वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री विनोद कुमार पांडेय

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री विनोद कुमार पांडेय की रचना पढिये.

लेखक परिचय :-
नाम-विनोद कुमार पांडेय

जन्मस्थान: वाराणसी

शिक्षा: मास्टर ऑफ कंप्यूटर अप्लिकेशन
उम्र: २६ वर्ष
व्यवसाय: नौकरी
शौक: पढ़ना एवम् लिखना
ब्लाग : मुस्कुराते पल-कुछ सच कुछ सपने



फर्स्ट स्टैंडर्ड के एक बालक को,

आधुनिकता के सर्वोच्च सुचालक को,

पिता जी अँग्रेज़ी पढ़ा रहे थे,

अपने महाज्ञानी बच्चे का ज्ञान बढ़ा रहे थे.

हिन्दी से अँग्रेज़ी का ट्रांसलेशन समझा रहे थे,

बीच बीच में रिमोर्ट का बटन भी दबा रहे थे,

टेलीविजन के बड़े शौकीन थे,

शायद इसीलिए कुछ ऐसे सीन थे,

पढ़ाई के इसी दौर में,

अपने नटखट बच्चे से फिर पूछे,

"पानी ठंडा है"इसका अँग्रेज़ी अनुवाद बताओ,

सही तरीके से ट्रांसलेशन करके दिखलाओ,

बच्चे ने पहले तो अपनी ज़ोर लगायी,

पर बात कुछ बन नही पायी,

थोड़ी देर सोचने के बाद अचानक ही,

उसके दिमाग़ की बत्ती जली,

चेहरा कुछ इस कदर खिला,

जैसे कोई खजाना मिला,

मुँह खोला और ज़ोर से बोला,

पानी मतलब वाटर और ठंडा मतलब कोकाकोला,

इसलिए सही ट्रांसलेशन हुआ,"वॉटर ईज़ कोकाकोला",

यह सब टेलीविज़न का प्रभाव हैं,

पिताजी डरे,

बेटे के गाल पर दो तमाचा धरे,

फिर बीवी को बुलाए,समझाए,

कि घर में अब टी. वी. खुलने नही पाए,

यह टी. वी. ही है,जो इसे बिगाड़ रहा है,

मैं अँग्रेज़ी पढ़ा रहा हूँ,

और ई ससुरा डायलॉग झाड़ रहा है.

बच्चा है,सब ठीक हो जाएगा,

बीवी समझाई,

पर इनकी समझ में कुछ नही आई,

बातों बातों में बीवी ने,

एक और छुपी बात बोल दी,

इनकी भी एक पोल खोल दी,

बोली एक समय आप भी तो बिगड़े थे,

मैं नही जानती आप ने ही बताए थे,

सेकेंड स्टॅंडर्ड में रामायण के लेखक,

रामानंद सागर लिख कर आए थे,

क्या यह टेलीविज़न का प्रभाव नही था?,

और याद है कुछ और भी तो खास किए थे,

भारत का दिल दिल्ली की जगह वोल्टास किए थे,

आख़िर बेटा है आपका,

बाप पर ही जाएगा,

जब आप सुधर गये,

तो एक दिन वो भी सुधर जाएगा,

बोलती बंद हो गयी पातिदेव जी की,

आगे कुछ नही बोल पाए,

अपने दिन याद किए,

और मुस्कुराते हुए बाहर की ओर हो लिए.


तारी 20 मई 2010

4 comments:

  Rekhaa Prahalad

20 May 2010 at 18:47

like father,like son ;)

  M VERMA

20 May 2010 at 20:34

और फिर कही 'लड़की नीचे खड़ी है' का अनुवाद ऐसा न हो जाये 'Girl is understanding'
बहुत अच्छी रचना

  अविनाश वाचस्पति

20 May 2010 at 21:20

संभावनाओं का सागर है। विनोद का महासागर।

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

20 May 2010 at 22:11

"वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : श्री विनोद कुमार पांडेय" जी को सुन्दर रचनाकारी के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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