वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : डा, रुपचंद्र शाश्त्री "मयंक"

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में डा.रुपचंद्र शाश्त्री "मयंक, की रचना पढिये.


डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
जन्म- 4 फरवरी, 1951 (नजीबाबाद-उत्तरप्रदेश)
1975 से खटीमा (उत्तराखण्ड) में स्थायी निवास।
राजनीति- काँग्रेस सेवादल से राजनीति में कदम रखा।
केवल काँग्रेस से जुड़ाव रहा और नगर से लेकर
जिला तथा प्रदेश के विभिन्न पदों पर कार्य किया।
शिक्षा
- एम.ए.(हिन्दी-संस्कृत)
तकनीकी शिक्षाः आयुर्वेद स्नातक
सदस्य
- अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग,उत्तराखंड सरकार,
(सन् 2005 से 2008 तक)
उच्चारण पत्रिका का सम्पादन
(सन् 1996 से 2004 तक)
साहित्यिक अभिरुचियाँ-
1965 से लिखना प्रारम्भ किया जो आज तक जारी है।
व्यवसाय- समस्त वात-रोगों की आयुर्वेदिक पद्धति से चिकित्सा करता हूँ।
1984 से खटीमा में निजी विद्यालय का संचालक/प्रबन्धक हूँ।
फोन/फैक्स: 05943-250207
मोबाइल: 0936849921, 09997996437, 09456383898 

इन्साफ की डगर पर, नेता नही चलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।
दिल में घुसा हुआ है,
दल-दल दलों का जमघट।
संसद में फिल्म जैसा,
होता है खूब झंझट।
फिर रात-रात भर में, आपस में गुल खिलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफा उस ओर जा मिलेंगे।।
गुस्सा व प्यार इनका,
केवल दिखावटी है।
और देश-प्रेम इनका,
बिल्कुल बनावटी है।
बदमाश, माफिया सब इनके ही घर पलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।
खादी की केंचुली में,
रिश्वत भरा हुआ मन।
देंगे वहीं मदद ये,
होगा जहाँ कमीशन।
दिन-रात कोठियों में, घी के दिये जलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफा, उस ओर जा मिलेंगे।।



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डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"
टनकपुर रोड, खटीमा,
ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड, भारत - 262308.
फोनः05943-250207, 09368499921
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10 comments:

  रज़िया "राज़"

5 May 2010 at 17:28

बधाइ हो। बधाइ। अगर यही हाल रहा तो फ़िर तो देश हमारा?

बेचारा।

  वन्दना अवस्थी दुबे

5 May 2010 at 17:34

शास्त्री जी को बहुत-बहुत बधाई वैशाखनन्दन सम्मान के लिये.

  Sonal Rastogi

5 May 2010 at 17:35

सही है शास्त्री जी .... IPL में भी मुनाफा देखकर घुसे थे ये लोग

  sangeeta swarup

5 May 2010 at 18:34

राजनेताओं पर बहुत करारा व्यंग....अच्छी प्रस्तुति

  SAMVEDANA KE SWAR

5 May 2010 at 18:56

सत्य वचन !

  M VERMA

5 May 2010 at 19:08

बहुत अच्छी व्यंग्य रचना
बधाई शास्त्री जी को

  shikha varshney

5 May 2010 at 19:41

वाह गजब कि प्रभावशाली रचना है

  MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर

6 May 2010 at 00:34

बधाई

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

6 May 2010 at 02:03

बहुत बढिया व्यंग्य रचना!!
बधाई शास्त्री जी!

  Pavitra_Hyd

6 May 2010 at 16:37

netao par achcha vyang hai .

pavitra

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