वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री राजेंद्र स्वर्णकार

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,

हमें वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिये निरंतर बहुत से मित्रों की प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. जिनकी भी रचनाएं शामिल की गई हैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है. ताऊजी डाट काम पर हमने प्रतियोगिता में शामिल रचनाओं का प्रकाशन शुरु कर दिया है. जिसके अंतर्गत आप नित्य विभिन्न रचनाकारों की रचनाएं यहां पढ पा रहे हैं.

आपसे एक विनम्र निवेदन है कि आप अपना संक्षिप्त परिचय और ब्लाग लिंक प्रविष्टी के साथ अवश्य भेजे जिसे हम यहां आपकी रचना के साथ प्रकाशित कर सकें. इस प्रतियोगिता मे आप अपनी रचनाएं 30 अप्रेल 2010 तक contest@taau.in पर भिजवा सकते हैं. अब एक सप्ताह से भी कम समय बचा है.

आज श्री राजेन्द्र स्वर्णकार की रचना पढिये.

लेखक परिचय
नाम : राजेन्द्र स्वर्णकार
जन्म : 21 सितंबर
पिता का नाम : स्वर्गीय श्री शंकरलालजी
माता का नाम : श्रीमती भंवरीदेवी
स्थायी पता : गिराणी सोनारों का मौहल्ला ,
बीकानेर 334001 ( राजस्थान )
मोबाइल नं : 9314682626
फोन नं : 0151 2203369
ईमेल : swarnkarrajendra@gmail.com
ब्लॉग : http://shabdswarrang.blogspot.com
सृजन :
--- काव्य की सभी विधाओं , रंगों-रसों में
राजस्थानी, हिंदी और उर्दू में ( ब्रज, भोजपुरी और अंग्रेजी में भी ) मुख्यतः छंदबद्ध काव्य- सृजन
--- लगभग ढाई हज़ार से अधिक गीत, ग़ज़ल, नवगीत , कवित्त, सवैयों, कुंडलियों सहित दोहों, सोरठों, कविताओं का सृजन…
सरस्वती की अनवरत कृपा
--- लगभग ढाईसौ से भी अधिक स्वयं की मौलिक धुनों का निर्माण
--- मंच के मीठे गीतकार और लोकप्रिय ग़ज़लकार के रूप में लगभग चालीस शहरों, कस्बों, गावों में
कवि सम्मेलन, मुशायरों में ससम्मान काव्यपाठ
--- आकाशवाणी से भी निरंतर रचनाओं का प्रसारण
--- देश भर में लगभग सवा सौ पत्र-पत्रिकाओं में एक हज़ार से अधिक रचनाएं ससम्मान प्रकाशित
--- अनेक महत्वपूर्ण संकलनों में परिचय और रचनाएं संकलित
--- गीत ग़ज़ल के शीर्षस्थ हस्ताक्षरों द्वारा मेरे कृतित्व की प्रशंसा
--- अब तक दो पुस्तकें प्रकाशित
1 रूई मांयी सूई { राजस्थानी ग़ज़ल संग्रह/ प्रकाशन वर्ष 2002 }
2 आईनों में देखिए { हिंदी ग़ज़ल संग्रह/ प्रकाशन वर्ष 2004 }
--- राजस्थानी भाषा में दो पद्य नाटकों सहित, राजस्थानी और हिंदी में दो-दो ग़ज़ल संग्रह और गीत-नवगीत संग्रह, दोहा संग्रह और बाल कविता संग्रह प्रकाशनार्थ तैयार
--- स्वयं के गीत ग़ज़ल , स्वयं की धुन, स्वयं के स्वर में ध्वन्यांकन का वृहद् विराट कार्य प्रगति पर
--- चित्रकारी, रंगकर्म, संगीत, गायन और मीनाकारी में भी श्रेष्ठ कार्य
--- DXing और Short Wave Listening करते हुए अनेक देशों से निबंध लेखन, संगीत, चित्रकला और सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं में लगभग सौ बार पुरस्कृत होकर बीकानेर और समूचे राजस्थान के यश, मान और गौरव वृद्धि में तुच्छ सहयोग
/ डॉयट्शे वैले पर दो बार मेरे निबंध एशिया में प्रथम स्थान पर रहे
/ एक बार चीनी दूतावास, नई दिल्ली में CRI China द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित किया गया
--- अभी सफ़र जारी है …

