चमत्कार : नागपंचमी पर असली नागों ने दूध पीया

आज नागपंचमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाए! आज सुबह सुबह ही सबसे पहला बधाई संदेश प्राप्त हुआ श्री समीरलाल जी से... आप भी पढिये :-

Sameer Lal to me

आज नागपंचमी है. व्यस्तता के चलते आपके दर्शन तो संभव नहीं, इसलिए सोचा कि ईमेल से ही नमन कर लूँ. मौका भी है, दस्तूर भी और जमाने की इजाजत तो खैर है ही!!

सादर नमन!!

समीर लाल


वैसे हमने पहले ही नागपंचमी को सभी इष्टमित्रों को दुध पिलाने का कार्यक्रम रखा हुआ था. आईये उसी अवसर की कुछ तैयारियों के चित्र दिखाते हैं. अभी तो कल तक नागपंचमी का त्योंहार रहेगा. अत: सभी मित्र जनों से आग्रह है कि इस पावन अवसर पर पधार कर दूध पीयें और त्योंहार को सार्थकता प्रदान करें.

सबसे पहले तो ताई ने आज सुबह सुबह ही भैंस का ताजा ताजा पौष्टिक दूध निकाला जिससे कि शुद्ध दूध का स्वाद पीने वालों को मिल सकें.

ताई सुबह सुबह भैंस का ताजा और पौष्टिक दुध निकालते हुये


इसके बाद भतीजे श्री ललित शर्मा ने दूध को कडाव में डालकर उबालना शुरु किया जिससे दूध गाढा और मलाईदार बन सके.

नागपंचमी पर पिलाने हेतु दूध को घोटते हुये श्री ललित शर्मा


जब दूध घोटना शुरु होगया तो समस्या हुई की इस मलाईदार दूध को पीने के लिये नाग देवता कहां से आयेंगे? तो हम भागकर बाबाश्री समीरानंद जी की शरण मे गये. बाबा श्री बोले चिंता मत करो...मेरे बीन बजाने के साथ ही नाग देवता प्रकट हो जायेंगे. हम कोई ऐसे वैसे बाबा नही हैं. बल्कि हमारी बीन की मधुर धुन सुनकर नाग देवता अपने असली रूप में आकर स्वयं अपने हाथों से दूध पीयेंगे.

बाबा श्री समीरानंद जी बीन बजाकर नाग देवताओं को बुलाते हुये


बहुत समय बाद बाबाश्री ताऊनाथ भी अपने नाग देबताओं को एक बंगले के बाहर दूध पिलाये जाने की प्रतिक्षा करते रहे.

बाबाश्री ताऊनाथ भी नागों को दूध पिलाने के लिये प्रकट हुये


आखिर बाबाश्री समीरानंद जी ने घोषणा कर दी कि अब मेरा अनुष्ठान पूर्ण होगया है. सभी नाग नागिन देवी देवता अब अपने असल रूप में प्रकट होकर दूध पीयेंगे और बिना किसी को कोई नुक्सान पहूंचाये चले जायेंगे. और जो भी इनको दूध पिलायेगा उन्हें बहुत पुण्य मिलेगा.

नागों के लिये मलाईदार दूध तैयार करवाते डाँ. शाश्त्री, श्री शेखावत और श्री ललित शर्मा


यह घोषणा सुनते ही डा.रुपचंद्रजी शाश्त्री "मयंक, , श्री रतनसिंह शेखावत ने पुण्य कमाने के लिये दूध का बडा कडाव ही लगवा दिया. और श्री ललित शर्मा ने दूध में केशर इलायची डालकर दूध को घोट घोट कर मलाईदार बना दिया, जिससे अपने असली स्वरूप में प्रकट होकर दूध पीने वाले नाग/नागिन देवी/देवताओं का आशीर्वाद लिया जा सकें.

