वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता मे : श्री संजय कुमार चौरसिया

प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री संजय कुमार चौरसिया की रचना पढिये

लेखक परिचय
नाम :-- संजय कुमार चौरसिया

माता :-- श्रीमती जानकी देवी चौरसिया

पिता :-- श्री जगत नारायण चौरसिया

जन्म :--- १५ मार्च १९७८

शिक्षा :--- M. COM

स्थान :---- शिवपुरी , मध्य-प्रदेश

ब्लाग : संजय कुमार



कहीं नेताजी की नजर ना पड़ जाये

हिंदुस्तान के नेताजी का क्या कहना ! एक पहुंचे हुए या विख्यात पुरुष के रूप मैं जाने जाते हैं ! या यूँ कह सकते हैं ! वह व्यक्ति जिसके पास होती है पारखी नजर ! और पहुंचे हुए लोगों की खोज करने बाला ! अरे नहीं समझे अपनी पार्टी के लिए बिख्यात लोगो को ढूढने बाला ! जिन्होंने अपनी ही पार्टियों के लिए ढूढे ऐसे लोग जो पहले से ही पहुंचे हुए थे ! अरे भई हम सबके प्यारे बाहुबली सांसद नेता ! आज ऐसे ही लोगों की तलाश मैं रहते हैं ! हमारे खादीधारी नेता ! फिर चाहे कोई भी कीमत हमारी प्यारी जनता को चुकानी पड़े ! क्या आप भूल गए डाकू फूलनदेवी जो कभी दस्यु सुन्दरी हुआ करती थी ! जब खून-खरावा छोड़ दिया तो हमारे नेताओं की खोजी नजर उन पर पड़ ही गयी! और देखते देखते हम सब के बीच हमारी प्रिये नेता बन गयी ! फिर शहाबुद्दीन हों या राजा भैया ! पप्पू यादव हों या अन्य कोई सांसद यह सब कहाँ थे पहले ! जब इनके ऊपर हमारे नेताओं का रहमों करम हुआ !और आज हम सब के बीच मैं यह लोग आराम की (ऐश ) जिंदगी बिना किसी झंझट के ! मजे से सरकारी खर्चे पर जी रहे हैं ! सब हमारे नेताओं की बजह से ! जय हो देश के महान पुरुषों ............कुछ दिनों पहले खबर लगी की कुख्यात सरगना अबू-सलेम भी अब चुनाव मैदान मैं कून्दने बाला हैं ! तब तो मजा आ जायेगा ! हमारे नेताजी इनसे भी बड़ा बाला कोई कुख्यात, कहीं से भी किसी भी हालत मैं ढूंढकर ले आयेंगे और इसके विपक्ष मैं खड़ा कर देंगे ! और फिर यह लोग इस देश को कुख्याय लोगों की ऐशगाह बना देंगे !

हमारी सरकार तो सिर्फ इतना सा आदेश दे दे की , प्यारे नेताओं आप को खुली छूट दी जाती है ! आप हिंदुस्तान की किसी भी जेल से कोई भी छोटा बड़ा आतंकवादी, छोटा बड़ा गंगस्टर , सबसे बड़ा हत्यारा जिसके सर १०० -१५० खून हों या कोई नरपिशाच ! और इस तरह की सारी खूबियों बाले इन्सान को अपनी पार्टी के लिए चुन सकते हैं ! तो देखिये क्या होता है फिर ! अरे भई पार्टिया और आज के यह दल कम पड़ जायेंगे ! या फिर कोई नेता अपनी असली पार्टी को छोड़कर ! इन लोगों के साथ एक नयी पार्टी का गठन कर लेंगे ! काश कुख्यात सरगना "डी कम्पनी " भी भारत मैं होता तो हमारे नेताजी उनको भी अपनी पार्टी मैं लेने के लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाते ! पर बो तो कहीं दूर बैठा है ! जिसको हमारे नेताजी नहीं खोज पा रहे हैं ! अभी तक फंसी की सजा काट रहे अफजल गुरु पर भी नेताओं की नजर नहीं पड़ी ! नहीं तो संसद पर हमले मैं शामिल यह !वहीँ संसद मैं आज बैठा होता ! सब नेताजी की कृपा है !

अगर यह इजाजत मिल जाये की! आप लोग कहीं से भी अपनी पार्टी के लिए उम्मीदवार चुन सकते हो ! देश या विदेश कहीं से भी ! तो नेताजी सबसे पहले पाकिस्तान भागेंगे क्योंकि हमारे यहाँ से ज्यादा तो वहां पर अनेकों खूबियों बाले एक से बढ़कर एक मिल जायेंगे ! मैं कहता हूँ नेताजी को वहां जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी ! हमारे यहाँ की जेलों मैं कई कुख्यात आतंकवादी बंद हैं ! जिनकी देखभाल हम किसी अतिथि से कम नहीं करते ! उन्हीं मैं से कोई एक आध अच्छा ढूंढ लेंगे ! अरे मैं तो भूल ही गया ताजा ताजा आतंकवादी तो हम सब जानते ही हैं ! अरे भई मुंबई हमलों का दोषी "मियां कसाब" अब तो उसे फंसी भी हो गयी है ! उसके पास तो सब कुछ हैं ! क्योंकि उसे फंसी की सजा तो हो गयी , लेकिन उसे फंसी मिलती कब है, यह कोई नहीं जानता ! अगर नहीं मिली तो वह जरूर इन नेताओं की पकड़ मैं एक दिन आ जायेगा ! और फिर ..........

क्योंकि आज के दिन हम सब के प्रिये राजीव गाँधी की हत्या करने बाली महिला नलिनी की फांसी की सजा भी माफ़ हो गयी है ! और वह अब बाहर आने बाली है ! उस पर भी इन नेताओं की नजर पड़ेगी ! और फिर क्या होगा यह बात हम सब अच्छी तरह से जानते हैं !


अब तो हम सबको डर लगने लगा है , की ऐसे लोगों पर ...........कहीं नेताजी की नजर ना पड़ जाये


धन्यवाद


धन्यवाद
http://sanjaykuamr.blogspot.com


तारी 2जून 2010

2 comments:

  M VERMA

2 June 2010 at 17:48

बहुत बढिया

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

2 June 2010 at 18:29

बहुत सुन्दर आलेख!

राम-राम!

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