ग़za

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बड़ा confuse करते हैं

मेरे talent से impressed , मुझको choose करते हैं

familiar वो मेरे होकर , मुझे misuse करते हैं

mother मेरी , मेरे favour में sympathy रखेगी क्या

करें continuous drama , बड़ा confuse करते हैं

बढ़ूं मैं selfconfidence , willpower से आगे ; तब

मेरी राहों के candle - bulb सारे , fuse करते हैं

मिलाते poison ... daily , वो मेरी चाय - कॉफ़ी में

उन्हें बदले में something दूं , तो motion loose करते हैं

करें certainly वादाख़िलाफ़ी , fraud वो मुझसे

दिखा' पाज़ेब , देते वक़्त आगे shoes करते हैं

करूं adjust , bye god ... anyhow मैं उनसे

वो कब honestly राजेन्द्र , why - whose करते हैं

राजेन्द्र स्वर्णकार

7 comments:

  Udan Tashtari

29 April 2010 at 06:04

वाह वाह!! बहुत बढ़िया प्रयोग...मजेदार.

राजेन्द्र स्वर्णकार जी का स्वागत है प्रतियोगिता में और इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई.

  दीपक 'मशाल'

29 April 2010 at 07:54

Most Welcome ji Rajendra ji aapka.. :)
allrounder performance ke bare me jaan achchha laga..
shubhkaamnayen.

  श्यामल सुमन

29 April 2010 at 08:05

इस सम्मान के लिए बधाई। बहुत खूब लिखा है आपने। लीजिए मैं भी कुछ जोड़ दूँ -

करें बातें वो height की जहाँ stage पर होते
कहूँ जब truth उनको तो वे abuse करते हैं

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

  विनोद कुमार पांडेय

29 April 2010 at 08:52

वाह..हिन्दी और अँग्रेज़ी दोनों भाषाओं के शब्द लेकर खूब हंसाया..बढ़िया रचना..धन्यवाद राजेंद्र जी

  Akanksha~आकांक्षा

29 April 2010 at 12:57

कुछ जुदा ही अंदाज है ...पसंद आई ये रचना.

  अल्पना वर्मा

30 April 2010 at 01:46

कुछ हट कर लगी यह शैली !
बहुत बढ़िया है!

  Rajendra Swarnkar

1 May 2010 at 17:41

ताऊजी ,
आपने तो सूचना मेल ही नहीं किया !
मुझे आज अचानक पता चला कि
"वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री राजेंद्र स्वर्णकार"
का प्रदर्शन 29 अप्रैल 2010 को हो चुका ।
धन्यवाद !
विलंब से ही सही …
उड़न तश्तरी समीरजी,दीपक'मशाल'जी ,
श्यामल सुमनजी , विनोद कुमार पांडेयजी , आकांक्षा जी और अल्पना वर्माजी को
मेरा हार्दिक धन्यवाद !
रचना
"मेरे talent से impressed , मुझको choose करते हैं
familiar वो मेरे होकर , मुझे misuse करते हैं"
पसंद करने के लिए !
आपको मेरा निमंत्रण है …कृपया ,शस्वरं पर पधारें !
यह है लिंक -
http://shabdswarrang.blogspot.com

और देखें नई पोस्ट के साथ पुरानी पोस्ट भी , मेरे स्वर में मेरी कुछ रचनाएं भी हैं ।
सधन्यवाद - राजेन्द्र स्वर्णकार

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