वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री M VERMA

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री M VERMA की रचना पढिये.

लेखक का संक्षिप्त परिचय :
मेरा परिचय :
नाम : M Verma (M L Verma)
जन्म : वाराणसी
शिक्षा : एम. ए., बी. एड (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय)
कार्यस्थल : दिल्ली (शिक्षा विभाग, दिल्ली सरकार) अध्यापन
बचपन से कविताओं का शौक. कुछ रचनाएँ प्रकाशित / आकाशवाणी से प्रसारित. नाटकों का भी शौक. रस्किन बांड की ‘The Blue Umbrella’ आधारित नाटक ‘नीली छतरी’ में अभिनय (जश्ने बचपन के अंतर्गत). भोजपुरी रचनाएँ भी लिखी है. दिल्ली में हिन्दी अकादमी द्वारा आयोजित ‘रामायण मेले’ में भोजपुरी रचना पुरस्कृत. हिन्द युग्म जनवरी मास 2010 की कविता प्रतियोगिता में प्रथम स्थान.
ब्लाग : जज्बात एवम यूरेका

एक्सचेंज आफर

क्या खोना क्या पाना है
आजकल एक्सचेंज आफर का जमाना है
पहुँचने से पहले ही लोग
वापस चल देते है.
पुरानी तो पुरानी नई चीज़ों को भी
आफर के चक्कर में बदल देते हैं।

मेरी पत्नी को एक्सचेंज आफर
बहुत रास आता था.
स्कूल से वापस जाकर
अक्सर अपनी प्रिय वस्तुओं को भी
घर में नहीं पाता था.
पूछने पर यही जवाब मिलता था -
क्या खोना क्या पाना है
आजकल एक्सचेंज आफर का जमाना है.

होता यह था कि
आफर के चक्कर में
वे उन्हें बदल आती थीं
बड़े शौक से बदले में मिली वस्तु
मुझे दिखाती थीं।

एक दिन बड़े प्यार से बोलीं
सुनिये जी !
मैने भी उसी लहजे में कहा
कहिये जी !
वे बोली देखिए अपना फ्रिज
कितना पुराना हो गया है -
फ्रिज नहीं ये तो कबाड़खाना हो गया है
अगर आप कहें तो
एक्सचेंज करके नया लाती हूँ.
सहमति हो आपकी तो
घर की हर चीज को
नया करके दिखाती हूँ.

मैने कहा -
भला इसमें किसे होगा ऐतराज
हर चीज को बदल कर कुछ नया लाओ
आजकल एक्सचेंज का जमाना है
मुझे भी कुछ एक्सचेंज करवाना है
छूटते ही वे बोली
ये तो मेरे लिये चुटकियों का काम है
बस तुम उस चीज़ का नाम बताओ.

मैने कहा -
तुम तो मेरे दिल की रानी हो गई हो
पर कहने में कोई शरम नहीं कि
अब तुम थोड़ी पुरानी हो गयी हो.
हो सके तो अपने को एक्सचेंज कर आना
अपने बदले किसी नई को लाना
ये तो बहुत आसान काम है
क्योंकि आजकल है
एक्सचेंज आफर का जमाना.

तभी से उनकी यह आदत छूट गयी है
अब वे पुरानी चीज़ों से ही काम चला लेती है,
पुरानी चीज़ों में ही नयापन ढूढ़ लेती हैं
उन्हें ही चमकाकर पड़ोसिनों को जला लेती हैं

तारी 8 मई 2010

3 comments:

  प्रकाश गोविन्द

8 May 2010 at 17:25

बढ़िया हास्य रचना
बधाई
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वैसे वर्मा जी आप भी तो उतने ही पुराने थे :)

  यशवन्त मेहता "यश"

8 May 2010 at 17:32

वाह वाह क्या आईडिया लगाया
और खुद को होने exchange से बचाया
अरे ताऊ देख वर्मा जी ने फ्री में आईडिया दिया हैं
कभी ताई तन्ने exchange करने लगे तो यो आईडिया लगा लियो
व्हाट एन आईडिया सर जी

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

8 May 2010 at 18:44

:-) वाह्! बढिया हास्य रचना...आनन्द आया पढकर.
आभार्!

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