वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री तेज प्रताप सिंह

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,

हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर दिया है. जिसके अंतर्गत आप नित्य विभिन्न रचनाकारों की रचनाएं यहां पढ पा रहे हैं.

आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपना संक्षिप्त परिचय और ब्लाग लिंक प्रविष्टी के साथ अवश्य भेजे जिसे हम यहां आपकी रचना के साथ प्रकाशित कर सकें. इस प्रतियोगिता मे आप अपनी रचनाएं 30 अप्रेल 2010 तक contest@taau.in पर भिजवा सकते हैं. अब एक सप्ताह से भी कम समय बचा है.

आज श्री तेज प्रताप सिंह की रचना पढिये.

लेखक परिचय
नाम-तेज प्रताप सिंह
शिक्षा-एम एस सी (जैवरसायन), पी एच डी (मोलीकुलर मेडिसिन, ऑस्ट्रिया; जारी)
निवास-गोंडा, उत्तर प्रदेश
ब्लाग : साहित्य योग

साहित्य में बचपन से ही लगाव रहा है। पहली रचना "समाज का दाग" मैंने उस समय लिखी जब मैं १० वीं का छात्र था। मेरा मानना है लिखने के लिए शब्द नहीं बल्कि भावना की जरुरत होती है.


शौचालय का दर्द

एक दिन शौचालय भी हंस कर बोल पड़ा

मैं तो एक हूँ पर लोग क्यों अनेक हैं

किसी का मोटा, किसी का पतला

कोई गोरा तो कोई काला................

सब अपनी तशरीफ़ रखते हैं

खुद तो पकवान खाते हैं

मुझे सडा-गला बचा हुआ खिलाते हैं

हर दिन कुछ नया मिलता है

कभी सानिया-मलिक के निकाह

के खाने की खुसबू मिलती .......

तो कभी आयशा सिद्दीक़ी के

तलाक के बाद का लिया गया निवाला

राजनीतिक खुसबू की तो बात ही निराली

संसद के अन्दर-बाहर जितनी भी रोटियां पकती

देर-सबेर हमें उसकी खुसबू मिल ही जाती

राहुल और माया के तशरीफ़ का स्वाद भी मिलता

पर दलित तडके के कारण एक जैसा ही लगता

फ़िल्मी सितारों की महक आज-कल थोडा सड़ी है

क्योंकि आईपीएल से बॉक्स ऑफिस की हवा उडी है

बाबा राम देव ने लगता है कुछ खाया नहीं

योग शक्ति के डर से कुछ भी बाहर आया नहीं

शशि थरूर ना अपना हाजमा खुद खराब किया

जो बिना हाजमोले के मोदी से दो-दो हाथ किया

अमर तो लखनऊ में मेरा दरवाजा ही खोलना भूल गए

दिल्ली में रहते हैं हमेशा जमें जबसे मुलायम से दूर गए

राज ठाकरे जब कभी मौसम बे मौसम आते हैं

तो हमेशा मराठी मानुस की याद दिलाते हैं

कवी महोदय तो अब आते नहीं

लगता है वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के

चक्कर में कुछ खाते नहीं......

जरुरी सूचना :-


सभी माननिय प्रतिभागी रचनाकारों को विनम्रता पूर्वक सूचित किया जाता है कि हमारे पास जिस क्रम में रचनाए आई हैं हम उन्हें उसी क्रम में छाप रहे हैं. जिनका भी सहमति पत्र मांगा गया है उनकी रचनाएं प्रतियोगिता में शामिल की गई हैं. जिनके सहमति पत्र आ चुके हैं उन सभी की रचनाएं क्रमवार प्रकाशित की जारही हैं. अभी प्रतिभागी रचनाकारों की सिर्फ़ प्रथम रचना ही छापी जा रही हैं. जिनकी एक से ज्यादा रचनाएं आई हैं उनका प्रकाशन अगले दौर में किया जायेगा.

इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तिथी ३० अप्रेल २०१० है. आपसे निवेदन है कि अपनी रचनाएं निर्धारित तिथी के पुर्व ही भिजवाने की कृपा करें. ३० अप्रेल २०१० के बाद आई हुई रचनाएं स्वीकार नही की जायेंगी.

- वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता कमेटी

7 comments:

  दीपक 'मशाल'

26 April 2010 at 05:06

swagat hai Tej... badhai ho Tej.. vyangya par bhi qalam chalai tumne.

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

26 April 2010 at 06:33

तेजप्रताप सिंह जी को बहुत बहुत बधाई!

  Udan Tashtari

26 April 2010 at 06:52

वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में तेज प्रताप सिंग जी का स्वागत और बधाई.

  स्वप्निल कुमार 'आतिश'

26 April 2010 at 07:26

मेरा मानना है लिखने के लिए शब्द नहीं बल्कि भावना की जरुरत होती है.


acchhi bhavnayen umdi aapke mann me...

  विनोद कुमार पांडेय

26 April 2010 at 08:20

क्या बात है भाई....बढ़िया अंदाज ..शौचालय की पीड़ा जायज़ है....बधाई

  ललित शर्मा

26 April 2010 at 08:41

बधाई-बहुत बहुत शुभकामनाएं

  Tej Pratap Singh

26 April 2010 at 16:22

vaiskahnandan team ka dhanywaad

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