इसके बाद राह चलते लोगों में से कई लोग रूककर दूध पीते देखे गये. ताऊ टीवी के फ़ोटोग्राफ़र ने वहां कुछ फ़ोटो भी खींचे जिनमे से एक फ़ोटो आप नीचे देखिये.

अपने असली स्वरूप में दूध पीते हुये ताऊ, समीर जी और श्री राज भाटिया


जो भी मित्र गण दूध ग्रहण चाहें वो आकर दूध ग्रहण कर अपना जन्म सार्थक करें. और प्रसन्न होकर हमें अभय वरदान देवें. अभी दूध बहुत बाकी है.

कृपया नोट करें :- यह शुद्ध और असली भैंस का दूध है जिसमे असली केशर, बादाम, पिस्ता और इलायची डालकर तैयार करवाया गया है. अत: आपसे निवेदन है कि आकर अवश्य पीयें. जिन नागों को नकली दूध पीने की आदत हो वो कृपया थोडा कम ग्रहण करें क्योंकि असली भैंस का दूध कोई रियाजी नाग देवता ही पचा सकते हैं.

दूध ग्रहण करने के आमंत्रण के साथ आप सभी को नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

27 comments:

  M VERMA

14 August 2010 at 16:55

हम तो मदर डेयरी का ही पी पाते हैं .. शुद्ध कहाँ पचा पायेंगे.

  Udan Tashtari

14 August 2010 at 17:17

हा हा!!


नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

  अन्तर सोहिल

14 August 2010 at 17:25

लो ताऊ जी मैं भी आ गया, दूध पीने।
ताई ने Castrol की बाल्टी में दूध निकाला है, आशा है इसे पीकर मेरी भी स्पीड बढ जायेगी।

मजा आ गया
प्रणाम स्वीकार करें

  डॉ० डंडा लखनवी

14 August 2010 at 17:56

डॉ० डंडा लखनवी...कथन..(नौटंकी)
दूध ही दूध है, लेश पानी नहीं।
है मिलावट की इसमें निशानी नहीं॥
दूध गरमा गरम है, मलाई भी है।
हुई केसर की इस में घोटाई भी है॥

नगाड़े की आवाज..कड़...अड़...कड़...अड...घम।)

भाँग इसमें हे नागो गज़ब की पड़ी।
पीते -पीते लगी घूमने खोपड़ी॥
है अनोखी यहाँ नाग महफिल जमी।
आदमी नाग हैं, नाग ही आदमी॥
(नगाड़े की आवाज...कड़....अड़...कड़...अड...घम।)

  डॉ० डंडा लखनवी

14 August 2010 at 17:59

(नौटंकी) डॉ० डंडा लखनवी....कथन.....

दूध ही दूध है, लेश पानी नहीं।
है मिलावट की इसमें निशानी नहीं॥
दूध गरमा गरम है, मलाई भी है।
हुई केसर की इस में घोटाई भी है॥

(नगाड़े की आवाज...कड़....अड़...कड़...अड...घम।)

भाँग इसमें हे नागो गज़ब की पड़ी।
पीते -पीते लगी घूमने खोपड़ी॥
है अनोखी यहाँ नाग महफिल जमी।
आदमी नाग हैं, नाग ही आदमी॥
(नगाड़े की आवाज...कड़....अड़...कड़...अड...घम।)

  परमजीत सिँह बाली

14 August 2010 at 18:10

बहुत जोरदार फोटॊ और पोस्ट है....पढ़ कर मजा आ गया।;)

  P.N. Subramanian

14 August 2010 at 19:02

मजेदार.

  संगीता स्वरुप ( गीत )

14 August 2010 at 19:45

हा हा ..बहुत बढ़िया ...आज कल नाग हर जगह मिल जाते हैं ..बहुत मजेदार पोस्ट ..

