वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : सुश्री वाणी शर्मा

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में सुश्री वाणी शर्मा की रचना पढिये.

लेखिका परिचय ....
नाम : वाणी शर्मा
शिक्षा : एम . ए .(इतिहास ), एम . ए प्रिविअस (हिंदी )
साधारण गृहिणी ...पढने का अत्यधिक शौक और कभी कभी लिख लेने का प्रयास हिंदी ब्लोगिंग तक ले आया है ...
ब्लाग : ज्ञानवाणी


व्यक्ति के चार प्रकार ...

संता और बंता ने व्यक्तित्व निर्माण के लिए विशेष कक्षा में प्रवेश लिया ...

पहले ही दिन उपदेशक ने उन्हें पढाया ....

" व्यक्तित्व विकास की इस कक्षा में आपका स्वागत है ...मैं आशा करता हूँ कि मेरे अनुभव और ज्ञान से आपलोगलाभान्वित होंगे ...आईये ...सबसे पहले हम जानते हैं व्यक्तित्व के बारे में....व्यक्तित्व क्या होता है ...हर इंसान अपनेव्यवहार , आचार , विचार से एक विशिष्ट व्यक्ति होता है ...हर इंसान के अपने आपको अभिव्यक्त करने का तरीका होताहै और इसी से उसका व्यक्तित्व उजागर होता है ...मगर सबसे पहले हम जान ले कि व्यक्ति कितने प्रकार के होते हैं" ......
व्यक्ति चार प्रकार के होते हैं ....

1..... वे जो अपना भला चाहते हैं मगर इसके लिए दूसरे को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते ...

2.... वे जो तब तक दूसरों का भला करते हैं जब तक कि दूसरा उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाए ...

3.... वे जो अपने फायदे के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं ....

4.... वे जो बिना किसी अपने फायदे के दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं ...

अब आप मुझे इन चारों प्रकार के व्यक्तियों के उदहारण दे ....

संता सर खुजाता हुआ खड़ा हुआ ...." सर जी , पहला उदहारण तो मेरा ही ले लो ....मैं अपने फायदे के लिए किसी कोनुकसान नहीं पहुंचाता " ...

अच्छा बंता ...अब तुम बताओं ...." उपदेशक ने पूछा ...

बंता भी अपनी सीट से उठा ..." सर जी , दूसरा उदहारण तो जी आप मुझे ही जान लो , जब तक कोई मुझे परेशाननहीं करता .... तब तक मैं भी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता "...

अब फिर से संता की बारी आयी ...." जी , सर जी , आप तो सब जानते ही हो जी ...मेरा भाई ....जालिम सिंह.....जहाँ उसको अपना फायदा नजर जाता है ....तो दूसरों को परेशान करने में पीछे नहीं हटता " ...

अब बारी आयी चौथे उदहारण की ....उपदेशक ने कहा कि तुम दोनों साथ मिल कर इसका एक उदहारण पेश करो ....
दोनों एक साथ बोल पड़े ...." लो जी , ये कौन सी मुश्किल है ....वे जो बिना अपने किसी फायदे को दूसरों को तकलीफपहुंचाते है ...वो तो हैं जी......हिंदी ब्लॉगर (पुरुष/महिला )..."

उपदेशक बहुत प्रसन्न हुआ ...जब तुम व्यक्तित्व के बारे में इतना कुछ जानते हो तुम्हे और प्रशिक्षण की जरुरत नहीं...जाओ और दूसरों को प्रशिक्षित करो ....


तारी 9 मई 2010

9 comments:

  Mithilesh dubey

9 May 2010 at 16:52

ab tak to enko padhte aaye the pahli bar enko dekha hai accha laga

  'अदा'

9 May 2010 at 16:54

वाणी को बहुत बहुत बधाई...बहुत ख़ुशी हुई उसकी रचना देख कर ....
मैं तो वैसे भी वाणी कि रचनाओं को बहुत मन से पढ़ती हूँ..
फिर एक बार उसे बधाई..और आपका आभार...

  M VERMA

9 May 2010 at 17:07

सटीक
बहुत मजेदार

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

9 May 2010 at 17:17

आपकी रचना बहुत सुन्दर है!

मातृ-दिवस पर
ममतामयी माँ को प्रणाम तथा कोटि-कोटि नमन!

  ललित शर्मा

9 May 2010 at 18:09

बहुत बढिया रचना
आभार

  अजय कुमार

9 May 2010 at 18:33

सटीक और शानदार रचना ।

  विनोद कुमार पांडेय

9 May 2010 at 22:13

बधाई वीणा जी...सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई

  sangeeta swarup

9 May 2010 at 22:24

बढ़िया व्यंग....:):)

संत बनता तो काफी अक्लमंद निकले

  Ratan Singh Shekhawat

10 May 2010 at 07:29

बहुत मजेदार

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