वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री डी.के.शर्मा "वत्स"

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में प. डी.के. शर्मा "वत्स", की रचना पढिये.


लेखक परिचय :-
नाम:- पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
जन्म:- 24/8/1974 (जगाधरी,हरियाणा)
स्थायी निवास:- लुधियाना(पंजाब)
शिक्षा:- एम.ए.--(संस्कृ्त), ज्योतिष आचार्य
कईं वर्षों पूर्व ज्योतिष आधारित विभिन्न पत्र,पत्रिकाओं हेतु लिखना प्रारंभ किया, जो कि आज तक बदस्तूर जारी है। लगभग सभी पत्रिकाओं में ज्योतिष एवं वैदिक ज्ञान-विज्ञान आधारित लेख नियमित रूप से प्रकाशित हो रहे हैं।
व्यवसाय:- ऊनी वस्त्र निर्माण उद्योग(Hosiery Products Mfg.) का निजी व्यवसाय
जीवन का एकमात्र ध्येय:- ज्योतिष एवं वैदिक ज्ञान-विज्ञान को लेकर समाज में फैली भ्रान्तियों को दूर कर,उसके सही एवं वास्तविक रूप से परिचय कराना।
शौक:- पढना और लिखना
ब्लाग:- ज्योतिष की सार्थकता

असली हिन्दुस्तान तो यहीँ इस ब्लागजगत में बस रहा है

कितना अद्भुत है ये हिन्दी ब्लागजगत! जैसे ईश्वर नें सृ्ष्टि रचना के समय भान्ती भान्ती के जीवों को उत्पन किया, सब के सब सूरत, स्वभाव और व्यवहार में एक दूसरे से बिल्कुल अलग। ठीक वैसे ही इस ब्लाग संसार में भी हजारों लोग दिन रात अलग अलग मसलों पर लिखे जा रहे हैं----लेकिन क्या मजाल कि वे किसी एक भी बात पर कभी एकमत हो सकें। सब एक दूसरे से निराले और अजीब। ये वो जगह हैं जहाँ आपको हरेक वैराईटी का जीव मिलेगा। यहाँ आपको आँख के अन्धे से अक्ल के अन्धे तक हर तरह के इन्सान के दर्शन होंगें। मैं तो कहता हूँ कि सही मायनों में यहीं असली हिन्दुस्तान बस रहा है। ऊपर वाले नें अपनी फैक्ट्री में मनुष्य जाति के जितने भी माडल तैयार किए होंगें, उन सब के नमूने आपको यहाँ देखने को मिल जाएंगें। जहाँ के पुरूष औरतों की तरह लडें, जहाँ के बूढे बुजुर्ग बात बात में बच्चों की तरह ठुसकने लगें, जहाँ एक से बढकर एक भाँड, जमूरे, नौटंकीबाज आपका मनोरंजन करने को तैयार बैठे हों, जहाँ मूर्ख विद्वानों को मात दें और जहाँ लम्पट देवताओं की तरह सिँहासनारूढ होकर भी ईर्ष्या और द्वेष में पारंगत हों, तो बताईये भला आप इनमें दिलचस्पी लेंगें या घर में बीवी बच्चों के साथ बैठकर गप्पे हांकेंगें ।

गधे और घोडे कैसे एक साथ जुत रहे हैं। शेर और बकरी कैसे एक साथ एक ही घाट पर पानी पीते हैं। यदि यह सब देखना है तो बजाए घर में बाल बच्चों के साथ सिर खपाने या टेलीवीजन पर अलाने-फलाने का स्वयंवर या सास-बहु का रोना धोना देखकर अपना ब्लड प्रैशर बढाने के यहाँ हिन्दी चिट्ठानगरी में पधारिए और हो सके तो अपने अडोसी-पडोसी, नाते रिश्तेदार, दोस्त-दुश्मन सब को हिन्दी चिट्ठाकारी का माहत्मय समझाकर उन्हे इस अनोखी दुनिया से जुडने के लिए प्रोत्साहित कीजिए क्यों कि निश्चित ही आने वाला कल हिन्दी ब्लागिंग के नाम रहने वाला है। ऎसा न हो कि कल वक्त आगे निकल जाए और आप पिछडों की श्रेणी में खडे उसे दूर जाते देखते रहें।


2 comments:

  अल्पना वर्मा

23 May 2010 at 16:59

बहुत तीखा व्यंग्य!
:D :D

  प्रकाश गोविन्द

23 May 2010 at 19:14

"जहाँ एक से बढकर एक भाँड, जमूरे, नौटंकीबाज आपका मनोरंजन करने को तैयार बैठे हों, जहाँ मूर्ख विद्वानों को मात दें और जहाँ लम्पट देवताओं की तरह सिँहासनारूढ होकर भी ईर्ष्या और द्वेष में पारंगत हों"

प्रभु आनंद आ गया
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मढ़वा के रखने लायक
बहुत जानदार व्यंग लेखन

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