वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री विनोद कुमार पांडेय

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री विनोद कुमार पांडेय की रचना पढिये.

लेखक परिचय :-
नाम-विनोद कुमार पांडेय

जन्मस्थान: वाराणसी

शिक्षा: मास्टर ऑफ कंप्यूटर अप्लिकेशन
उम्र: २६ वर्ष
व्यवसाय: नौकरी
शौक: पढ़ना एवम् लिखना
ब्लाग : मुस्कुराते पल-कुछ सच कुछ सपने


कुछ हीरोबाज़,जो अधिकतर वाहन स्टैंड पर पाएँ जाते है..

(विनोद कुमार पांडेय)

रजनीगंधा खाकर के,कुल दाँत सड़ाये बैठे हैं,

हीरोबाज़ी के ठप्पा, मुँह पर ठपकाये बैठे हैं.

लतखोरी मे पारंगत ,सब शरम घोल कर गटक गये,

दाँत निपोरी के तो जैसे,टिकिया खाए बैठे हैं,

पूर्ण लफंगा, सब से पंगा,फटा शर्ट पैंट अधटंगा,

चिकती चिकती लगा लगा कर,बबुआ काम चलाए बैठे हैं,

चार लफंगे और जोड़ कर,घूम रहे हैं,इधर उधर,

मँगनी की पल्सर लेकर , ई धूम मचाये बैठे हैं,

घर मे लोग रहे जैसे भी,इनकी शान सलामत हो,

पास पड़ोसी मे बस झूठी,धाक जमाए बैठे हैं,

बने निठल्ले घूम रहे है, ना करनी करतूत,

नाम करेंगे फ्यूचर मे ,सब को भरमाए बैठे हैं,

माँ,बापू को बहला-फुसला,रूपिया ऐठ रहे घर से,

बदनामी ही सही गुरु ,पर नाम कमाए बैठे हैं,




तारी4जून 2010

4 comments:

  M VERMA

4 June 2010 at 05:28

पूर्ण लफंगा, सब से पंगा,फटा शर्ट पैंट अधटंगा,चिकती चिकती लगा लगा कर,बबुआ काम चलाए बैठे हैं,
चार लफंगे और जोड़ कर,घूम रहे हैं,इधर उधर,मँगनी की पल्सर लेकर , ई धूम मचाये बैठे हैं,
वाह विनोद जी क्या दृश्य खीचा है
बहुत सुन्दर

  आचार्य जी

4 June 2010 at 05:53

आईये जाने ..... मन ही मंदिर है !

आचार्य जी

  अन्तर सोहिल

4 June 2010 at 13:09

आज के नवयुवकों पर गहरा कटाक्ष
बहुत सही व्यंग्य है
आपका धन्यवाद हमें यह रचना पढवाने के लिये

प्रणाम स्वीकार करें

  बेचैन आत्मा

8 June 2010 at 08:07

..बदनामी ही सही गुरु ,पर नाम कमाए बैठे हैं.
..वाह! क्या बात है !! करार कटाक्ष है आजकल के बेरोजगार नवयुवकों पर जो दिनभर आवारागर्दी करने में ही अपनी शान समझते हैं.
..आपकी कलम धारदार हो रही है...बधाई.

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