वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री विवेक रस्तोगी

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,

हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर दिया है. जिसके अंतर्गत आप नित्य विभिन्न रचनाकारों की रचनाएं यहां पढ पा रहे हैं.

आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपना संक्षिप्त परिचय और ब्लाग लिंक प्रविष्टी के साथ अवश्य भेजे जिसे हम यहां आपकी रचना के साथ प्रकाशित कर सकें. इस प्रतियोगिता मे आप अपनी रचनाएं 30 अप्रेल 2010 तक contest@taau.in पर भिजवा सकते हैं.

आज श्री विवेक रस्तोगी की रचना पढिये.

लेखक परिचय :
नाम : विवेक रस्तोगी
पेशे से बैंकिग क्षैत्र में तकनीकी विशेषज्ञ हूँ,
और अपने अंदर के कवि को ढूँढ़ रहा हूँ,
शब्दों को गढ़ता रहता हूँ जब कभी शब्द मुखर हो उठते हैं,
लिख देता हूँ।
ब्लाग : कल्पनाओं का वृक्ष


नये और अशिक्षित कम्पयूटर उपयोगकर्ताओं के कारनामे

नये और अशिक्षित (so called trained computer operateor) कम्पयूटर उपयोगकर्ता क्या कारनामे करते हैं, उन्हें क्या कहो और वो क्या करते हैं । उसकी कुछ बानगियाँ आपके सामने प्रस्तुत करता हूँ |

ये की तो कीबोर्ड पर मिलती ही नहीं है।
एक महाशय का फोन आया कि विवेक भाई एक की तो कीबोर्ड पर मिलती ही नहीं है कम से कम दसियों बार कीबोर्ड देख चुका हूँ और आपका साफ्टवेयर आदेश कर रहा है कि वही की दबानी है, मैंने उनसे पूछा सर बताओ तो सही कि कौन सी की दबाने का आदेश आपको मेरा साफ्टवेयर दे रहा है, तब वो महाशय बोले "प्रेस एनी की टू कन्टीनयू" "Press any key to continue"।

माऊस का उपयोग
एक नये क्लाईंट ने हमारा साफ्टवेयर उपयोग करना शुरु किया हमारी टीम ने पूरे स्टाफ को साफ्टवेयर उपयोग करने संबंधित जानकारी दी और उसके बाद केवल फोन पर तकनीकी सहयोग देते हैं एक बार हमारे पास फोन आया कि फाईल सेव हो गई है अब उसे देखेंगे कैसे, तो हमने उनसे कहा कि सर् "माई कम्प्यूटर" ( My Computer) पर माऊस ले जाकर डबल क्लिक करें, वो बोले ठीक है फिर
उसके बाद, हमने कहा पहले क्लिक तो कीजिये और बताइये स्क्रीन पर क्या दिख रहा है तो वो बोले कि बस एक मिनिट ...... और हम उनके एक मिनिट का इंतजार करने लगे जब पाँच मिनिट से ऊपर हो गये तो हमने पूछा क्या हुआ, तो जबाब आया ये "माई कम्प्यूटर" ( My Computer) कहाँ मिलेगा, हमने कहा सामने डेस्कटाप पर उल्टे हाथ की तरफ मिलेगा तो वे बोले ह‍ मिल गया हमने कहा अब डबल क्लिक करें वे बोले ठीक हैं फिर १ मिनिट २ मिनिट ... ६ मिनिट हो गये तो फिर हमने पूछा अब क्या हुआ, उनका जबाब आया "कुछ हो नहीं रहा है" हमने कहा ऐसा तो हो ही नहीं सकता वो बोले नहीं नहीं वाकई में कुछ नहीं हो रहा है। फिर हमने पूछा आपने क्या करा बोले जैसा आपने कहा "माई कम्प्यूटर" ( My Computer) पर माऊस ले जाकर डबल क्लिक करें" तो हम परेशान कि ऐसा कैसे हो सकता है मैने पूछा माऊस कहाँ रखा है वो बोले स्क्रीन पर डेस्कटाप पर "माई कम्प्यूटर" ( My Computer) के ऊपर रख कर क्लिक कर रहा हूँ।...... हा हा हा हा हा हा ...

