वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री अविनाश वाचस्‍पति

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री अविनाश वाचस्पति की रचना पढिये.

लेखक परिचय :-
अविनाश वाचस्‍पति,
साहित्‍यकार सदन, पहली मंजिल,
195 सन्‍त नगर,
नई दिल्‍ली 110065
मोबाइल 09868166586/09711537664



लालकिले को कैसे उड़ायेंगे ?

इस आजादी पर
जो कल आ रही है
पर पहले तो हम
भारतवासियों के
मन पर छा रही है

उसके मनाने से
ठीक पहली संध्‍या को
आतंकवादियों ने दी है
धमकी कि वे लालकिला
उड़ायेंगे , पर मैं सोच
रहा हूं कि क्‍या उड़
सकता है लालकिला भी।

अवश्‍य ही वे कल
एक पतंग उड़ायेंगे
उस पर लालकिले
की तस्‍वीर लगायेंगे
और करेंगे अपनी
तमन्‍ना पूरी उड़ाने
को लालकिले की।

लग रहा है आतंकवादी
बच्‍चे हैं
बच्‍चों को ही किसी को
भी उड़ता देखने की
होती है ख्‍वाहिश।

चाहे वे उनके खिलौने ही
हों , या विचार हों अथवा
प्रश्‍न हों उनके , जिनके
उत्‍तर न मिल सकते हों
पर वे उड़ते नजर आयें
जैसे उड़ते हैं गुब्‍बारे
तो बच्‍चे खुश हो जाते
हैं , मौज मनाते हैं।

हम भारतीय भी
आजादी की इसी
पूर्व संध्‍या पर
करते हैं घोषणा
कि हम आतंकवादियों
को उड़ायेंगे , नहीं उड़ाया
गर तो बंद कर देंगे
बांध देंगे या निकाल देंगे
उनकी हवा , जैसे गुब्‍बारे
बिना हवा के हो जाते हैं।

वही हश्र इस दफा करना
है , आतंकवादियों को
और उनके कुत्सित
मंसूबों को दफा करना है।

पोतनी है कालिख
उनकी करतूतों पर
और उतारना है नकाब
उनका , करना है चिंदी
चिंदी , बोलो जय भारत
जय जय भारत और
जय जय जय जय हिंदी।


तारी 1 जून 2010

4 comments:

  दीपक 'मशाल'

1 June 2010 at 18:10

बेहतरीन व्यंग्य कविता.. बधाई सर..

  विनोद कुमार पांडेय

1 June 2010 at 20:20

बहुत खूब..बढ़िया रचना..बधाई

  डॉ० डंडा लखनवी

1 June 2010 at 23:55

आतंकियों पर जोरदार टिप्प्णी के लिए साधुवाद।
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वस्तुत: ये आतंकी
हैं पूरे मंकी,
लुक-छुप कर
चमन को उजाड़ रहे हैं
शान्ति-व्यवस्था का
हुलिया बिगाड़ रहे हैं।
सद्भावी- डॉ० डंडा लखनवी
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  M VERMA

2 June 2010 at 07:36

बहुत सुन्दर

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