sms करों , ठीक हो जओंगे... !!! तुझे sms भेजा है , अब अच्छा महसूस कर रहा हूँ ....... "


May God bless you all.

जरुरी सूचना :-


सभी माननिय प्रतिभागी रचनाकारों को विनम्रता पूर्वक सूचित किया जाता है कि हमारे पास जिस क्रम में रचनाए आई हैं हम उन्हें उसी क्रम में छाप रहे हैं. जिनका भी सहमति पत्र मांगा गया है उनकी रचनाएं प्रतियोगिता में शामिल की गई हैं. जिनके सहमति पत्र आ चुके हैं उन सभी की रचनाएं क्रमवार प्रकाशित की जारही हैं. अभी प्रतिभागी रचनाकारों की सिर्फ़ प्रथम रचना ही छापी जा रही हैं. जिनकी एक से ज्यादा रचनाएं आई हैं उनका प्रकाशन अगले दौर में किया जायेगा.

इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तिथी ३० अप्रेल २०१० है. आपसे निवेदन है कि अपनी रचनाएं निर्धारित तिथी के पुर्व ही भिजवाने की कृपा करें. ३० अप्रेल २०१० के बाद आई हुई रचनाएं स्वीकार नही की जायेंगी.

- वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता कमेटी

7 comments:

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

24 April 2010 at 06:44

"वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री विजय कुमार सप्पत्ति" की पोस्ट बहुत बढ़िया रही!
बहुत-बहुत बधाई!

  श्यामल सुमन

24 April 2010 at 06:49

अच्छा उपाय बताया है आपने विजय भाई।
आपको इस सम्मान के लिए बहुत बधाई।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

  विनोद कुमार पांडेय

24 April 2010 at 07:57

विजय जी बहुत बढ़िया मजेदार रचना...वैशाखनंदन प्रतियोगिता के लिए हार्दिक बधाई..

  P.N. Subramanian

24 April 2010 at 08:23

इन नुस्खों के लिए आभार.

  कविता रावत

24 April 2010 at 08:26

विजय कुमार सप्पत्ति ji se parichay karane aur unki baare mein dher saari jaankari prapt hone par Vijay Kumar ji ko aur ताऊजी डॉट कॉम ko bahut haardik shubhkaamnayne..
Aapka yah prayas sarahaniya aur prashasniya hai....

  Vijay Kumar Sappatti

24 April 2010 at 16:14

sir ;
mai dil se aapka aabhaari hoon ki aapne meri rachna ko publish kiya , aapko aur sabhi paathako ko zindagi ki shubkaamnaaye....

aapka
vijay
09849746500

  दीपक 'मशाल'

26 April 2010 at 05:21

Kabhi aazmaaunga aapke nuskhe.. bahut sundar :)

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