वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री निलेश माथुर

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,

हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर दिया है. जिसके अंतर्गत आप नित्य विभिन्न रचनाकारों की रचनाएं यहां पढ पा रहे हैं.

आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपना संक्षिप्त परिचय और ब्लाग लिंक प्रविष्टी के साथ अवश्य भेजे जिसे हम यहां आपकी रचना के साथ प्रकाशित कर सकें. इस प्रतियोगिता मे आप अपनी रचनाएं 30 अप्रेल 2010 तक contest@taau.in पर भिजवा सकते हैं.

आज श्री निलेश माथुर की रचना पढिये.

लेखक
परिचय -
नाम- निलेश माथुर
पेशा - व्यवसाय
मूल रूप से बीकानेर, राजस्थान का रहने वाला हूँ, अब गुवाहाटी, असम में रहता हूँ , पढने का बहुत शौक है साथ ही थोडा बहुत लिख भी लेता हूँ, पत्र पत्रिकाओं में अक्सर मेरी कविताएँ प्रकाशित होती हैं!


शीर्षक- श्री मति जी

एक बार हमने
अपनी श्री मति जी के
रौद्र रूप पर
चार लाइनें लिख दी,
और बिना परिणाम सोचे
श्री मति जी को सुना दी
श्री मति जी ने सुनते ही
रौद्र रूप धारण किया
उसके बाद हम पिट रहे थे
और हमारे पडौसी
छत पर खड़े होकर
मुफ्त का मज़ा लूट रहे थे,
हमने पिटते हुए ही
हाथ जोड़कर क्षमा याचना की
और उनसे
पिटाई बंद करने का
नम्र निवेदन किया,
तब जाकर उन्होंने
हमारी पिटाई बंद की और कहा .....
माना की तुम
सड़े से कवि हो
पर ये क्यों भूलते हो
कि किसके पति हो
फिर ये जुर्रत की
तो कान के नीचे एक लगाऊँगी
और तुम्हारा कविता का भूत भगाऊंगी !

जरुरी सूचना :-


सभी माननिय प्रतिभागी रचनाकारों को विनम्रता पूर्वक सूचित किया जाता है कि हमारे पास जिस क्रम में रचनाए आई हैं हम उन्हें उसी क्रम में छाप रहे हैं. जिनका भी सहमति पत्र मांगा गया है उनकी रचनाएं प्रतियोगिता में शामिल की गई हैं. जिनके सहमति पत्र आ चुके हैं उन सभी की रचनाएं क्रमवार प्रकाशित की जारही हैं. अभी प्रतिभागी रचनाकारों की सिर्फ़ प्रथम रचना ही छापी जा रही हैं. जिनकी एक से ज्यादा रचनाएं आई हैं उनका प्रकाशन अगले दौर में किया जायेगा.

इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तिथी ३० अप्रेल २०१० है. आपसे निवेदन है कि अपनी रचनाएं निर्धारित तिथी के पुर्व ही भिजवाने की कृपा करें. ३० अप्रेल २०१० के बाद आई हुई रचनाएं स्वीकार नही की जायेंगी.

- वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता कमेटी

8 comments:

  Udan Tashtari

27 April 2010 at 06:25

हा हा!! बहुत मजेदार!!

भाई निलेश माथुर जी का स्वागत है वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में.

इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई.

  ललित शर्मा

27 April 2010 at 06:54

बहुत बढिया व्यंग्य कविता
कवि बनने से पहले यह भी ध्यान रखना जरुरी है।

आभार

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

27 April 2010 at 07:11

नीलेश माथुर जी की रचना बहुत सुन्दर है!

  विनोद कुमार पांडेय

27 April 2010 at 08:59

बहुत मजेदार कविता!!!

निलेश जी,बेहतरीन रचना के लिए आभार!! बधाई.

  अन्तर सोहिल

27 April 2010 at 11:30

निलेश जी लगता है अभी तक भूत उतरा नही है :-)

बढिया रचना पढवाने के लिये आभार

  sangeeta swarup

27 April 2010 at 11:30

पर जो पंक्तियाँ आपने लिखीं वो क्या थीं????????

अच्छा व्यंग

  दीपक 'मशाल'

27 April 2010 at 13:18

behatreen vyangya kavita likhi... swagat hai Neelesh ji.i

  Tej Pratap Singh

27 April 2010 at 18:01

निलेश माथुर जी का स्वागत है

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