जरा बाहर आकर अंदर जाइये
हमारे पास फोन आया कि कुछ समस्या हो गई है हमारे सोफ्टवेयर में तो सामान्यत:हम कहते हैं कि कृपया बाहर आकर अंदर जाइये इसका मतलब होता है कि लाँग आउट होकर लोगिन करें यही समाधान हमने दे दिया पर हमारे वो ग्यानवान यूजर कर ही नहीं पा रहे, हम भी परेशान कि बाहर आकर अंदर नहीं जा पा रहे हैं क्या बात है, तब हमारे सब्र का बाँध टूटा ओर हम खुद ही पहँच गये व कहा अब हमारे सामने जरा बाहर आकर अंदर जाइये तो भाई लोगों मेरे को चक्कर आने लगे क्योंकि वो साहब मेन गेट के शटर से बाहर जाकर अंदर आये और बोले देखो अब भी नहीं हो रहा है !!!

४ ही तो दबा रहा हूँ

एक दिन फोन आया कि विवेक भाई आपके साफ्टवेयर में एक अकाउँट की इनक्वायरी करनी है पर कुछ समस्या आ रही है, हमने कहा तो हम जैसा बताते हैं वैसा आप करते जाइये, हम बताते गये वो करते गये बस एक जगह अटक गये, हम कह रहे थे कि ४ दबाओ (Press 4) और वो कहते हाँ दबा दिया पर कुछ हो नहीं रहा जब १५ ‍- २० मिनिट हो गये तो हमने पूछा कि सर एक बात बताओ ये बारबार मुझे फोन पर बटन दबाने की आवाज आ रही है ये कैसे आ रही है क्या कोई रिडायल कर रहा है, वो बड़ी मासूमियत से बोले आप ही तो कह रहे हैं कि ४ दबाओ ....................... ::

जरुरी सूचना :-

सभी माननिय प्रतिभागी रचनाकारों को विनम्रता पूर्वक सूचित किया जाता है कि हमारे पास जिस क्रम में रचनाए आई हैं हम उन्हें उसी क्रम में छाप रहे हैं. जिनका भी सहमति पत्र मांगा गया है उनकी रचनाएं प्रतियोगिता में शामिल की गई हैं. जिनके सहमति पत्र आ चुके हैं उन सभी की रचनाएं क्रमवार प्रकाशित की जारही हैं. अभी प्रतिभागी रचनाकारों की सिर्फ़ प्रथम रचना ही छापी जा रही हैं. जिनकी एक से ज्यादा रचनाएं आई हैं उनका प्रकाशन अगले दौर में किया जायेगा.

इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तिथी ३० अप्रेल २०१० है. आपसे निवेदन है कि अपनी रचनाएं निर्धारित तिथी के पुर्व ही भिजवाने की कृपा करें. ३० अप्रेल २०१० के बाद आई हुई रचनाएं स्वीकार नही की जायेंगी.

- वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता कमेटी

8 comments:

  वाणी गीत

22 April 2010 at 05:54

कम्प्यूटर ज्ञान की कक्षा रोचक है ...बहुत प्रतिभाशाली शिष्य हैं ...!!

  Udan Tashtari

22 April 2010 at 06:57

बहुत बढ़िया....विवेक रस्तोगी जी का वैशाखनंन्दन सम्मान प्रतियोगिता में हार्दिक स्वागत एवं बधाई.

  ललित शर्मा

22 April 2010 at 07:13

विवेक जी बहुत बढि्या।
आभार

  विनोद कुमार पांडेय

22 April 2010 at 07:57

विवेक जी नये नये लोग और जो कंप्यूटर के बारे में बिल्कुल अज्ञान है ऐसे कारनामें कर बैठते है..आपने बढ़िया वाक़या ढूढ़ निकाला ...मजेदार व्यंग...बधाई

  rashmi ravija

22 April 2010 at 15:39

बड़े अच्छे ढंग से लिखा.....बहुत ही मजेदार व्यंग...

  अविनाश वाचस्पति

22 April 2010 at 23:10

विवेक जी से सही पकड़ा है। अब नौसिखियों यानी हमारी खैर नहीं। खबर लेते रहना।

  sangeeta swarup

23 April 2010 at 13:26

हा हा हा....बहुत बढ़िया...क्लास अच्छी लगी...खास तौर पर ऐनी की वाली और बाहर जा कर अंदर आने वाली...

  दीपक 'मशाल'

26 April 2010 at 05:27

ye bhi khoob rahi.. :) badhai Vivek ji

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