एक उदास शाम


पता नही ये शाम इतनी उदास सी क्यों हो गई है? शायद इसने  भी अपने किसी जाने वाले की याद में खामोशी ओढ ली  है.




26 comments:

  राज चौहान

28 June 2013 at 05:53

वाह सुंदर

  Murari Pareek

28 June 2013 at 18:39

ये तो सीधी दिल से निकली बात है...

  Murari Pareek

28 June 2013 at 18:41

ताउजी अपने पवन कदम हारेदार भी लायें पुन: कोशिश की है एक बार

  Suman

29 June 2013 at 06:32

किसी से दुरी का कर अहसास
शाम इस तरह हुई होगी उदास ...

  Amrita Tanmay

30 June 2013 at 18:12

उदासी भी हतप्रभ है . बेहद खूबसूरत ...

  Aditya Tikku

1 July 2013 at 11:30

ek pankti mai - sampurn bhav - too good -***

  आशा जोगळेकर

2 July 2013 at 18:19

जितना खूबसूरत चित्र उतना ही सार्थ शीर्षक । उस घटना को याद करके एसी ही उदासी छाई है ।

  jyoti khare

2 July 2013 at 20:36

वाह भाई जी
उदास शाम को क्या विश्लेषित किया है
बहुत सुंदर
सादर

  rohitash kumar

6 July 2013 at 04:28

ताउ औऱ उदास....ये न हो सके है..हां तस्वीर में उदासी हो या शाम की सुंदरता ये तो देखन वाले पर निर्भर करता है....पर मने लगता है कि ताउ के दिल में उदासी छाई है इसलिए खूबसूरत तस्वीर में भी उदासी छा गई....

के बात से ताउ...आप तो कभी उदास नहीं होते थे।

  कविता रावत

8 July 2013 at 17:11

उदास मन हो तो शाम भी उदास नज़र आती है ..
बहुत खूब!

  Maheshwari kaneri

11 July 2013 at 19:19

सच है हर जाती हुई चीज़ अच्छी नही लगती है... बेहद खूबसूरत

  हरकीरत ' हीर'

12 July 2013 at 10:15

वो शाम कुछ अजीब थी
ये शाम भी अजीब है ......

  Dr (Miss) Sharad Singh

12 July 2013 at 11:49

बेहद खूबसूरत ...

  kavita verma

13 July 2013 at 14:08

tanha sham ...

  Ankur Jain

13 July 2013 at 20:10

हर शाम को ढलता हुआ सूरज इक दिन का क़त्ल कर जाता है...

  Shikha Gupta

14 July 2013 at 21:06

दरख्त चोट खाया है
फलक पे उदासी का साया है

  प्रसन्न वदन चतुर्वेदी

19 July 2013 at 05:03

उम्दा अभिव्यक्ति.... पर ये उदासी क्यों ...

  महेन्द्र श्रीवास्तव

30 July 2013 at 16:11

सही कहा आपने..

  Virendra Kumar Sharma

1 August 2013 at 06:35

बेहद का सुन्दर है यह मनोहारी छायांकन। दृष्टि ताऊ सा की।

  Virendra Kumar Sharma

1 August 2013 at 06:35

बेहद का सुन्दर है यह मनोहारी छायांकन। दृष्टि ताऊ सा की।

  वसुंधरा पाण्डेय निशी

3 August 2013 at 11:59

शाम अक्सर शायद सभी को उदास कर जाती है ... !

आपके ब्लॉग पर पहली बार आना हुआ,, आपका फेवरेट संगीत मुझे बहुत प्यारा लगा ....!

  Shikha Gupta

5 August 2013 at 20:15

ओहो !!! आप तो ऐसे न थे

  Anju (Anu) Chaudhary

4 September 2013 at 16:53

वाह ...जिंदगी को अपनी ही नज़र से देखने का अंदाज बेहद खूबसूरत है

  Virendra Kumar Sharma

27 September 2013 at 08:52


ताऊ सब ठीक स ?कोई नै पोस्ट नहीं कई दिन से ?खैरियत तो टिप्पणियों से मिलती है पर पूरी नहीं।

  mahendra mishra

3 November 2013 at 11:32

दीपावली पर्व की हार्दिक बधाई शुभकामनाएं ....

  निर्मला कपिला

1 July 2017 at 01:20

ताऊ राम राम 1

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