  ललित शर्मा-للت شرما

14 August 2010 at 19:54

सारे नाग पिटारी में बंद कर दिए संपेरों ने।
सुबह से ही लैन लगा राखी थी गेट पै।

नागपंचमी की बधाई

  निर्मला कपिला

14 August 2010 at 20:00

अज दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया नागों को दूध पीते देख कर हम तो डर ही गये रोज़ इनके बिल मे हाथ डालते हैं कहीं डस लेते तो? हा हा हा बहुत बडिया । हमे तो इन्सान ही रहने दें हम नही आयेंगे दूध पीने। शुभकामनायें ताऊ। स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनायें

  संजय भास्कर

14 August 2010 at 20:15

ताऊ जी मैं भी आ गया, दूध पीने।

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

14 August 2010 at 21:36

ताऊ हमने तो दूध पीना ही कभी से छोड रखा है....

  रानीविशाल

14 August 2010 at 23:43

Taauji,
Ramram
Meri bhi majburi hai dudh mujhe pasand hi hai..isliye in sabko dudh pite dekh kar hi kaam chala liya>
Aaj ki post main aapke liye Anushka ki updates bhi hai :)
Dekhiyega

  Arvind Mishra

15 August 2010 at 07:40

नागिनियाँ नहीं दिख रही हैं ? राम राम ताऊ -स्वतंत्रता दिवस की जै जै !

  दिलीप कवठेकर

15 August 2010 at 10:49

असली भैंस का दूध है, या भैंस का असली दूध है, यह स्पष्ट करें, फ़िर पीने आयेंगे.

  Ratan Singh Shekhawat

15 August 2010 at 13:17

नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

  काजल कुमार Kajal Kumar

15 August 2010 at 15:22

सिंथेटिक दूध पर पलने वाली ये पीढ़ी कुछ भी पचा सकती है.. लक्कड़ हज़म पत्थर हज़म.

  'उदय'

15 August 2010 at 19:31

... behatreen .... svatantrataa divas kee badhaai va shubhakaamanaayen !!!

raam raam

  JHAROKHA

15 August 2010 at 19:49

aadarniy tauu ji,
aapki vyangatmakta liye hasya bhaari padh kar to aanand hi aa gaya.
par majburi ye hai dudh mujhe hajam nahi hota aur malaai to bilkul bhi pasand nahi.atah iske liye xhma chahti hun.
pranaam,
poonam

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

15 August 2010 at 22:56

बन्दी है आजादी अपनी, छल के कारागारों में।
मैला-पंक समाया है, निर्मल नदियों की धारों में।।
--
मेरी ओर से स्वतन्त्रता-दिवस की
हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार करें!
--
वन्दे मातरम्!

  डा. अरुणा कपूर.

20 August 2010 at 14:18

....तो ताई इतनी मेहनत करती है...वाह!...आप का नागों को दूध पिलाने का काम भी अच्छा है ताउजी!...मजा आ गया!

  राज भाटिय़ा

31 August 2010 at 20:40

अरे ताऊ जी दुध तो असली है, ओर भेंस् का है, क्या आप की यह भेंस असली है? मजेदार जी.

नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

  डा. अरुणा कपूर.

2 September 2010 at 11:45

....जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई!.... सब मंगलमय हो!

  Pawan Kumar

2 September 2010 at 19:25

hahahaha, bahut khub

  निर्मला कपिला

3 September 2010 at 10:08

ताऊ ये क्या आपने तो मलाईदार दूध बनवा दिया क्या आपको पता नही कि मेरे नाग देवता ने मुझसे भार घटाने का प्रण लिया है? मुझे तो फैट फ्री दूध चाहिये बस। नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

  RAJWANT RAJ

10 September 2010 at 19:14

tau ji
sadr nmskar
phli dfa aapse mukhatib hu .bhut umda. doodh se pet ki bhookh shant hui mgr aapki post dekh kr dimagi bhookh our jyada prbal ho gai .vichrn ki ijazt dijiye .

  anjana

28 September 2010 at 23:08

:-)

बहुत बढ़िया .

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